बेगुनाह सी मोहब्बत

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 "मेरे प्यारे दोस्तों, आदरणीय प्रोफेसर साहब और उनकी पूरी टीम, हमारे कॉलेज के सारे स्टाफ मेंबर, प्युन काका, मेस वाले अंकल, चौकीदार अंकल, लाइब्रेरियन सर, हमारे प्यारे प्रिंसिपल सर और सारे ट्रस्टी सर! इतने सालों तक हमारी बदमाशियों को और हमें झेलने के लिए थैंक यू सो मच। वो क्या है ना, हमारी शैतानियों से परेशान होकर ही हमारे घर वाले यहां भेजते हैं क्योंकि जितनी देर हम घर में नहीं होते घर में शांति होती है और हमारे पैरेंट्स को रोमांस का टाईम मिल जाता है। असली हंगामा तो हम यहां करते हैं इसीलिए हमारी बदमाशियों को माफ करने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया। लेकिन अब कॉलेज खत्म हो गई है इसलिए मां पापा अब आप लोगों को रोमांस का टाइम नहीं मिलेगा और आप लोगों को ही हमें झेलना होगा। अब तो हम प्रोफेसर्स का सर नहीं खा सकते तो आप ही का खाएंगे। तैयार हो जाओ आप लोग।" कहते हुए उस लड़की ने फेयरवेल में मौजूद अपने मां पापा को देखा तो उसकी मां ने थप्पड़ मारने का इशारा किया और मुस्कुरा दी लेकिन उसके पापा ने हाथ उठाकर थम्स अप का इशारा किया। 

    उस लड़की ने आगे कहा, "डियर ऑल! आज इस फेयरवेल पार्टी में हमें खुशी तो हो रही है लेकिन साथ ही तकलीफ भी हो रही है। हम सारे दोस्त शायद एक दूसरे के टच में हमेशा रहे लेकिन हमारी फैकल्टी और पूरे स्टाफ मेंबर्स के साथ जो हमारा रिश्ता है वह कहीं पीछे छूट जाएगा। यहां आकर, यहां रह कर जो अपनापन और प्यार, जो डांट हमें मिली है शायद ही वह मिले। हमारी पढ़ाई पूरी हो चुकी है और हम सभी अपने अपने करियर में इस तरह लग जाएंगे कि एक दूसरे की खबर ही नहीं लेंगे, यहां तक कि खुद को भी भूल जाएंगे। मैं कोई शिकायत नहीं कर रही बल्कि सच्चाई बता रही हूं। कॉलेज बंक करने के हमारे पास हजारों बहाने हैं लेकिन इस कॉलेज से निकलने के बाद वापस से इस कॉलेज में आने के लिए हमारे पास शायद ही कोई बहाना मिले। इसीलिए यहां से जाने से पहले एक बार जी भर कर इस कॉलेज को देख लो, इन सारे लोगों से मिल लो, बातें कर लो। ना जाने ये मौका हमें हमारी लाइफ में कब मिले ना मिले। इसीलिए मैं आद्या जोशी! यहां से जाने से पहले हम फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स का वेलकम करती है और आगे की पार्टी मैं उन लोगों के हवाले करती हूं। थैंक यू सो मच एवरीवन। एक बात और कहना चाहूंगी! मैस वाले अंकल...........! दाल दाल की तरह लगनी चाहिए, यह नहीं कि कोई भी आकर उसने डुबकी मार जाए। इस बात का ध्यान रखना आप।" आद्या ने मुंह बनाते हुए कहा। उसका चेहरा देख हर कोई वहां ठहाके मारकर हंस पड़ा, खुद मैस वाले इंचार्ज भी खुद को हँसने से नही रोक पाए। 

    आद्या ने माइक फर्स्ट ईयर के एक स्टूडेंट को पकड़ाया और खुद जाकर अपने मम्मी पापा के पास बैठ गई। आद्या अपने क्लास की हमेशा से होशियार और बेहद चंचल लड़की हुआ करती थी। इसलिए प्रोफेसर भी उसे पसंद करते थे। अगले दिन ही उसका 21 वा जन्मदिन था। उसे अच्छे से पता था कल कोई ना कोई सरप्राइज उसे जरूर मिलेगा, आखिर अपने मां पापा कि वह इकलौती लाडली बेटी थी। 

    कॉलेज से निकलते समय सब ने जमकर होली खेली और एक दूसरे के टीशर्ट पर अपना सिग्नेचर दिया। आद्या के दोस्तों का अपना अपना प्लान था। कुछ वही कॉलेज से आगे की पढ़ाई करने वाले थे तो कुछ बाहर जाने वाले थे। कुछ का जॉब करने का सपना था तो किसी ने खुद का स्टार्टअप सोच रखा था। बस एक आद्या ही थी जिसने अभी तक कुछ नहीं सोचा था। वह बस कुछ वक्त अपने घर पर रहकर अपने मां पापा के साथ वक्त गुजारना चाहती थी और एक लंबी वेकेशन पर जाना चाहती थी, वह भी अकेले। क्योंकि उसके पापा जॉब करते थे और उसकी मां कभी उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाती। उसे अपनी लाइफ में आगे बहुत कुछ करना था लेकिन उससे भी पहले वो पूरी दुनिया घूम लेना चाहती थी। 

   आद्या अपने मां पापा के साथ वहां से निकलने को हुई तो उसके कुछ दोस्तों ने उसे रोका और जन्मदिन की एडवांस बधाई दी। आद्या ने कहा, "मुझे खुद नहीं पता कि मैं क्या करूंगी बरना तुम लोगों को कल की पार्टी जरूर देती। अगर सब कुछ ठीक रहा तो हम कल किसी रेस्टोरेंट में मिलते हैं। लेकिन पहले मां पापा की क्या प्लानिंग है मुझे यह देखनी पड़ेगी। तो फ्रेंडस्! हम कल शाम को डिसाइड करते हैं।"

    आद्या के दोस्तों को भी उसकी यह बात सही लगी क्योंकि हर साल उसके पापा कुछ न कुछ प्लान बनाते थे जिसमें आद्या का पूरा दिन निकल जाता था। उसके पापा खासतौर पर उसके लिए अपने ऑफिस से छुट्टी लेते थे और पूरा दिन उसके साथ बताते थे। 

   गाड़ी में बैठते ही आद्या बोली, "क्या पापा! कुछ टाइम में आप रिटायर हो जाएंगे। अब तो एक नई गाड़ी ले लीजिए। रिटायर होने से पहले जब आप नई चमचमाती गाड़ी में ऑफिस जाएंगे तो कितना अच्छा लगेगा!"

   आद्या के पापा ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुरा दिए। कुछ सोच कर उन्होंने पीछे बैठी अपनी बेटी से पूछा, "आदू! कॉलेज में तो तुम्हारे बहुत सारे फ्रेंड है ना! मतलब लड़कियां भी है और लड़के भी है तो क्या ऐसे में कोई ऐसा दोस्त भी है जो तुम्हारा स्पेशल हो?"

     आद्या की मां ने अजीब नजरों से अपनी पति की तरफ देखा। आद्या अपने फोन में लगी हुई थी। अपने पापा का ऐसा सवाल सुनकर उसने हैरानी में अपना सर उठाया और अपना हाथ अपने सर पर मारते हुए बोली, "पापा......! कैसी बात कर रहे हैं आप! वहां जो भी है सब मेरे दोस्त हैं, ना कोई स्पेशल है ना ही कोई दूर का। जो भी है सारे एक जैसे हैं। और वैसे भी मेरे स्पेशल फ्रेंड तो आप ही हैं। आपके अलावा और कौन हो सकता है। और अगर आपके अलावा कोई और हुआ भी तो इस बारे में सबसे पहले मैं आपको ही बताऊंगी ना। मम्मी को बताने का कोई फायदा नहीं है, वैसे ही वह डांट देंगी।"

    आद्या की मम्मी ने दोनों बाप बेटी को गुस्से में देखा और बोली, "आप बाप बेटी का रिश्ता मेरी समझ में कभी नहीं आया। कौन से बाप बेटी आपस में इस तरह की बातें करते हैं? थोड़ा तो लिहाज रखा करो आप दोनों।"

    आद्या के पापा बोले, "बच्चे जब छोटे होते हैं तब उन्हें देखभाल की जरूरत होती है। जैसे जैसे वह बड़े होने लगते हैं देखभाल से ज्यादा उन्हें साथ की जरूरत होती है। बच्चे जब बड़े हो जाए तो उनसे दोस्ती कर लेनी चाहिए वरना बच्चों को भटकते देर नहीं लगती। और वैसे अगर आद्या को कोई पसंद आ जाए तो कहीं बाहर छुप छुप कर मिलने से बेहतर है हम सब को उसकी जानकारी हो। हम तो देखें कि हमारी बेटी की पसंद कैसी है? कोई और आकर हमारी बेटी के बारे में हमें बताएं या ताना दे उससे बेहतर है कि हमारी बच्ची खुद आकर सामने से इस बारे में कहे। उसके दिल में जो भी बात हो वो उसके दिल तक ना रह जाए यह सोचकर कि उसके मां पापा क्या सोचेंगे। वो बेझिझक हमसे अपने दिल की बात कह सकें इससे ज्यादा अच्छी बात और कोई हो ही नही सकती, क्यों बेटा?"कहते हुए जोशी जी ने आद्या की तरफ हाई-फाई करने के लिए हाथ बढ़ाया। 

    आध्या ने भी कहा, "बिल्कुल पापा! आप मेरे बेस्ट फ्रेंड हो।" कह कर उसने अपने पापा के हाथ से हाथ मिला लिया। लेकिन उसी वक्त सामने से आती ट्रक को देखकर आद्या की चीख निकल गई, "पापा.............!!!"



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एक चीख के साथ आद्या की नींद खुली। उसका पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो चुका था और वो बुरी तरह से हाँफ़ रही थी। यह कोई पहली दफा नहीं था जब उसने ऐसा कोई सपना देखा हो। पिछले 3 सालों से हर रात उसकी ऐसे ही गुजरती और हर सुबह वह इसी तरह चिखते हुए उठती। अब तो उसे इस सब की आदत पड़ चुकी थी। इतना लंबा वक्त गुजरने के बावजूद सब कुछ जैसे कल ही उसके साथ हुआ हो। कुछ भी नहीं भूली थी वह, कुछ भी नहीं! 

     कुछ देर आद्या अपने सर को थामें वही बिस्तर पर बैठी रही। उसे अपना होश संभालने में थोड़ा वक्त लगना था इसलिए बिना कोई हलचल किए वो वैसे ही बैठी रही। अचानक से उसकी नजर घड़ी पर गई तो वह बुरी तरह से चौक गई। सुबह के 8:00 बज चुके थे। उसे ऑफिस के लिए निकलना था और वह लेट हो चुकी थी। 9:30 बजे उसे जैसे भी ऑफिस कंपाउंड में पहुंचना था लेकिन उसे उठने में ही आज देर हो गई। 

     आध्या ने अपना कंबल अपने ऊपर से फेंका और भागती हुई बाथरूम में जा घुसी। कुछ देख शावर के नीचे खड़े होकर उसने अपना मन शांत किया और ऑफिस के लिए खुद को तैयार करने लगी। जो जिंदगी अभी वह जी रही थी यह जिंदगी उसे नहीं चाहिए थी, कभी नहीं। एक हादसे में अपने मां पापा को गवाने के बाद उसका अपना कोई नहीं रह गया था। कहने को तो बहुत से रिश्तेदार थे लेकिन एक अकेली लड़की को देखकर सब की नियत खराब होना जायज सी बात थी। 

     आद्या ऑफिस के लिए तैयार हुई और भागते हुए किचन की तरफ गई। सुबह का नाश्ता जो हमेशा उसकी मां उसके लिए बनाया करती थी और उसके पापा उसके प्लेट में से चोरी छुपे उठा कर खा लिया करते थे। अब ऐसा करने वाला कोई नहीं था। ना तो कोई उसके लिए नाश्ता बना कर रखने वाला था और ना ही उसके प्लेट से कोई चुराने वाला। आद्या लाख कोशिश करती लेकिन फिर भी उसकी आंखें नम हो जाती। उसे बिल्कुल भी कुछ खाने का मन नहीं हुआ। नाश्ते में उसने सिर्फ फल काट कर रखे थे, उसने उसी को अपने लंच बॉक्स में डाला और ऑफिस के लिए निकल गई। 

    बाहर उसके पापा की वही पुरानी कार रखी हुई थी जिसे आद्या ने अपने से दूर नहीं होने दिया। एक वक्त था जब आद्या हमेशा अपने पापा से नई गाड़ी लेने को कहती क्योंकि उसे ये पुरानी गाड़ी बिल्कुल भी पसंद नहीं आती थी। उसके दोस्तों के पास नए मॉडल की गाड़ियां थी। उसका भी दिल करता कि उसके पापा उसकी पसंद से नई गाड़ी ले लेकिन उसके पापा बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहते, "इस गाड़ी में बहुत सी यादें जुड़ी हैं। जब तुम पैदा हुई तब तुम्हारी माँ को हॉस्पिटल लेकर जाता था, जब तुम स्कूल जाती थी तो इसे गाड़ी से जाती थी, जब कॉलेज जाती थी तब भी इसी गाड़ी से मैं तुम्हें छोड़ने जाता। इस गाड़ी में हमने बहुत से खुशियों के पल बिताए हैं। ना जाने कितने ही ठहाके इसमें आज भी गूँजते हैं। अपनी खुद की कमाई से लिया था इसे। तेरे दादाजी ने कहा भी था बड़ी गाड़ी लेने को और उन्होंने पैसे भी देने चाहे थे लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने नहीं बल्कि तुम्हारी मां ने मना किया था क्योंकि वह चाहती थी मैं अपने खुद के बलबूते पर लुं फिर चाहे वह छोटी गाड़ी ही क्यों ना हो। आखिर उसके लिए यह एक शान की सवारी थी जिसके लिए कोई उसे कुछ कह नहीं सकता था। ये गाड़ी कोई मशीन नहीं है बेटा! यह हमारी साथी है। हम जब भी खुश होते हैं तो सबसे पहले इसी की तरफ तो देखते हैं। नई गाड़ी लेने से मैं इनकार नहीं कर रहा लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं इस गाड़ी को अपने से दूर कर दे। अहमियत कभी भी पैसों की नहीं होनी चाहिए, पैसे तो हाथ का मैल है। इज्जत करनी है तो इंसानों की करो। उन चीजों की करो जो हमसे हमारे जज्बात जुड़े हैं।"

     अपने पापा की बातें सुनकर आद्या निरुत्तर हो जाती थी। उसे समझ नहीं आता था कि वह इसके बारे में क्या कहें। यह सारी बातों को याद करते हुए आद्या के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट तैर गई लेकिन वह मुस्कुराहट उसकी आंखों तक नहीं पहुंची। उसने प्यार से अपने पापा के उस पुरानी गाड़ी पर हाथ फेरा। यह गाड़ी अभी भी वैसे ही थी जैसे उसके पापा रखते थे। उतने ही प्यार से। अब उनके जाने के बाद उसे एहसास हो रहा था कि यह गाड़ी उसके लिए कितनी खास थी। उसे अफसोस होता था कि उसने अपने पापा से नई गाड़ी की डिमांड की। क्योंकि ना वो ऐसा करती ना ही उनका एक्सीडेंट होता और ना आज वह इस पूरी दुनिया में अकेली सबसे अलग पड़ जाती। 

    उसने एक नजर अपने घड़ी की तरफ दौड़ाई। पहले ही 9 से ऊपर हो चुके थे। ऐसे में आद्या अब अपना और वक्त जाया नहीं कर सकती थी। उसने जल्दी से अपनी स्कूटी निकाली और स्टार्ट कर के वहां से निकल गई लेकिन वह चाहे कितनी भी कोशिश कर ले इन सारी बातों को बहुत अपने दिल से नहीं निकाल पाती थी। इन 3 सालों में बहुत कुछ हुआ था। कुछ ऐसा जिसकी उसने जरा सी भी उम्मीद नहीं थी। वह अब तक नहीं समझ पाई थी कि जो हुआ वह आखिर क्यों हुआ! किसी की क्या दुश्मनी थी उसके पापा से? सीधे-सीधे देखने में वह एक सड़क हादसा था लेकिन बाद में उसे पता चला वो कोई हादसा नहीं बल्कि किसी की बहुत ही सोची समझी साजिश थी। 

    इस सबमें आद्या की खुशकिस्मती कहें या बदकिस्मती जो हो वह जिंदा बच गई वरना उन लोगों ने यह पूरी कोशिश की थी कि उस गाड़ी में सवार कोई भी जिंदा बचने ना पाए। आद्या ने अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश की थी ताकि वह उस इंसान और उस इंसान के मकसद के बारे में जान सके जिसनें उसकी पूरी दुनिया उजाड़ दी थी। उसका नाम तो आद्या को पता चल ही गया था लेकिन इस सबके पीछे की वजह नहीं जान पाई थी। अपनी सोच में गुम आद्या बस चली जा रही थी। सिग्नल रेड होने पर उसे एहसास हुआ और उसने गाड़ी रोक दी।

     वहां अभी वो सिग्नल ग्रीन होने का इंतजार कर रही थी कि तभी उसका फोन बजा। उसने देखा तो उसके पापा के दोस्त जो कि एक लॉयर थे और उसके पापा का केस को इंवेस्टिगेट कर रहे थे, उन्हीं का फोन था। आद्या ने जल्दी से फोन उठाया और कहा, "हैलो अंकल! कोई नई बात पता चली है क्या?"

    उधर से मेहता जी ने कहा, "बेटा आप जब ऑफिस से फ्री होना तो एक बार मुझ से मिलते हुए जाना। शायद कुछ मिला है जो हमें उन लोगों के मोटीव के बारे में जानने में आसानी हो। अभी तक तो कुछ क्लियर नहीं है लेकिन.............." कहते-कहते मेहता जी रुक गए और फिर बोले, "तुम बस घर आ जाना। तुम्हारी आंटी भी तुमसे मिलना चाहती है। बहुत दिन हो गए, तुम जब भी आती हो मेरे ऑफिस की आती हो। आज घर पर आ जाना, ठीक है?"

     आद्या ने देखा, सिग्नल ग्रीन हो चुका है और उसे ऑफिस भी पहुँचना था इसीलिए उसने से जल्दी से ठीक है कहा और फोन अपने बैग में डाल कर स्कूटी स्टार्ट किया, इससे पहले कि पीछे की गाड़ियां हॉर्न बजाकर उसे परेशान करना शुरू कर दें। उसने तेजी में अपनी स्कूटी आगे निकालने की कोशिश की लेकिन उसी वक्त उसके बगल की गाड़ी ने उसे ओवरटेक करने कोशिश की जिससे आद्या की स्कूटी उससे टकरा गई और बेचारी खुद को संभाल नहीं पाए। 



3



 ट्रैफिक लाइट ग्रीन होते ही आद्या ने अपनी स्कूटी आगे बढ़ाई लेकिन बीच चौराहे पर जाते ही उसके साइड से आती गाड़ी ने ओवरटेक करने के चक्कर में आद्या को टक्कर मार दी जिससे आद्या खुद को संभाल नहीं पाई और अपनी स्कूटी समेत सड़क पर जा गिरी। टक्कर लगते ही आद्या के आंखों के सामने वही पुराना हादसा घूम गया और वह बुरी तरह से घबरा गई लेकिन जब उसने खुद को सही सलामत पाया तो उसने खुद को बड़ी मुश्किल से शांत किया और नजर उठा कर चारों तरफ देखा। 

   एक्सीडेंट भले ही छोटा सा था लेकिन वहाँ चौराहे पर काफी सारी गाड़ियों की लाइन लग गई थी और लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी थी। कुछ लोग उस गाड़ी वाले को रोक कर रखे हुए थे और उसके साथ हाथापाई करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन ड्राईवर बाहर नहीं निकला था। आद्या को जब एहसास हुआ कि वह कहां है, उसका दिमाग झन्ना गया। वैसे ही आज उसे उठने में देर हो गई थी, उसमें भी उसे जल्द से जल्द ऑफिस पहुंचना था क्योंकि ऑफिस में कोई जरूरी अनाउंसमेंट् होने वाली थी। ऑफिस शुरू होने से पहले सारे इंप्लॉय को ऑफिस में हाजिर होना था। 

     साढ़े नौ पहले ही बज चुके थे और आद्या अभी भी ऑफिस नहीं पहुंची थी। उसे पता था आज उसका मैनेजर और टीम लीडर दोनों ही उसे बुरी तरह से सुनाने वाले हैं। यह सोचकर ही आद्या का दिमाग खराब हुआ जा रहा था। तभी उसकी नज़र उस गाड़ी पर गई जिससे उसको ठोकर लगी थी। वह झल्लाते हुए उठी, अपनी स्कूटी को खड़ा किया और उस गाड़ी की तरफ बढ़ गई। 

    ड्राइविंग सीट पर बैठा इंसान अभी भी गाड़ी के अंदर ही था और उसने शीशा तक नीचे करना जरूरी नहीं समझा था। आद्या गुस्से में उसके खिड़की के शीशे पर नॉक करते हुए बोली, "बाहर निकलो! मैंने कहा बाहर निकलो!!!" लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। 

      आद्या फिर चिल्लाई, "आप बाहर आएंगे मिस्टर या फिर ये सारे लोग मिलकर आपकी गाड़ी यहीं पर पोस्टमार्टम कर दे? अगर तुम में जरा सी भी तमीज बची है तो अभी के अभी बाहर निकलो। मैंने कहा बाहर निकलो!"

     ना जाने उसकी आवाज में ऐसा क्या था जो उसी वक्त ड्राइविंग सीट का दरवाजा खुला और एक महंगे ब्रांड का जूता पहने एक पैर बाहर निकला। उसके कुछ देर बाद ही तकरीबन पौने 6 फुट का एक शख्स गाड़ी में से बाहर आया जिसकी आंखों पर काला चश्मा लगा हुआ था। देखने में ही वह काफी अच्छे घराने का लग रहा था। 

     आद्या ने ध्यान से देखा, वह कोई मामूली गाड़ी नहीं थी। बेंटले का नया मॉडल था जिसे देखकर कुछ लोग उस शख्स को छोड़ गाड़ी को ही निहारने लगे और जिन्हें उस गाड़ी के बारे में जानकारी नहीं थी वह लोग उस शख्स को निपटाने के लिए तैयार थे। आद्या ने जब लोगों की भीड वहां चौराहे पर देखी तो उसने सबकी तरफ देखते हुए कहा, "आप लोग यहां क्या तमाशा लगा रखे हैं? बीच चौराहे पर इतनी भीड़ लगाकर आप लोग दूसरों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। सबके ऑफिस जाने का टाइम है और इस तरह भीड़ लगने से देखें कितना लंबा जाम लग गया है। आप सब लोग यहां से जाइए। यह मेरा मैटर है इसे मैं खुद सुलझाऊंगी।"

    आद्या की बात सुन वहां भीड़ में मौजूद कुछ लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ तो कुछ लोग नाराज हो गए। उनमें से एक ने कहा, "ओ मैडम! हम तो आप ही की हेल्प कर रहे थे लेकिन आप हो कि हमें ही सुना रहे हो। भलाई का तो जमाना ही नहीं रहा। मदद करो तो मुसीबत ना करो तो मुसीबत। इन लोगों से तो भगवान ही बचाए।"

     उन लोगों की बातें सुनकर आद्या को भी गुस्सा आ गया और उसने जवाब देते हुए कहा, "अगर कोई और जगह होती तो बेशक आप मेरी मदद करते और मैं आप लोगों को कुछ ना कहती, लेकिन ध्यान से देखिए, यहां पर जितने भी लोग हैं वह सब को ऑफिस जाना है। अगर आपको नहीं जाना तो आप बेशक रुक सकते हैं लेकिन बाकी लोगों को तो जाने दीजिए। मेरे चक्कर में दूसरों की नौकरी खतरे में पड़ जाए यह ना मैं चाहूंगी और ना ही आप चाहेंगे।"

     आद्या की बात सुनकर वह इंसान चुपचाप वहां से निकल गया। उसे देख बाकी लोग भी धीरे-धीरे वहां से निकल गए। आद्या पूरी भीड़ को छटते हुए देख रही थी। उसी वक्त पीछे से उसे एक आवाज सुनाई दी, "थैंक यू सो मच! आज आपने मुझे बीच सड़क पर मार खाने से बचा लिया। वरना ना जाने आज मेरा क्या होता।"

     इतना सुनना था कि आद्या गुस्से में उसकी तरफ पलटी। उसके सामने वह इंसान आंखों पर काला चश्मा डालें मुस्कुरा रहा था। आद्या ने आगे बढ़कर उसका चश्मा उसकी आंखों पर से खींच कर उतारा और उसके पॉकेट में डाल दिया। वह शख्स एकदम से चौक गया और बोला, "हेलो मैडम जी! ये आप क्या कर रही हैं? आपको पता भी है ये कितने का है?"

   आद्या उसका कॉलर पकड़ कर बोली, "किसी इंसान की जान से ज्यादा कीमती तो नहीं है ये! मैंने यहां से लोगों को हटाया इसकी वजह तुम नहीं थे मिस्टर, जो भी हो तुम्हारा नाम है। मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जिस बेशर्मी से तुम अपनी गाड़ी में बैठे रहे, एक बार भी निकल कर यह नहीं देखा कि जिसकी स्कूटी तुमने अपनी गाड़ी से ठोकी है वह लड़की किस हाल में है। अमीरों के सीने में दिल नहीं होता सिर्फ सिगरेट के पैकेट होते हैं, यह बात तुमने साबित कर दी। तुम्हें पता भी है तुमने मेरा कितना नुकसान किया है? तुम्हारी वजह से मैं किस प्रॉब्लम में हूं? ऐसी कौन सी जल्दी थी तुम्हें? या फिर ओवरटेक करना तुम लोगों को फन लगता है फिर चाहे किसी की जिंदगी रहे या जाय! तुम जैसों को दूसरे लोगों से कोई मतलब नहीं होता है। हर चीज को पैसे से तोलते हो तुम लेकिन मिस्टर हर चीज की कीमत नहीं लगाई जा सकती। अगर ऐसा होता तो तुम जैसे अमीर लोग कभी मरते ही नहीं।"

    आद्या की बात सुनकर वह शख्स पहले तो थोड़ा घबराया फिर एकदम से उसके चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गई। उसने आद्या की आंखों में गौर से देखा और फिर उसके थोड़ा करीब आकर बोला, "इतना नाटक करने की जरूरत नहीं है। साफ-साफ कहो तुम्हें कितने पैसे चाहिए? तुम कहो तो तुम्हारी स्कूटी का पूरा दाम दे दूँ, या फिर एक नई स्कूटी ही लाकर खड़ी कर दूं तुम्हारे लिए। लेकिन यह थोड़ा ज्यादा हो जाएगा। तुम्हारी स्कूटी को देख कर लग रहा है जैसे करीब तीन-चार साल पुरानी होगी ही। इसकी कीमत कबाड़ में चार या पांच हजार मिल जाएगी उससे ज्यादा नहीं। एक काम करो, मैं तुम्हें पूरे दस हजार देता हूं, इसकी मरम्मत करवा लेना। अब अपनी स्कूटी लो और यहां से दफा हो जाओ। मुझे देर हो रही है।" कहते हुए उसने अपने पॉकेट से अपना वॉलेट निकाला और उसमें से कुछ पैसे निकाल कर आद्या की तरफ बढ़ाने लगा। लेकिन आद्या भी कम चालाक नहीं थी। उसने एकदम से उस इंसान का वॉलेट झपट लिया। 




उस शक्स ने आद्या को स्कूटी मरम्मत करवाने के लिए पैसे देने चाहें लेकिन आद्या ने पैसे लेने की बजाए उसका पूरा वॉलेट ही उसके हाथ से छीन लिया जिसे देख वह शख्स मुस्कुराए बिना ना रह सका। उसे लगा आद्या को उससे भी ज्यादा पैसे चाहिए। आद्या भी कम स्मार्ट नहीं थी। उसने उस वॉलेट में से जितने भी कार्ड थे उन सब को एक एक कर निकाला और अपने स्कूटी की तरफ बढ़ी। पीछे से उस शख्स ने आवाज दी, "बिना उसका पिन जाने तुम उसे यूज कैसे करोगी? किसी काम नहीं आएंगे तुम्हारे। तुम्हें पता भी है उस पूरे कार्ड की वैल्यू कितनी है?"

      आद्या ने एक बार भी उसकी तरफ पलट कर देखने की तकलीफ नहीं उठाई। वो सारे कार्ड अपने हाथ में पकड़े उसने अपनी स्कूटी के अंदर रखें अपने बैग को निकाला और उसमें से एक छोटी सी कैची बाहर निकाल ली। पीछे खड़ा वो शख्स कुछ समझ नहीं पाया लेकिन आद्या मुस्कुराते हुए उसकी तरफ पलटी और उसे दिखाते हुए उसके कार्ड पर बेरहमी से कैंची चला दी। एक झटके में सारे कार्ड्स दो टुकड़े में बट गए। 

    इससे पहले कि वह शख्स कुछ समझ पाता उसके सारे कार्ड टुकड़ो में जमीन पर बिखरे पड़े थे। वह बड़ी बड़ी आंखें कर आद्या पर चिल्लाया, "बेवकूफ लड़की! क्या किया तुमने यह? तुम्हें एहसास भी है मुझे कितनी बड़ी प्रॉब्लम हो सकती है? हो सकती है नहीं मुझे कितनी बड़ी प्रॉब्लम होगी! तुम्हें एहसास भी है इस सब को फिर से इश्यू करवाने में मुझे कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी? तुम्हें पता भी है कितना कीमती है यह सब? सब बेकार कर दिया तुमने!"

    उसकी बात सुन आद्या ने वो सारे कार्ड्स के टूकड़े जमीन से समेट कर उठाए और उसके हाथ में पकड़ाते हुए कहा, "बहुत कीमती है ना ये? तो यह लो रखो और अपने घर जाओ! मैंने कहा था ना, हर चीज की कीमत नहीं होती। इंसानों को पैसों से नहीं तोला जाता और जिसे तुम खटारा स्कूटी कह रहे हो ना, उस स्कूटी की कीमत मेरी नजर में तुम्हारी इस खटारा गाड़ी से कहीं ज्यादा है। मेरी स्कूटी की रिपेयर की कीमत देना चाहते थे ना तो इतनी औकात नहीं है तुम्हारी। इसलिए अपनी आंखें नीची रखो और अपने घर जाओ। यह सड़क तुम्हारे बाप का नहीं है कि तुम कहीं से भी मुंह उठाकर चले आओगे, किसी को भी ओवरटेक करने की कोशिश में जान से मार दोगे। मेरी किस्मत अच्छी थी जो मैं बच गई वरना तुम जैसों का कोई भरोसा नहीं। यहां से जाकर अपनी आंखों का इलाज करवा लेना। पता नहीं तुम जैसों को ड्राइविंग लाइसेंस दे कौन देता है। जरूर तुम लोगों ने पैसे खिलाए होगे उसे। बड़ा बैंक बैलेंस और बड़ी गाड़ी होने से इसका मतलब यह नहीं इंसान भी बड़े हो। तुमसे भी घटिया इंसान देखे हैं मैंने और यकीन करो, जो झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं ना वह इंसान तुम जैसे लोगों से लाख गुना अच्छे होते हैं। दूसरों को अपनी तरह इंसान समझते है। अपने पैसों का घमंड किसी और को दिखाना मुझे नहीं।" कहकर आद्या गुस्से में पलटी और अपनी स्कूटी स्टार्ट कर वहां से निकल गई। 

     वहां चौराहे पर अभी भी जाम लगा हुआ था लेकिन गाड़ियों के आने जाने का रास्ता अभी भी खुला हुआ था। फिर भी कुछ गाड़ियां जिन्हें यू-टर्न लेनी थी वह वहां पर अटके हुए थे। आद्या के जाने के बाद भी वह शख्स वहां पर यूं ही खड़ा उसे जाते देखता रहा। उसके मन में काफी कुछ चल रहा था। तभी गाड़ियों के हॉर्न से उसकी तंद्रा टूटी। एक गाड़ी वाला उस पर चिल्लाया, "ओ मिस्टर! जिंदगी भर यही खड़े रहना है क्या? हमें भी आने जाने का रास्ता चाहिए।"

    वह शख्स होश में आया और झेंपते हुए अपनी गाड़ी वहां से निकाल कर ले गया। 

   आद्या को ऑफिस पहुंचने में लगभग 15 मिनट की देरी हो चुकी थी। वो झुंझलाते हुए ऑफिस के अंदर पहुंची जहाँ दरवाजे पर सिक्योरिटी गार्ड ने उसे गुड मॉर्निंग कहा। आद्या भी उन्हें गुड मॉर्निंग बोलकर जितनी तेजी में निकल सकती थी निकली। उसे बस इसी बात की टेंशन थी कि कहीं किसी ने उसकी जरा सी देरी को नोटिस कर मैनेजर से उसकी शिकायत ना लगा दी हो। दीवार पर लगी मशीन में उसने अपना एंट्री दर्ज किया और जल्दी से जाकर अपनी सीट पर बैठ गई।

    गनीमत यह थी कि अभी तक किसी तरह की अनाउंसमेंट हुई नहीं थी लेकिन सब के सब टाइम पर पहुंच चुके थे। अभी तक किसी को भी इस बात की खबर नहीं थी कि आखिर उन्हें इतनी जल्दी क्यों बुलाया गया। ऑफिस हमेशा 10:00 बजे से शुरू होता था। आद्या ने जल्दी से अपना कंप्यूटर ऑन किया और अपना काम करने को हुई। उसी वक्त उसके काँधे पर किसी ने हाथ रखा जिससे आद्या लगभग चीख ही पड़ी। उसने मुडकर देखा तो उसकी दोस्त अश्विनी उसके बगल वाली कुर्सी पर बैठी हुई थी। 

     आद्या को इस तरह घबराया हुआ देख अश्विनी ने हैरानी से पूछा, "तुझे क्या हुआ है? इतनी घबराई हुई क्यों है? तुझे आने में थोड़ी देर हो गई, कहां थी तू? तू तो टाइम से पहले घर से निकल गई थी ना? फिर इतना वक्त लग गया!"

   आद्या बोली, "नहीं कुछ! वो बस मैं जाम में फंस गई थी।"

     अश्विनी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और बोली, "वैसे तू चिंता मत कर, मैंनेजर खुद भी गायब है। पता नहीं कहां है? लेकिन क्या तुझे पता है आज ऑफिस में क्या होने वाला है? ऐसे अगर कोई फंक्शन होता है तो पहले से बताया जाता है लेकिन ना कोई नोटिस ना किसी तरह का कोई अनाउंसमेंट। फिर इस तरह अचानक से..........। मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा।" 

     आद्या कंप्यूटर में अपना फाइल खोलते हुए बोली, "मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा। पता नहीं इस मैनेजर के दिमाग में क्या चलते रहता है। वैसे तूने टीम लीडर से बात करने की कोशिश की? शायद उसे कुछ पता हो।" 

    आद्या की बात सुनकर अश्विनी कुछ सोचते हुए बोली, "यह बात तो तूने सही कही। यह बात मेरे दिमाग में क्यों नहीं आई! मैं कब से बैठकर दिमाग खपा रही हूं, माथापच्ची की जरूरत ही नहीं थी। तु रुक जा मैं अभी पूछ कर आती हूं।" कहते हुए अश्विनी अपनी कुर्सी से जैसे ही उठी उसी वक्त उसकी एक और टीम मेंबर सेजल वहां आई और आद्या के टेबल पर दोनों हाथों का टेक लगा कर उसे ताना मारने के अंदाज में बोली, "पूअर अश्विनी! इतना भी नहीं पता कि आज क्या होने वाला है? तुम लोग टीम मेंबर हो भी या नहीं? तुम दोनों को इस बात की बिल्कुल भी खबर नहीं या फिर सच में इतनी मासूम हो?"

     अश्विनी मैं उसे घूर कर देखा और बोली, "डियर सेजल! हम टीम मेंबर है या नहीं उसका तो नहीं पता लेकिन तुम्हें दूसरों के बीच में नाक घुसाने की कुछ ज्यादा ही आदत है। तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हारी नाक और तुम्हारी जुबान कुछ ज्यादा बड़ी है! इन्हें संभाल कर रखो वरना अपने ही दांतो से जुबान कटते देर नहीं लगती और फिर सूर्पनखा के बारे में तुम्हें पता ही होगा वो कौन थी। और उसके साथ क्या हुआ था।"

    फिर एकदम से अश्विनी को कुछ ख्याल आया और उसने मुस्कुराते हुए कहा, "सेजल डार्लिंग! माना हम लोगों की टीम में कोई औकात नहीं है लेकिन तुम तो स्पेशल हो ना? फिर तुम्हें तो पता ही होगा कि आज क्या होने वाला है? एक काम करो तुम ही बता दो आज का सारा कार्यक्रम क्या है, किस वजह से किसके लिए रखा गया है! यह बात तो तुम्हें अच्छे से पता होगी। तुम टीम लीडर के लिए इतनी स्पेशल जो हो, है ना सेजल?"

    सेजल ने जब सुना तो उसकी त्योरिया चढ़ गई। उसे समझते देर नहीं लगी कि अश्विनी उसका मजाक उड़ा रही है। वाकई में उसे खुद भी नहीं पता था कि आज हो क्या रहा था। इस बारे में उसने टीम लीडर से पूछा भी लेकिन खुद टीम लीडर को भी कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे में वह अश्विनी और आद्या के सामने अपनी बेज्जती नहीं करवाना चाहती थी इसलिए उसने कहा, "मुझे पता है क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। लेकिन इसके बारे में मैं तुम्हें क्यों बताऊं? अगर तुम्हें तुम्हें जानने का इतना ही शौक है तो मुझ से रिक्वेस्ट करो या फिर मैनेजर से जाकर पूछ लो, वह तुम्हें सब बता देंगे।" कहकर वह बड़ी अदाओं से वो वहां से निकल गई। पीछे से अश्विनी ने उसे मुंह चिढ़ा दिया, "बड़ी आई...... नकचढ़ी कहीं की।"


5


 सेजल आद्या से पहले उस ऑफिस में काम किया करती थी। उसे अपनी खूबसूरती पर कुछ ज्यादा ही घमंड था इसलिए सबको अपने इशारे पर नचाने की कोशिश में लगी रहती। लेकिन आद्या की सादगी ही उसकी खूबसूरती थी और बिना मेकअप के भी वह सेजल से कहीं ज्यादा अच्छी लगती थी। इस कारण वो आद्या को पसंद नहीं करती थी। उस पर से भी आद्या का ऐसे अपने आप में रहना और सेजल की जी हजूरी ना करना उसे फूटी आंख नहीं भाता था। 

      अश्विनी और आद्या की कॉलेज की दोस्ती और अश्विनी के ही सिफारिश पर आद्या को जॉब मिली थी ताकि वह अपनी आगे की जिंदगी बिना किसी तकलीफ के जी सके। सेजल का ऐसे आद्या से बेवजह उलझना अश्विनी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था और ऑफिस में हर किसी को पता था कि सेजल टीम लीडर से लेकर मैनेजर तक को अपनी अदाओं से रिझाने की कोशिश में लगी रहती थी। यहां तक की टीम लीडर को उसने रिझा भी लिया था लेकिन मैनेजर तक उसकी पहुंच नहीं गई थी। 

    आद्या को उससे कोई मतलब नहीं था लेकिन ना जाने क्यों सेजल हमेशा उससे लड़ने भीड़ने का एक भी मौका नहीं छोड़ती थी। सेजल के जाने के बाद अश्विनी वापस अपनी सीट पर बैठ गई। उसने झुंझलाते हुए कहा, "यह लड़की अपने आप को समझती क्या है? किसी काम की है नहीं। बस इस तरह मुंह उठाकर ऑफिस चली जाती है जैसे कोई रैंप वॉक कर रही हो। ना तो मुझे इसकी शक्ल पसंद है ना ही इसके रंग ढंग और कपड़े तो बिल्कुल भी नहीं। पता नहीं कब इससे पीछा छूटेगा हमारा। कमीनी कुलटा, नरक की आग में जलेगी।"

    उसकी बात सुन आद्या की हंसी छूट गई। अश्विनी यही तो चाहती थी। कुछ देर हंसने के बाद आद्या एकदम से शांत होकर बोली, "कुछ टाइम पहले ही हमारी कंपनी को दूसरी कंपनी ने टेकओवर किया है। ऐसे में दो बातें हो सकती हैं, या तो नई कंपनी का बॉस आ रहा हो या फिर पुराने एंप्लॉय की छटनी होने वाली हो। वैसे भी यह एक नॉर्मल सी बात है। जब भी कोई कंपनी किसी दूसरे कंपनी को टेकओवर करती है तो उस कंपनी के पुराने एंप्लॉय की छटनी शुरू होती है।"

    आद्या की बात सुनकर अश्विनी को एकदम से जैसे झटका सा लगा हो। उसने अपना सर पकड़ते हुए कहा, "यह बात तो तूने बिल्कुल सही कही। लेकिन अगर छटनी की बात हो तो इस तरह बुलाया तो नहीं जाना चाहिए। मतलब तो सीधे मेल कर दिया जाता है या फिर सीधे-सीधे अनाउंस कर दिया जाता है लेकिन जिस तरह कंपनी को डेकोरेट किया जा रहा है, आई मीन जगह-जगह फ्लावर्स लगे है। उससे तो एक ही नतीजा निकलता है कि........."

     उसकी बात बीच में काटते हुए आद्या बोली, "इसका एक ही नतीजा निकलता है कि जिस कंपनी ने हमारी कंपनी को टेकओवर किया है वहां से कोई आ रहा है। तो अब तू खुद को तैयार कर, चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल लेकर आ और उस बंदे या बंदी जो भी है उसकी खातिरदारी में लग जा। मैंनेजर भी तो यही करेगा। हाथ जोड़कर एक कोने में लाइन लगाकर खड़े होना होगा और सर झुकाकर हेलो सर! हेलो मैम! करना होगा। मुझे सख्त नफरत है इस चमचागिरी से। अपनी इज्जत कोई मायने ही नहीं रखती। बॉस के सामने तो समझ में आता है फिर भी एक हद तक लेकिन हर आते-जाते लोगों के सामने इस तरह........ .मैंने कभी ऐसी लाइफ नहीं चाही थी अश्विनी। अपना एक स्टार्ट अप चाहती थी ताकि पापा के काँधे से बोझ हल्का कर सकूँ लेकिन जिंदगी हमारे हाथों में नहीं होती। किस्मत कब किस ओर करवट ले ले यह कोई नहीं जान सकता। मैंने भी खुद को किस्मत के हवाले कर दिया है। देखते हैं ये मुझे कहां लेकर जाती है।"

      अभी वह दोनों बातें कर ही रही थी कि उसी वक्त मैनेजर ने एंट्री ली और सब को आवाज देते हुए कहा, "जैसा कि कल मैंने कहा था, आज सबको यहां मौजूद रहना है। आज के दिन किसी को कोई छुट्टी नहीं मिलेगी और ना ही कोई बहाना चलेगा। वैसे तो मैं कल ही इस बारे में बता देना चाहता था लेकिन मुझे सख्त मना किया गया था इस बारे में कुछ भी कहने से। जैसा कि आप सभी को पता है, हमारी कंपनी अब किसी और के अंडर चली गई है। ऐसे में फैसले लेने का हक हमारा नहीं है। हमारी कंपनी में कौन रहेगा और कौन जाएगा यह सारे फैसले अब कोई और करेगा। फिलहाल इस बारे में हमें कोई बात नहीं करनी लेकिन अभी कुछ और है जो हमें करना है इसलिए आप सब के सब अगले 10 मिनट में मुझे ऑफिस के मीटिंग रूम में मिलिए। सिर्फ 10 मिनट है आपके पास।" कहकर मैनेजर वहां से चला गया। 

    उसकी बातों से हर कोई कंफ्यूज था कि आखिर किस बारे में बात होनी है। आद्या और अश्विनी ने भी एक दूसरे की ओर देखा और दोनों ने ही अपना कंप्युटर सिस्टम ऑफ करने के लिए बटन दबा दिया। कुछ फाइल्स थी जो खुली हुई थी उन सब को बंद कर ड्रावर् में डाल दिया और एक साथ मीटिंग रूम में जाने के लिए निकली। लेकिन उसके ठीक सामने से सेजल कमर मटकाते हुए गुजरी। साथ में अपने बालों को कुछ इस तरह झटका कि उसके बाल आद्या की आंखों में जा लगे। आद्या ने एक हाथ से अपनी आंखें बंद कर ली। 

     अश्विनी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसका दिल किया इसी वक्त सेजल को उसके बालों से पकड़कर पटक-पटक कर मारे लेकिन ऑफिस में होने की वजह से वह ऐसा कर नहीं सकती थी और ना ही सेजल उसे ऑफिस से बाहर मिलती थी। इसके बावजूद वह सेजल को सबक सिखाना चाहती थी लेकिन आद्या ने हाथ पकड़ कर उसको रोक दिया। अश्विनी ने आद्या की आंखों से उसका हाथ हटाकर देखा तो उसकी एक आंख लाल हो चुकी थी। 

     अश्विनी चिढ़ते हुए बोली, "तू इतनी कमजोर कैसे हो गयी आद्या? पहले तो तु ऐसी नहीं थी। खुद को डिफेंड करना सीख वरना इसके जैसे और भी बहुत सारे लोग मिलेंगे। तू खुद को मजबूत नहीं करेगी तो फिर जीयेगी कैसे? तुझ पर सिर्फ तेरी अपनी जिम्मेदारी नहीं है, तेरे मां पापा के कातिलों को जेल पहुंचाने की भी जिम्मेदारी है। इस तरह तु सबको माफ करती रही तो तेरी मां पापा तुझे कभी माफ नहीं करेंगे। वह तेरे साथ इतना बुरा सलूक करती है लेकिन तू पलट कर कुछ नहीं करती। कब तक मैं तुझे डिफेंड करती रहूंगी? कब तक मैं तेरे लिए लड़ती रहूंगी? आज मैं हूं तेरे साथ, कल को मेरी शादी हो जाएगी मैं यहां से दूर चली जाऊंगी तब तेरे पास कौन होगा? ऐसे ऐसे लोगों को सबक सिखाना बहुत जरूरी होता है। इन्हें ऐसे ही छोड़ा नहीं जाता आद्या।"

     आद्या उसे कंधे से पकड़ते हुए बोली, "तू इतनी परेशान क्यों हो रही है मेरी झल्ली? जानती हूं तू मेरी झांसी की रानी है और तेरे साथ रह-रहकर मैंने इतने सालों में बहुत कुछ सीखा है। आज की ही बातें ले ले। आज एक गाड़ी वाले ने मेरी स्कूटी ठोक दी, मैंने भी गुस्से में उसके सारे क्रेडिट डेबिट कार्ड दो दो टुकड़े में काट डाले और उसके हाथ में पकड़ा दी। होगा अमीर बाप का बेटा, मैं भी कोई कम नहीं हूं। पैसो का घमंड अपने पास रखें, मुझे फर्क नहीं पड़ता। उसके जैसे बहुत है इस दुनिया में लेकिन मेरे जैसा कोई नहीं मिलेगा। मैं अपने आप में वन पीस हूं।"

     अश्विनी को उसकी बातों पर यकीन नहीं हुआ फिर भी उसने आद्या के कंधे पर कोहनी टिकाते हुए कहा, "यह बात तो तूने बिल्कुल सही कही। तू इस दुनिया की इकलौती आइटम है। अब जल्दी चल वरना वह मैनेजर हम पर बरस पड़ेगा।" कहकर उसने आद्या का हाथ पकड़ा और मीटिंग रुम के लिए निकल गयी। 






मीटिंग रूम में सभी पहुंच चुके थे। सबके दिमाग में बस यही बातें चल रही थी कि आखिर होने क्या वाला है? अश्विनी आद्या को लगभग खींचते हुए मीटिंग रूम में लेकर आई और इससे पहले कि किसी की नजर उन दोनों पर पड़ती, वह दोनों जाकर एक कोने में खड़े हो गई। मैंनेजर जो कि वही खड़ा था, बार-बार अपनी घड़ी को ही देखे जा रहा था लेकिन कुछ बोल नहीं रहा था।

     उसे इस तरह चुपचाप देख अश्विनी उबासी लेते हुए बोली, "क्या यार! ये अभी भी टाइम पास कर रहा है। इससे अच्छा मैं एक झटकी और ले लेती। कम से कम नींद तो पूरी हो जाती मेरी। इतना सस्पेंस क्यों क्रिएट कर रखा है, जैसे हम कौन बनेगा करोड़पति देख रहे है। अब अमिताभ बच्चन की आवाज गूंजेगी। यार अब तो बता दो कि हमारी परेड की लगा रखी है?"

     आद्या ने उसे धीरे से चुप रहने का इशारा किया और सब की तरह वह भी मैनेजर की तरफ देखने लगी। एक मैसेज मिलते ही मैनेजर ने सब की तरफ मुस्कुराते हुए देखा और बोला, "जिस काम के लिए आप सभी को यहां बुलाया गया है, मैं वह आप सबके सामने रख रहा हूं। जैसा कि आप लोग जानते हैं हमारी कंपनी को किसी और कंपनी ने टेकओवर किया है ऐसे में हमारी कंपनी का ऑनर अब कोई और है और आज उस होल्डिंग कंपनी के रिप्रेजेंटेटिव हमारे बीच आ रहे हैं। यानी हमारी कंपनी के नए सीईओ आज हमारे ऑफिस पहली बार आ रहे हैं। आ रहे नहीं बल्कि आ चुके हैं और उनकी गाड़ी ऑफिस के दरवाजे पर पहुंच चुकी है। वह तो बस सरप्राइज विजिट करना चाहते थे ताकि हमारे ऑफिस की असल हालत वह अपनी आंखों से देख सकें इसलिए आप सभी उनका स्वागत करेंगे और तमीज से पेश आएंगे। पुराने ऑनर आप सब को बहुत प्यार से रखते थे लेकिन हमारे नए ऑनर किस तरह के हैं और किस मिजाज के है ये हम में से कोई नहीं जानता। इसलिए अपनी हरकतों को संभाल कर रखना आप लोग।" कहते हुए मैंनेजर ने घूर कर सेजल की तरफ देखा तो सेजल में अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया। वहां मौजूद हर किसी को यह समझते देर नहीं लगी कि मैनेजर ने सेजल को ताना मारा है।

    सबको मीटिंग रूम में छोड़ कर मैंनेजर जैसे ही बाहर की तरफ निकलने को हुआ, उसी वक्त मीटिंग रूम के बाहर किसी के आने की आहट सुनाई दी। करीब 2 से 3 लोग होंगे, उन्हें देखते ही मैंनेजर ने जल्दी से अपने हाथ में एक बुके पकड़ा और अपने सामने खड़े इंसान की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "वेलकम सर! हमारे ऑफिस में आपका स्वागत है।"

    सामने खड़े शख्स की भौहें टेढ़ी हो गई। मैनेजर को एहसास हुआ कि उसने कुछ गलत बोल दिया है। वह जल्दी से अपनी बात बदलते हुए बोला, "सॉरी सर! आपके ऑफिस में आपका स्वागत है।"

    फाइनली उस इंसान के चेहरे के एक्सप्रेशन थोड़े नॉर्मल हुए। उसने अपने बगल में खड़े इंसान को इशारा किया तो उसने मैनेजर के हाथ से वह बुके ले लिया। मैनेजर ने साइड होते हुए उसे रास्ता दिया ताकि वह लोग अंदर आ सके। वही मीटिंग रूम में सबकी नजर दरवाजे पर ही थी। मैनेजर को इस तरह नर्वस होता देख वह लोग समझ गए कि जिसका इंतजार था वह आ चुके हैं। सब की तरह अश्विनी भी उस इंसान का चेहरा देखना चाहती थी लेकिन आद्या को इस सब में कोई इंटरेस्ट नहीं था। वो सबसे पीछे हो गई और अपना फोन में कुछ मैसेजेज देखने लगी। 

    अश्विनी की नजर जैसे ही नए सीईओ पर गई, वह बस उसे देखती रह गई। हाइट ज्यादा लंबी नहीं थी लेकिन उसकी पर्सनलथी काफी खूबसूरत थी। उसे कुछ देर निहारने से अश्विनी खुद को रोक नहीं पाई। उसने आद्या को कोहनी मारते हुए कहा, "आद्या देख तो! हमारे नए सीईओ कितने हैंडसम है। सिंगल भी होंगे क्या? या फिर शादीशुदा? वैसे बड़े घर के लोग बचपन में ही शादी तय कर देते हैं या फिर पढ़ाई और ऑफिस में इतना ज्यादा घुस जाते हैं कि उन्हें गर्लफ्रेंड बनाने का मौका नहीं मिलता। अब इन दोनों में से यह किस कैटेगरी में आता है कैसे पता चलेगा?"

    आद्या का पूरा ध्यान अपने फोन पर था। उसने अश्विनी की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और बस हम्म! हम्म!! करती रही। जब अश्विनी ने देखा कि आद्या कहीं और गुम है तो उसने आद्या का फोन उसके हाथ से छीना और बोली, "तु क्या फोन में लगी हुई है? अगर किसी ने देख लिया ना तो प्रॉब्लम हो जाएगी। हमारे नए सीईओ यहां आ चुके हैं और सब उनकी बातें सुन रहे हैं। और तू है कि अपनी ही दुनिया में है। जानती हूं तुझे कोई मतलब नहीं है लेकिन इस वक्त हम लोग ऑफिस में हैं और एक प्रोटोकॉल के तहत हमें यहां नए सीईओ के स्वागत में खड़ा रहना है। ठीक है तुझे पसंद नहीं लेकिन फिर भी एक बार तू देख तो, बंदा कितना हॉट है!"

      आद्या ने अनमने ढंग से कहा, "जो चीज मुझे पसंद नहीं आती उसकी तरफ मैं देखती भी नहीं और वैसे भी, वो सीईओ है। हमें उससे क्या वो कोई भी हो। हमारा काम सिर्फ मैनेजर तक है। सीईओ की चापलूसी मैनेजर को करने दे क्योंकि सिर्फ मैनेजर को ही उसे रिपोर्ट करना होता है। हमें नहीं झेलना उसके नखरे या फिर उसके ऑर्डर। इतने पीछे खड़ी हूं किसी की नजर भी नहीं पड़ेगी मुझ पर। और देख कर भी क्या कर लूंगी कौन सा मुझे उसे............" कहते हुए जैसे ही आद्या ने उस नए सीईओ की तरफ देखा, उसकी बातें उसके गले में ही अटक कर रह गई। लगा जैसे किसी ने ठंड में उसके ऊपर ठंडा पानी डाल दिया हो। 

    उसे देखकर आद्या एकदम से हकलाने लगी, "य....... यह.......... यह इंसान........... य............यहां कैसे??“

    अश्विनी पीछे से उसे कंधे से पकड़ते हुए बोली, "क्या हुआ तुझे और उसे देख कर तु इस तरह क्यों रिएक्ट कर रही है? यही तो है हमारे नए सीईओ सर।"एकदम से उसे कुछ ख्याल आया और उसने आद्या की तरफ शक भरी नजरों से देखते हुए पूछा, "आज ट्रैफिक में तू जिस लड़के को सबक सिखा कर आई कहीं वह इंसान ये तो नहीं है?" 

      आद्या उस शक्स की तरफ देखते हुए बस हाँ में गर्दन हिला दी। अश्विनी ने अपना माथा पीट लिया। "एक तो तू किसी से लड़ती झगड़ती नहीं है और आज लड़ाई भी की तो किससे? अपने नए सीईओ से! लोग मुसीबत से दूर भागते हैं लेकिन मुसीबत को तू खुद बुला आई है। आई होप कि यह बंदा तुझे ना पहचाने या फिर तू इसके सामने ना आए, ना उसकी नजर तुझ पर पड़े।" 

     आद्या घबराते हुए बोली, "अगर यह नौकरी छूटी तो मेरे लिए मुश्किल हो जाएगी। इतनी जल्दी दूसरी नौकरी का इंतजाम करना बहुत मुश्किल है वह भी तब जबकि कितनी कंपनी में कर्मचारियों की कटौती हो रही है। मुझे नहीं लगता कि यह इंसान कभी मेरी शक्ल भूलेगा। जो मैं इसके साथ करके आई हूं उसके बाद तो यह मुझसे अपनी दुश्मनी जरूर निकालेगा। बस देखना यह है कि यह मेरे साथ क्या करता है।"

     आद्या सिर्फ अपनी नौकरी की वजह से परेशान थी और मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी लेकिन उसी वक्त उस शक्स की नजर आद्या पर गई और उसे देखकर वह मुस्कुरा दिया। आद्या को जिस बात का डर था वही हुआ। आखिर इतनी भीड़ में सबसे पीछे होने के बावजूद उसकी तीखी नजर आद्या पर ही गई। एकदम से आद्या के मुंह से निकला "भैंस की पूंछ"





मैनेजर ने सबके सामने अपने नए सीईओ को इंट्रोड्यूस करवाते हुए कहा, "यह हमारे नए बॉस हैं। इनकी कंपनी ने ही हमारी कंपनी को टेकओवर किया है और आज से यह.........."

    इससे पहले कि वह आगे कुछ कहता, उस शख्स ने मैनेजर को हाथ दिखा कर चुप होने का इशारा किया और खुद बोला, "हेलो एवरीवन! मैं विशेष चौहान, आप सब का नया सीईओ। आज से मैं यहां अपनी पोजीशन संभालने आया हूं तो ऐसा बिल्कुल भी ना समझे कि मैं यहां सिर्फ एक-दो दिनों के लिए घूमने आया हूं और यह तो बिल्कुल भी मत समझ लेना कि ऑफिस में होते हुए मेरी नजरों से कोई बच जाएगा। हर किसी पर मेरी नजर होगी। यहां मौजूद हर एक स्टाफ मेरी निगरानी में होगा। मैं जब भी जिस भी फाइल पर रिपोर्ट मांगु मुझे उसी वक्त रिपोर्ट करना होगा फिर चाहे वह कोई भी हो। मेरे लिए सारे एंप्लॉय एक बराबर है फिर चाहे वह मैनेजर हो, टीम लीडर हो या फिर टीम मेंबर्स। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसलिए रोज मुझे देखने की और मुझे झेलने की आदत डाल लीजिए आप सब। ये बात मैं यहां मौजूद हर एक एंप्लॉय से कह रहा हूं।" कहते हुए उसकी नजर आद्या पर पड़ी। 

     आद्या की तो वैसे ही हलक सूखी हुई थी। उसे लगा था ऑफिस में रहते हुए भी विशेष से उसकी मुलाकात नहीं होगी लेकिन उसकी बातें सुनकर ऐसा लगा जैसे वह आद्या के बारे में ही बोल रहा हो। उसके होंठ हल्के से हीलें जिसे विशेष ने नोटिस कर लिया। फिर वह आगे बोला, "वैसे आज मेरा इस ऑफिस में पहला दिन है। वो कहते हैं ना कि अगर एंप्लॉय खुश तो कंपनी अच्छा काम करती है और जब कंपनी अच्छा काम करती है तो बॉस भी खुश होता है। तो इसी तर्ज पर आज मैं आप सभी को लंच करवाना चाहता था।"

    लंच की बात सुनकर सभी एक्साइटेड हो गए। आखिरकार बॉस ने आते ही सबके लिए पार्टी का इंतजाम जो किया था। फिर विशेष की बात सुनकर सभी शांत हो गए। "लेकिन मैं आप लोगों को सिर्फ चाय पार्टी ही दे पाऊंगा, लंच फिर कभी किसी और दिन। वह क्या है ना, उधार लेना मुझे पसंद नहीं है और मेरे पास इतना कैश नहीं है कि मैं आप लोगों को अच्छी खासी पार्टी दे सकूं। इसीलिए फिलहाल चाय से काम चलाते हैं। वो क्या है ना, आज रास्ते में किसी से मेरा झगड़ा हुआ और झगड़े में उस शख्स ने मेरे पूरे कार्ड्स का सत्यानाश कर दिया तो जब तक मेरे कार्ड्स फिर से इश्यू नहीं हो जाते तब तक मैं आप लोगों को कोई भी पार्टी देने में असमर्थ हूं।"

    विशेष की बातें सुनकर सभी के चेहरे पर जो अभी-अभी खुशियां आई थी वो एकदम से गायब हो गई। कहां तो सबका जमकर लंच करने का मन था लेकिन फिर भी कम से कम उन्हें चाय पार्टी तो मिल ही रही थी। यह जानकर कि विशेष का रवैया जितना दोस्ताना है काम को लेकर वह उतना है स्ट्रिक्ट है, फिर भी सभी खुश थे। अगर कोई परेशान था तो वह थी हमारी आद्या। 

     विशेष ने आद्या की तरफ देखते हुए मैंनेजर से कुछ कहा तो मैनेजर भी धीरे से उसके कान में फुशफुसाया। अश्विनी जो यह सारी बातें नोटिस कर रही थी, उसने कहा, "तुझे किसने कहा था इस इंसान से लड़ने के लिए? तुझे समझ नहीं आता किस से लड़ना चाहिए और किस से नहींम वह सूजी हुई सेजल तुझे इतना परेशान करके जाती है लेकिन उससे नहीं लड़ेगी, लेकिन जिस से नहीं लड़ना चाहिए तु उस से लड़ कर आ गई। इससे पहले कि कुछ गड़बड़ हो तु जाकर उससे माफी मांग लेना। उसके बातों से ऐसा तो लग रहा है कि वह तुझे माफ कर देगा। देख तू टेंशन मत ले। तू ने जो उसका नुकसान किया है उसकी भरपाई कर देना। वैसे तो उसके लिए कोई बड़ा मैटर नहीं होगा लेकिन यह लोग ना अपनी इज्जत पर बात ले लेते हैं, तब थोड़ा सीरियस मैटर हो जाता है वरना पैसों की कोई बात ही नहीं है। एक काम करना, लंच टाइम में जब सब चले जाएंगे उस टाइम तु मौका पाते ही विशेष सर से माफी मांग लेना, ठीक है?"

     उसी वक्त विशेष की आवाज गूंजी, "आप सभी कैफेटेरिया में मेरा इंतजार कीजिए, मैं वहीं आप सभी को जॉइन करता हूं।"

   विशेष का आर्डर सुनकर सभी खुश होते हुए वहां से कैफिटेरिया के लिए चल दिए। मैनेजर और विशेष के साथ आए हुए दो और लोग विशेष के साथ ही खड़े थे। एक एक कर सभी लोग मीटिंग रूम छोड़ कर बाहर की तरफ निकलने लगे। सेजल भी काफी देर से विशेष को ही एकटक निहारे जा रही थी। मौका मिलते ही वह इतराते हुए चलकर विशेष के पास आई और अदाओं से अपने बाल झटकते हुए बोली, "आपने अपना इंट्रोडक्शन तो दे दिया लेकिन हम में से किसी का भी इंट्रोडक्शन आपने लिया ही नहीं। कोई बात नहीं सर, मैं खुद अपना इंट्रो दे देती हूं। मेरा नाम सेजल है। टीम लीडर से लेकर मैनेजर तक मुझे बहुत अच्छे से जानते हैं और पहचानते भी है वो भी बहुत करीब से। पूरे ऑफिस में जितने भी एम्पलॉई है, हर एक का इंट्रोडक्शन मैं खुद पर्सनली आपको करवाऊंगी। आप बिल्कुल भी चिंता ना करें। बाय द वे आपसे मिलकर बहुत बहुत बहुत ज्यादा खुशी हुई।"

     मैंनेजर सेजल की हरकतों से पहले भी परेशान रहता था। इस तरह अपने नए सीईओ को रिझाने की कोशिश करते देख मैनेजर ने अपना सिर पीट लिया। उसे बस यही डर था कि कहीं विशेष सेजल को सबके सामने बेइज्जत ना कर दे। अगर विशेष को गुस्सा आ गया तो फिर सबसे ज्यादा उसे ही सुनना पड़ेगा, यह सोचकर ही उसके माथे पर पसीने की बूंदें छलक आई। 

     विशेष ने पहले तो घूरकर सेजल को देखा फिर एकदम से एक झूठी मुस्कुराहट के साथ बोला, "लेकिन मुझे आपसे मिलकर बिल्कुल भी खुशी नहीं हुई। वो क्या है ना, मैंने सबको कैफिटेरिया में सिर्फ चाय पीने के लिए नहीं बुलाया है। चाय के साथ बहुत सारी बातें हम खुलकर करते हैं। लंच डिनर फॉर्मल होता है लेकिन चाय हम सिर्फ अपने दोस्तों के साथ बैठ कर पीते हैं और मैंने सबको चाय पार्टी इसीलिए दी ताकि वहीं बैठ कर मैं सबका इंट्रो भी ले लू और सब के बारे में जान भी लूं। वैसे आपके बारे में तो मुझे थोड़ा बहुत आईडिया तो हो ही गया है। मुझे नहीं लगता कि अब मुझे आपको और भी जानने की जरूरत है और ना ही आपमें कोई दिलचस्पी है। मुझे कोई भी काम होगा किसी से भी काम होगा तो मैं डायरेक्टली उसी को अप्रोज करूंगा ना की किसी मिडिल मैन को। अब अगर आपकी बातें खत्म हो गई हो तो सब की तरह आप भी बाहर निकलेंगे? वो क्या है ना काफी देर से ताजी हवा नहीं मिली।"

   मीटिंग रूम से लगभग सभी लोग निकल चुके थे। बस आद्या अश्विनी और दो चार एंप्लॉय और बचे हुए थे। फिर भी सेजल को यह इंसल्ट की तरह लगा। वह विशेष के सामने कुछ कह तो नहीं सकती थी लेकिन अपना गुस्सा अपने अंदर दबाते हुए तेजी में मीटिंग रूम से बाहर निकल गई। उसे इस तरह बेइज्जत होते देख अश्विनी खुश हो गई लेकिन गलती से आद्या की हंसी छूट गई। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी दबाई और अनजाने में ही पलट कर देखा तो विशेष उसे ही घूर रहा था। आद्या को लगा जिस तरह विशेष ने सेजल की इंसल्ट की थी, उसी तरह अब उसे भी सुनाएगा। 





8


 विशेष ने जिस तरह सेजल को भाव नहीं दिया था उल्टे उसकी इंसल्ट कर दी थी, उसके बाद आद्या ने वहा रुकना सही नहीं समझा। वो जानती थी कि अब विशेष का अगला टारगेट वो ही होने वाली है। आखिर आज ट्रैफिक में उसने बुरी तरह से बर्ताव जो किया था लेकिन इस सब में उसकी कोई गलती नहीं थी। सारी गलती विशेष की थी। जब उसे ठोकर लगी और वह गिरी उस वक्त विशेष ने एक बार भी गाड़ी से बाहर निकाल कर उसकी हालत देखना जरूरी नहीं समझा। इससे उलट वो अपनी गाड़ी में मजे से बैठा रहा। 

    आद्या को बस इसी बात का गुस्सा था। पहले तो वो चुपचाप वहां से निकल जाना चाहती थी लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि उसे डरना नहीं चाहिए तब उसने विशेष की नजरों का सामना किया और पलट कर वहां से जाने को हुई लेकिन पीछे से आती आवाज ने उसे रोका, "मिस आद्या जोशी!!"

     आद्या समझ गई अब विशेष उसे कुछ ना कुछ जरूर सुनाएगा इसलिए उसने खुद को तैयार किया और एक गहरी सांस लेकर पीछे की तरफ पलटी। विशेष के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट थी लेकिन आद्या का चेहरा सपाट था। विशेष धीमी कदमों से उसकी तरफ बढ़ा और बोला, "हमारी पहली मुलाकात काफी दिलचस्प रही। मैंने सोचा नहीं था कि हमारी दूसरी मुलाकात इतनी जल्दी हो जाएगी, वह भी एक घंटे के अंदर। वैसे मानना पड़ेगा, हिम्मत बहुत है आप में एंड आई लाइक योर कॉन्फिडेंस। हर लड़की मैं इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वह अपना स्टैंड खुद ले सकें किसी और के भरोसे ना रहें।"

     आद्या उसकी बातों के पीछे छुपे मतलब को समझने की कोशिश में लगी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि विशेष की बातों में उसके लिए तारीफ है या फिर ताना? वह इस सब को किस तरह से ले? उसे यू कंफ्यूज होता देख विशेष बोला, "मुझे बहुत अच्छा लगता है जब आप जैसे किसी लड़की से मैं मिलता हूं जो बिना डरे बिना किसी घबराहट के अपने हक के लिए लड़ जाती है। मिस आद्या! मेरी वजह से आपकी स्कूटी का जोभी नुकसान हुआ है मैं उस नुकसान की भरपाई करने को तैयार हूं। जहां तक मेरी समझ में आया है वह स्कूटी आपके लिए काफी किमती होगा। पैसों की बात नहीं है। कुछ चीजें होती है हमारी लाइफ में जो हमारे इमोशंस से जुड़े होते हैं। या तो उस स्कूटी के साथ आपकी काफी सारी यादें जुड़ी होंगी या फिर वह स्कूटी आपको किसी बहुत खास ने दिया होगा तभी आपने इस तरह से रिएक्ट किया। यकीन मानिए अगर मेरे साथ ऐसा हुआ होता तो मैं भी उसी तरह रिएक्ट करता जिस तरह आपने किया। बाय द वे इस ऑफिस में मुझे एक असिस्टेंट की जरूरत होगी। आप यहां पर इसलिए ढाई 3 सालों से काम कर रही है शायद।" कहते हुए उसने मैनेजर की तरफ पलट कर देखा। 

    मैंनेसर ने भी हां में सर हिला दिया तो विशेष वापस आद्या की तरफ पलटते हुए बोला, "आपको इस कंपनी की काफी नॉलेज होगी इसलिए मैं चाहता हूं कि आप मुझे असिस्ट करें देखिए यह बिल्कुल मत समझिये कि कुछ देर पहले जो हमारे बीच में हुआ उसको लेकर मैं आपसे नाराज हूं या फिर किसी तरह का कोई प्लान है मेरे दिमाग में। ऐसा कुछ भी नहीं है। जो भी हुआ वह हम दोनों के बीच की बात है और यह हमारा ऑफिस है। हम प्रोफेशनली एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब बात काम की आती है तो मैं सिर्फ अपने काम पर फोकस करता हूं। किसी और बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप की जगह कोई मेरा दुश्मन भी होता तब भी, अगर वह काबिल होता तो मैं उसे जरूर आप्रोच करता। एक कलीग होने के नाते मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हूं तो एक बॉस होने के नाते मैं आपको ऑर्डर देता हूं। आप अपना सारा स्टफ लेकर मेरे केबिन में मुझे रिपोर्ट कीजिए लेकिन फिलहाल अभी सारे लोग टी पार्टी के लिए गए हैं तो हमें भी वही जाना चाहिए। क्या मैं आपके साथ चल सकता हूं?"

    आद्या अभी भी बहुत अजीब नज़रों से उसे देखे जा रही थी। उसके लिए विशेष के किसी बात पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन विशेष के इतने फ्रेंडली बिहेवियर से अश्विनी तो जैसे उस पर फ्लैट हो गई। उसने आद्या को बाजू से पकड़ा और बोली, "क्यों नहीं सर! हम साथ में चल सकते हैं, बिलकुल चल सकते हैं, है ना आद्या?“ कहते हुए उसने आध्या की तरफ देखा जो अभी भी अजीब नजरों से विशेष को ही घूरे जा रही थी। 

    विशेष मुस्कुराते हुए बोला, "चलो! कम से कम इतने फ्रेंडली तो हुए हम। तो लेडीज फर्स्ट! पहले आप लोग चलिए, मैं पीछे से आता हूं।"

     अश्विनी ने आद्या का हाथ पकड़ा और लगभग खींचते हुए वहां से लेकर गई। कैंटीन ऊपर के फ्लोर पर था और लिफ्ट अभी भी वहीं पर अटकी हुई थी इसलिए लिफ्ट का इंतजार करने से बेहतर अश्विनी ने सीढ़ियों से जाना सही समझा और आद्या के साथ वहां चल पड़ी। बीच रास्ते में आद्या को होश आया। सारी बातें अभी भी उसके दिमाग में घूम रही थी। उसने एकदम से अश्विनी की पकड़ से अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, "ये आदमी मुझे कुछ सही नहीं लग रहा। मैंने उसका इतना नुकसान कर दिया और वह है कि मुझे अपना असिस्टेंट बनाना चाहता है, यह तो हद हो गई। ऐसा इंसान दुनिया में मिलेगा क्या?"

     अश्विनी शरमाते हुए बोली, "ये बात तो तूने बिलकुल सही कहा। इतना अच्छा इंसान है, इतना चार्मिंग, इतना स्मार्ट इतना गुड लुकिंग इतना अमीर फिर भी इतना पोलाइट! सुना नहीं उसकी बातें! कैसे टप टप करके शहद टपक रहा था उसकी बातों से। हाय......... और उसकी आवाज....... सीधे दिल में उतर जाती है, मिश्री से भी मीठी।"

     आद्या ने टेढ़ी नजर करते हुए अश्वनी को घूर कर देखा और बोली, "यह जो जरूरत से ज्यादा मिठास होती है ना, इंसान की तबीयत खराब कर देती है। जहर का काम करती है वह। ना तो जरूरत से ज्यादा मीठा अच्छा होता है और ना ही जरूरत से ज्यादा कड़वापन। खाने में नमक कम हो तो हम ऊपर से डालकर चला लेते हैं लेकिन अगर वही नमक थोड़ा सा भी ज्यादा हो तो उसे हम थूक देते हैं। वैसे इंसान में मिठास के साथ थोड़ा कड़वापन और थोड़ा नमक भी होना चाहिए। अगर मीठास ज्यादा होगी तो जाहिर सी बात है इंसान के नियत में खोट है और यह सारी अच्छाई जो है वो सिर्फ़ उसका दिखावा है। मेरे समझ नहीं आ रहा कि ये इंसान करना क्या चाहता है? मुझे असिस्टेंट बनाकर कहीं मेरे साथ अपना बदला तो नहीं निकाल रहा?"

    अश्विनी ने अपना सर पीट लिया और बोली, "तूने सुनी नहीं उसकी बातें! तुम दोनों का रिश्ता प्रोफेशनल है और जब बात काम की है तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किसके साथ काम कर रहा है। उसे सिर्फ तेरे टैलेंट से मतलब है और कुछ नहीं।" कहते हुए अश्विनी ऊपर से ऊपर बढ़ गई लेकिन आद्या एकदम से वहां रुकी और बोली, "लेकिन उसे कैसे पता मेरे टैलेंट के बारे में? उसे कैसे पता कि मेरी क्वालिफिकेशन क्या है? ऐसे कैसे वो मुझे असिस्टेंट जैसे पोस्ट पर हायर कर सकता है? चाहे कुछ भी हो जाए, मैं इस इंसान पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर सकती और आंखें मूंदकर तो बिल्कुल भी नहीं। 

    आद्या के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था। उसने सर उठा कर ऊपर से ऊपर देखा लेकिन तब तक अश्विनी ऊपर जा चुकी थी। उसने आंखें मूंदकर गहरी सांस ली और खुद से कहा, "देखते हैं ना आद्या! क्या लिखा है तेरी किस्मत में। जब सब कुछ तूने किस्मत के हवाले कर दिया है तो इस बात को भी किस्मत पर ही छोड़ दे।"





9


 कैफेटेरिया में सभी एक जगह इकट्ठे बैठे हुए थे। बस आद्या और अश्विनी दूसरी तरफ सबसे अलग बैठे हुए थे। आद्या अपने ख्यालों में गुम थी वही अश्विनी अपनी चाय इंजॉय कर रही थी। लेकिन इस सब से दूर बैठा विशेष बस आद्या को ही निहारे जा रहा था। सभी उससे बात करने की कोशिश में लगे थे और वह खुद भी सबकी बातों को सुन भी रहा था और उन्हें जवाब भी दे रहा था लेकिन उसकी नजर रह-रहकर आद्या की तरफ चली ही जाती जिसने एक बार भी उसे पलट कर नहीं देखा था। कुछ सोचकर वह मन ही मन मुस्कुरा दिया। 

    सेजल आद्या को इस तरह कोने में बैठा देख खुश हो रही थी। उसे विशेष के पास बैठना था लेकिन मैनेजर ने एक दम से उसे गुस्से में घूर कर देखा। अभी कुछ देर पहले हुई अपनी बेज्जती सेजल भूल चुकी थी क्योंकि इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ना था। वह बस विशेष को अपने इशारों पर नचाना चाहती थी और कुछ नहीं तो उसकी फेवरेट ही बनना चाहती थी। उसने मन ही मन सोचा, "अभी नहीं तो कोई बात नहीं। ना हीं विशेष कहीं जा रहा है और ना ही मैं। एक ही ऑफिस में रहते हुए मुझे उसे पटाने के बहुत सारे मौके मिलेंगे। तब तो यह मैनेजर भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।" सेजल अपनी ही प्लानिंग पर मुस्कुराने लगी। उसके बगल में बैठा उसका टीम लीडर अजीब नज़रों से उसे देखने लगा और भौंहै उचका कर मुस्कुराने की वजह पूछी तो उसने कुछ कहने की बजाए एक आंख दबा दी। 

    अपनी चाय खत्म कर सभी वापस अपने अपने फ्लोर पर चल दिए। सभी वापस अपनी सीट पर तो आ गए लेकिन आद्या का दिमाग खराब हुआ पड़ा था। अपनी सीट पर आते ही उसने कंप्यूटर ऑन किया, कुछ जरूरी और पर्सनल चीजों को एक पेन ड्राइव में सहेज कर अपने पास रख लिया। फिर एक कार्डबोर्ड बॉक्स में अपनी सारी चीजें इकट्ठा करने लगी। ऐसा करते हुए उसके चेहरे पर एक उलझन साफ नजर आ रही थी। 

    अश्विनी उसे समझाते हुए बोली, "आद्या!!! बड़े बुजुर्ग हमेशा कह गए हैं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है। अभी तुझे कुछ समझ नहीं आ रहा लेकिन देखना, हो सकता है यह तेरी लाइफ का सबसे इंपॉर्टेंट डिसीजन हो। इसलिए जो भी होना है उसे हो जाने दे। ज्यादा टेंशन मत ले। वैसे ही तू कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाती है।"

    आद्या अपना सामान पैक करते हुए बोली, "मुझे इस बात की कोई टेंशन नहीं है अश्विनी। जो होना है उसे होने देने के अलावा मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं है। और इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं सोचना चाहती। इस सब से कुछ होगा भी नहीं। लेकिन मेरी परेशानी की वजह कुछ और है। मेहता अंकल ने मुझे शाम को घर बुलाया है, शायद उन्हें कुछ पता चला है। क्या, ये तो मैं नहीं जानती लेकिन उन्होंने मुझे कॉल किया था।"

     अश्विनी अपना सर खुजाते हुए बोली, "बात तो मेरी भी समझ नहीं आई यार! इतने टाइम से हम लोग इस सब के पीछे की वजह ही तो सोचते आ रहे हैं। मिस्टर कपूर तो तेरे पापा के बॉस थे फिर यह सब कुछ करवा कर उन्हें क्या हासिल होना था और उन्हें क्या हासिल हो गया इतने सालों में? उनका क्या फायदा था इस सब ने?"

   आद्या एक बार फिर उदास हो गई। उसने कहा, "यही तो आज तक समझ नहीं आया। आखिर क्यों? आखिर क्यों एक बॉस अपने ही एंप्लॉय को उसकी पूरी फैमिली के साथ खत्म करने की साजिश रचता है? अगर पैसों से रिलेटेड कोई फ्रॉड होता तो वह सीधे सीधे मेरे पापा को जेल भिजवा सकते थे। मैं जानती हूं मेरे पापा कभी कोई गलत काम नहीं कर सकते। तो क्या मेरे पापा को मिस्टर कपूर का कोई ऐसा राज पता चल गया था जिसे छुपाने के लिए उन्होंने मेरे मम्मी पापा को........... यही बात तो अब तक समझ नहीं आई है। मिस्टर कपूर की इमेज अपने ऑफिस में और बाहर के लोगों में एक अच्छे इंसान की है लेकिन कोई भी बिजनेस मैन कितना भी अच्छा क्यों ना हो किसी ना किसी क्राइम में जरूर इन्वॉलव होता है। हो सकता है पापा के हाथ कुछ ऐसा लग गया हो। लेकिन मैंने कभी उन्हें किसी बात को लेकर परेशान होते हुए नहीं देखा, हमेशा उन्हें मुस्कुराते हुए ही देखा है। और ना ही घर में ऐसी कोई चीज मिली मुझे जिससे कि कोई शक हो। कुछ समझ नहीं आ रहा यार। कभी-कभी लगता है इस गुत्थी को सुलझाते सुलझाते कहीं मैं हीं पागल ना हो जाऊं। फिलहाल मुझे उस नमूने के केबिन में जाना है। जो भी बात है वह मेहता अंकल से मिलकर ही पता चल पाएगा।"

       सेजल फाइल देने के बहाने विशेष के केबिन में जाने की फिराक में थी लेकिन उसी वक्त उसकी नजर आद्या पर गई जो अपना सामान समेट रही थी। उसे अपना सामान समेटते देख सेजल को बड़ी हैरानी हुई लेकिन बिना कुछ सोचे समझे वह आद्या के पास आकर उसका मजाक उड़ाते हुए बोली, "क्या हुआ आद्या? ऐसे अपना सामान क्यों समेट रही हो? अरे रे रे रे! कहीं नए बॉस ने आते ही तुम्हें नौकरी से तो नहीं निकाल दिया? हे भगवान! इसका मतलब उस इंसान ने तुम्हें आते ही पहचान लिया कि तुम किसी काम की नहीं हो! बेचारी हमारी आद्या! अब क्या करेगी? दूसरे नौकरी ढूंढना इतना आसान कहां है। तुम घबराओ मत, मैं खुद जाकर विशेष सर से बात करूंगी। तुम्हारी स्पेशल सिफारिश लगाऊंगी। हो सकता है कि वह तुम्हें वापस नौकरी पर रख ले। अगर वह ऐसा नहीं भी करते हैं तो कोई बात नहीं, तुम्हें पैसों की जरूरत हो तो मुझे बताना मैं पूरे दिल से तुम्हारी हेल्प करूँगी। सच कह रही हूं। माना हम दोनों के बीच कभी दोस्ती नहीं रही लेकिन हम कभी कलीग थे। इस नाते मैं थोड़ी तो तुम्हारी हेल्प कर ही सकती हूं, है ना अश्विनी?"

    सेजल ने जानबूझकर आद्या और अश्विनी को नीचा दिखाना चाहा लेकिन उसे बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि आखिर आद्या के साथ हुआ क्या था। अश्विनी का दिल किया कि वह अभी सेजल का मुंह तोड़ दे। वो गुस्से में अपनी कुर्सी से उठी और सेजल की तरफ उंगली करते हुए बोली, "आद्या को किसी की भी हेल्प की जरूरत नहीं है और तुम्हारी तो बिल्कुल भी नहीं। और तुम हो कौन? लगती क्या हो सीइओ सर की जो वो तुम्हारी बात सुनेंगे? चमची कहीं की। इतनी इंसल्ट झेलने के बाद भी हार नहीं माना। अच्छा है, लगी रहो। वैसे ये बात बिल्कुल सही कही तुमने, हमारे जो नए सीईओ सर है उन्हें अच्छे और बुरे की बहुत अच्छे से समझ है। इसलिए तो खड़े-खड़े तुम्हारी इंसल्ट कर दी उन्होंने। अब तो थोड़ा तमीज से पेश आओ। कुछ तो सबक लो तुम और एक बात बिल्कुल सच कहा तुमने, आद्या यह जो अपना सामान पैक कर रही है ना, वह सब करने के लिए खुद विशेष सर ने हीं उसे कहा है। वैसे घबराओ मत, बहुत जल्द पता चल जाएगा कि किसे नौकरी से निकाला जाता है और किसे प्रमोट किया जाता है। इतना तो मेरे समझ में भी आ ही गया है कि हमारे नए सीईओ सर को इंसानों की कितनी अच्छी परख है इसलिए तुम अपना यह चेहरा लेकर कहीं और मरो। यहां मरने की जरूरत नहीं है। खामखा हमें सफाई करनी पड़ जाएगी।"

    सेजल ने गुस्से से अश्विनी की तरफ देखा और उस पर झपटने की कोशिश की लेकिन आद्या ने उसका हाथ पकड़ा और हल्का धक्का देते हुए बोली, "सेजल बस करो। तुम यहां आई और अपना बकवास शुरु भी तुम्हीं ने किया। हमने कुछ नहीं कहा। हम नहीं आए थे तुम्हारे पास, तुम आई थी। इसीलिए दफा हो जाओ यहां से, इसी में तुम्हारी भलाई है।"

     अपना हाथ छुड़ाकर सेजल पैर पटकते हुए वहाँ से निकल गयी। 





10



     आद्या ने अपना सारा सामान समेटा और विशेष के केबिन में जाने को हुई, तभी अश्विनी ने उसे रोका और उसके गले लगते हुए बोली, "तू ज्यादा टेंशन मत ले। ऐसे ऐसे लोगों को मैं हैंडल कर लूँगी, तू बस अपने काम पर ध्यान दें। तेरी लाइफ में बहुत से प्रॉब्लम आए और गए लेकिन कुछ प्रॉब्लम है ऐसी जो अभी भी तेरी लाइफ में है। उन्हें तु अपनी लाइफ से हमेशा के लिए उखाड़ फेंक ताकि मैं मेरी आद्या को मुस्कुराते हुए देख सकूं। वह आद्या जो पूरे कॉलेज में किसी तितली की तरह उड़ती फिरती थी। सारे प्रोफेसर्स के नाक में दम कर देती थी तो वही प्रोफेसर्स उसे प्यार भी करते थे। कोई तुझसे नाराज नहीं होता था। तू लाइफ में कभी सीरियस नहीं रही और अब देख! सीरियसनेस् तेरे चेहरे पर हमेशा के लिए बस गई है, जो बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती। तु पहले बहुत खूबसूरत लगती थी। अब तेरी खूबसूरती थोड़ी कम हो गई है। देखना, बहुत जल्द सब कुछ ठीक हो जाएगा।"

     आद्या अश्वनी को खुद से अलग करते हुए बोली, "वक्त चाहे सारे जख्म भर दे, मैं चाहे जितने भी ऊंचाई पर पहुंच जाऊं, जितने भी सफलता मेरी कदमों को छूए, अपने माँ पापा के कातिल को सज़ा दिलवा दू, भले ही सब कुछ क्यों ना ठीक हो जाए लेकिन इस सब से मेरी मम्मी पापा तो वापास नहीं आएंगे। अगर ऐसा हो सकता तो मैं सब को माफ कर देती लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा।"

    आद्या ने अपना सामान उठाया और वहां से निकल गई। अश्विनी उसे जाते हुए देखती रही। उसने अपनी आंखें मूंद ली और भगवान से प्रार्थना किया, "हे भगवान! अब तू ही संभाल इसकी जिंदगी। हमेशा चहकते रहने वाली ये लड़की एकदम ऐसे खामोश हो गई है जैसे किसी दूसरी दुनिया से आई हो। इस लड़की को मैं नहीं जानती। मुझे वापस से मेरी वही दोस्त ला दो, प्लीज भगवान जी, प्लीज!!"


     विशेष के केबिन के बाहर आद्या अपना सामान लेकर खड़ी थी। उसका बॉक्स थोड़ा भारी था इसलिए उसने बॉक्स को जमीन पर रखा और दरवाजा नॉक किया। अंदर से आवास आई "कम इन"

     आद्या ने दरवाजा खोला और बड़ी मुश्किल से अपना बॉक्स लेकर अंदर दाखिल हुई। ऐसा करते हुए उसकी कोहनी में थोड़ी चोट भी लग गई थी। हालांकि यह चोट उसे सड़क पर गिरते हुए ही लग गई थी लेकिन उसे इस बात का जरा सा भी एहसास नहीं हुआ और दरवाजे पर टकराने से उसकी हल्की आह निकल गयी जिसे विशेष ने सुन लिया। उसकी नजर आद्या की कोहनी पर गई। उसे समझते देर नहीं लगी कि यह चोट उसे कब और कैसे लगी। उसे मन ही मन पछतावा हो रहा था। 

     आद्या ने देखा, विशेष के केबिन में पहले से ही उसके लिए कुर्सी टेबल से लेकर लैपटॉप तक हर चीज की व्यवस्था कर दी गई थी। आद्या ने हैरानी से एक नजर विशेष की तरफ देखा और फिर अपना बॉक्स टेबल के साइड में रख कर उसमें से सामान टेबल पर लगाने लगी। उसे इतमिनान से अपना काम करते देख विशेष से रहा नहीं गया। वह उठा और केबिन में ही रखें एक अलमारी में से फर्स्ट एड बॉक्स निकाला। 

    आद्या अपना सामान जमाने में लगी हुई थी। उसी वक्त विशेष ने उसकी बांह पकड़ ली। आद्या बुरी तरह से चौंक गई। उसने सवालिया नजरों से विशेष को देखा लेकिन विशेष ने कुछ कहने की बजाए आद्या को खींच कर सोफे पर बैठाया। आद्या हैरानी से बोली, "सर! यह आप क्या कर रहे हैं? मैं आपकी इंप्लाइ हूं और आप इस तरह मुझे टच नहीं कर सकते। आप कर क्या रहे हैं? हम ऑफिस में हैं और आपका मेरा एक प्रोफेशनल रिश्ता है और प्रोफेशनली हम एक दूसरे के साथ इस तरह बर्ताव नहीं कर सकते। 

    विशेष उसे घूर कर देखते हुए बोला, "पर्सनल या प्रोफेशनल, अगर कोई अपने आप पर ध्यान ना दें तो वह कभी अच्छा परफॉर्म नहीं कर सकता है। जैसा कि मैंने कहा था, अगर एंप्लॉय खुश होता है तो कंपनी तरक्की करती है और इसके लिए जरूरी है एंप्लॉय का हेल्दी होना। तुम्हारी बाँह में चोट लगी है और कोहनी भी छिली हुई है। आई नो यह चोट तुम्हें मेरी वजह से लगी है लेकिन तुम्हें इसकी जरा भी परवाह नहीं है। मैं नहीं चाहता कि इसमें इंफेक्शन हो और तुम हफ्ते 2 हफ्ते की छुट्टी लेकर घर में बैठो। उससे बेहतर है कि मैं इस चोट पर दवाई लगा दूं। तुम्हें कुछ भी ऐसा वैसा सोचने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे इस एक चोट की वजह से ऑफिस का कितना नुकसान हो सकता है तुम्हें इसका अंदाजा तक नहीं है।" 

    विशेष के जवाब से आद्या खामोश हो गई। विशेष बड़े ध्यान से आद्या के घाव को साफ कर उस पर दवाई लगा रहा था। आद्या खामोशी से बस उसे देखे जा रही थी। उसके मां पापा और अश्विनी के बाद पहली बार कोई अनजान शख्स उसकी इस तरह परवाह कर रहा था। अश्विनी उसकी दोस्त थी लेकिन तभी इतना हक उसने नहीं जताया था। उसे बहुत अजीब लग रहा था लेकिन एक ख्याल उसके दिमाग में आया कि शायद यह सब करके विशेष अपनी गलती की माफी मांग रहा है या फिर वाकई में मुझे एक अच्छा इंसान है और वो उसको गलत समझ रही है।"

     लेकिन आद्या इतनी जल्दी किसी पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं थी, बिल्कुल भी नहीं। उसने नजर दूसरी तरफ घुमा ली। उसके घाव पर बैंडेज लगाकर विशेष ने एक नजर आद्या पर डाली और सोचने लगा, "इतनी चोट पर दवाई लगाते हुए भी एक बार भी आद्या ने आह नहीं भरी। क्या उसे सच में दर्द नहीं हुआ या फिर यह दर्द सहने की आदत हो गई है?"

     एकदम से आद्या ने विशेष की तरफ देखा तो उसकी आंखों में देखते हुए कुछ देर के लिए वह ठहर सी गई। उन आंखों में दर्द था लेकिन वो दर्द क्यों था और किसके लिए था यह आद्या समझ नहीं पाई। आद्या को अपनी तरफ देखता पाकर विशेष ने फर्स्ट एड बॉक्स को बंद किया और उठ कर वहां से चला गया। आद्या अभी भी वही बैठी थी। अपनी कुर्सी पर बैठते हुए बोला, "वहाँ दो फाइल तुम्हारी टेबल पर रखे है, उन दोनों पर रिपोर्ट बनाकर मुझे दिखाओ। तुम्हें अच्छे से पता है यह दोनों ही प्रोजेक्ट हमारे लिए इंपॉर्टेंट है लेकिन इन दोनों में से किसे पहले तवज्जो देना ये हम सिर्फ तुम्हारी रिपोर्ट से ही तय कर सकते हैं। अब वहां बैठ कर अपना और ऑफिस का टाइम बर्बाद मत करो। मैंने पहले ही कहा था, काम के वक्त मुझे सिर्फ अपना काम दिखता है, ना कोई पर्सनल, नहीं ना कुछ इंपॉर्टेंट। 1 घंटे के अंदर मुझे इन दोनों पर रिपोर्ट तैयार चाहिए।"

     विशेष की बात सुनते आद्या एक झटके से सोफे से उठी और अपनी कुर्सी पर बैठ गई। उसने लैपटॉप ऑन किया और तेजी से फाइल्स के एक एक पन्ने पलटते हुए, कभी उसकी हाथ कागज पर चलते तो कभी लैपटॉप के कीबोर्ड पर। विशेष बड़े ध्यान से आद्या को काम करते हुए देख रहा था। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट थी लेकिन इस सब से बेखबर आद्या पूरी तरह से अपने काम में लगी हुई थी। 





11



आद्या का टेबल विशेष ने अपने सामने ही रखवाया था। उन दोनों के बीच कम से कम 10 से 15 मीटर का फासला तो था ही लेकिन आद्या को सिर्फ अपने काम से मतलब था। जो काम विशेष ने उसे दिया था, वह पूरे लगन से उसे करने में जुटी हुई थी। उसे एक बार भी एहसास नहीं हुआ कि सामने बैठा विशेष हर थोड़ी थोड़ी देर में उसे ही देखे जा रहा था। 

    अपने काम में खोई हुई आद्या इतनी खूबसूरत लग रही थी कि वाकई में विशेष अपने काम में कॉन्सन्ट्रेट नहीं कर पा रहा था। ना चाहते हुए भी उसकी नजर सामने टेबल पर बैठी आद्या चली ही जाती। उसने मन ही मन सोचा, "अगर यह ऐसे ही मेरे सामने रही तो मैं काम नहीं कर पाऊंगा। ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ? सुबह जिस तरह बर्ताव किया उसने मेरे साथ, मुझे तो इससे नाराज होना चाहिए था लेकिन मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा। कुछ भी कहो, भले गुस्सा नाक पर रहता हो लेकिन लड़की है बहुत खूबसूरत।" सोचते हुए वो कुर्सी पर पीछे की तरफ पूरा झुक गया और आंखें बंद कर ली। 

     अपना पैन अपनी उंगलियों में नचाते हुए विशेष कुछ सोच रहा था। तभी उसके फोन पर एक मैसेज का नोटिफिकेशन आया। टोन सुनते ही उसने एकदम से पेन को टेबल पर रखा और वैसे ही आंखें बंद किए हुए उसने कहा, "मिस जोशी!"

     लेकिन आद्या अपने काम में इतना खोई हुई थी कि उसे विशेष की आवाज सुनाई नहीं दी। विशेष ने आंखें खोल कर आद्या की तरफ देखा और एक बार फिर उसे आवाज लगाई, "मिस् जोशी!!!“

    इस बार विशेष थोड़ी तेज थी जिससे आद्या चौक गयी और उसने सर उठा कर देखा तो विशेष को आराम से अपनी कुर्सी पर पसरा हुआ पाया। दिन के समय उसे इस तरह आलस में देख आद्या तो थोड़ा अजीब लगा लेकिन बॉस तो बॉस है, उसके ऊपर कोई रूल लागू नहीं होता। 

     आद्या ने अपनी बड़ी-बड़ी पलकें झपकाते हुए मासूमियत से पूछा, "यस सर! आपने बुलाया?"

     विशेष कुर्सी पर सीधा बैठा और अपने लैपटॉप में नजर गड़ाते हुए बोला, "मेरे लिए एक कप कॉफी ला देंगी प्लीज? दूध और एक चम्मच शक्कर के साथ।"

    आद्या पहले तो मन ही मन गुस्सा हो गई। "मैं इनकी असिस्टेंट हूं, कोई नौकर नहीं। यह काम तो यहां का चपरासी भी कर सकता है फिर मुझे इस तरह क्यों बोल रहा है?" लेकिन फिर उसे यह सोच कर और ज्यादा हैरानी हुई सभी को चाय पार्टी देने वाला विशेष अपने लिए इतनी जल्दी कॉफी मंगवा रहा था। उसने हिचकिचाते हुए कहा, "सर अभी कुछ देर पहले ही आप सबके साथ बैठकर चाय पी रहे थे। इतनी जल्दी कॉफी? सेहत के लिए अच्छा नहीं होता सर।"

    विशेष ने उसे तिरछी नजर से देखा और बोला, "मुझे पता है मैं क्या कर रहा हूं। जितना आपसे कहा जाए उतना कीजिए। आप मेरी असिस्टेंट है और ये आपकी ड्यूटी है की मेरे हर आर्डर को आप माने और मुझे फॉलो करें।" कहकर उसने अपना पूरा ध्यान लैपटॉप पर लगा दिया। 

    आध्या अपना गुस्सा अपने मन में दबाते हुए बोली, "लेकिन सर! यह काम तो कोई भी प्यून आकर कर सकता है तो फिर मैं.......!"

    विशेष बिना उसकी तरफ देखे उसकी बात काटते हुए बोला, "मुझे लगता है शायद आपको असिस्टेंट के सारे कामों की जानकारी नहीं है। उसकी ड्यूटी और रिस्पांसिबिलिटी के बारे में जानने के लिए आप कहे तो मैं आपके लिए एक ट्रेनिंग सेशन अरेंज करवा सकता हूं।"

    आद्या का दिल किया अभी इसी वक्त अपने सामने खड़े उस इंसान का सिर फोड़ दे लेकिन फिर भी खुद को शांत करते हुए बोली, "नो थैंक्स सर। मुझे मेरी ड्यूटी और रिस्पांसिबिलिटीज बहुत अच्छे से पता है। मेरे बारे में इतना सोचने के लिए थैंक यू सो मच।" कहकर आद्या जाने के लिए मुड़ी। 

    जैसे ही उसने दरवाजा खोला, "पीछे से विशेष की आवाज आई, "ध्यान रखना! मुझे कड़वी कॉफी बिल्कुल भी पसंद नहीं है।"

    आद्या ने पलट कर भी उसे नहीं देखा और बाहर चली गई जैसे उसने कुछ सुना ही ना हो। पीछे बैठा विशेष बस उसे जाते देख मुस्कुरा रहा था। अभी कुछ देर ही हुए थे उसे आद्या से मिले लेकिन वह उसे अच्छी लगने लगी थी। फिर एकदम से उसके चेहरे की सारी मुस्कुराहट गायब हो गई। खुद को अकेला पाकर उसने जल्दी से अपना फोन उठाया और एक नंबर डायल किया। 

     दो से तीन रिंग जाते ही दूसरी तरफ से किसी ने फोन उठा लिया जैसे दूसरी तरफ का वह शख्स उसी के कॉल के इंतजार में था। फोन रिसीव होते ही विशेष थोड़ा घबराते हुए बोला, "हेलो सर!"

     दूसरी तरफ से आवाज आई, "सब ठीक चल रहा है?

    विशेष हकलाते हुए बोला, "जी...... जी.......जी सर....... सब ठीक चल रहा है। जैसा आप आपने कहा था सब कुछ वैसा ही किया मैंने और सब कुछ वैसे ही हो रहा है जैसे आप चाहते हैं।"

     दूसरी तरफ से फिर आवाज आई, "बहुत खूब। सारी रिपोर्ट मिली मुझे। उम्मीद करता हूं कि तुम उस काम को बखूबी अंजाम दोगे जिसके लिए मैंने तुम्हें चुना है। मुझे सिर्फ मेरी मंजिल से मतलब है बाकी तुम्हारा रास्ता चाहे जो भी हो मुझे उससे कोई मतलब नहीं है।"

     इतनी सी देर में विशेष के माथे पर पसीने की बूंदें छलक आई थी। उसे कुछ पूछना था लेकिन उसे बहुत ज्यादा हिम्मत जुटानी पड़ रही थी। सारी बातें सुनने के बाद उसने बड़ी मुश्किल से कहा, "सर एक बात कहनी थी, अगर आप बुरा ना माने तो।"

    दूसरी तरफ मौजूद शख्स ने कहा, "हां पूछो।"

    विशेष अपने माथे की पसीने को पोंछते हुए बोला, "सर मैं समझ सकता हूं आपके दिमाग में जो भी प्लानिंग चल रही है। लेकिन सर मैं उस लड़की से मिला। बहुत मासूम है वह। सर आपको नहीं लगता कि हम उसके साथ कुछ ज्यादा ही......... मेरा मतलब हम प्यार से भी तो यह सारा काम कर सकते हैं ना!"

     दूसरी तरफ से गुस्से भरी आवाज आई, "विशेष....... अपनी औकात मत भूलो। लगता है कुछ ज्यादा ही प्यार से पेश आ रहा हूं मैं तुम्हारे साथ। मेरा बेटा तुम्हें अपना दोस्त कम और भाई ज्यादा मानता है इसलिए अपना जानकर मैंने तुम्हें अपने इस प्लान में शामिल किया वरना तुम इस लायक नहीं हो कि मेरी कंपनी में कोई ऊंची पोस्ट हासिल कर सको। अपने बाप की तरह तुम भी मेरी कंपनी में एक चपरासी ही रहते लेकिन यह सब सिर्फ मेरे बेटे की मेहरबानी है जो मैं तुम्हें झेल रहा हूं। अब यह तुम पर है कि तुम्हें क्या करना है। मैंने पहले भी कहा, मुझे सिर्फ अपने काम से मतलब है। उससे मंजिल को पाने के लिए तुम चाहे जिस भी रास्ते से चलो मुझे कोई मतलब नहीं है मुझे सिर्फ रिजल्ट चाहिए। माणिक कपूर जो चाहता है वह हासिल करके रहता है। फिर चाहें उसके लिए किसी की बलि ही क्यों ना चढ़ानी पड़े। तुम्हें मेरे राज पता है, अगर तुमने मेरे साथ गद्दारी करने की कोशिश तो तुम्हारा हाल भी वही होगा जैसे बाकियों का हुआ है। नरक में भी छुप जाओगे तो भी मुझ से बचना नामुमकिन है और अगर तुम्हें उस लड़की के लिए कितना ही बुरा लग रहा है तो मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा। तुम चाहो तो उसके साथ अपनी पूरी जिंदगी बिता सकते हो लेकिन मेरा काम हो जाना चाहिए। और क्या तुम्हें लगता है, जिस काम से तुम वहाँ गए हो, वह सच जानने के बाद वह लड़की तुम पर जरा सा भी भरोसा करेगी तो तुम बहुत बड़े बेवकूफ हो। उसे सिर्फ भनक लगने की देर है और वह तुम्हारी मुट्ठी से रेत की तरफ फिसल जाएगी। नफरत करेगी तुमसे और कुछ नहीं। मेरी बात ध्यान में रखना।" कहकर मिस्टर कपूर ने फोन काट दिया

     विशेष ने जल्दी से फोन रखा और सामने रखा पानी का गिलास उठा कर एक साथ में खत्म कर दिया।



12



 विशेष के इरादो से अनजान आद्या गुस्से में उसके लिए कॉफी लेने निकली। पूरे रास्ते गुस्से वो बड़बड़ाये जा रही थी। अश्विनी ने उसे इस तरह गुस्से में आते देखा तो जल्दी से उठ कर उसके पास आई और उसे शांत करते हुए बोली, "शांत गदाधारी भीम शांत!! क्या हुआ? ऐसा क्या हो गया जो तु आधे घंटे में हीं उस केबिन से इतने गुस्से में निकली है? ऐसा क्या कर दिया विशेष सर ने?"

    आद्या ने जो गुस्सा अब तक अपने मन में दबा रखा था वह अश्विनी के सामने फूट पड़ा। वह बोली, "वह इंसान मुझे असिस्टेंट बनाकर मुझ पर कोई एहसान नहीं कर रहा। सारा बदला वो चुन चुन कर लेगा तू देख लेना और इसकी शुरुआत वो कर चुका है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो मैं यह नौकरी छोड़ कर चली जाऊंगी। मुझे मेरी इज्जत प्यारी है यार। जो काम यहां का चपरासी करता है ये इंसान वह कम मुझसे करपा रहा है। ऊपर से मुझे मेरी ड्यूटी और मेरी रिस्पांसिबिलिटीज सिखा रहा है। जिसे जरा सी भी तमीज नहीं है। अभी कुछ देर पहले ही सब लोगों को चाय पार्टी दी थी ना उसने, और खुद भी भर भर के चाय पिया था। अभी एकदम से उसको कॉफी की चाहत कैसे हो गई? साफ साफ दिख रहा है कि वह मुझे परेशान करने की कोशिश कर रहा है।"

    अश्विनी उसे समझाते हुए बोली, "तू परेशान मत हो। कुछ लोग होते हैं मूडि। और ऐसे अमीर लोग तो ज्यादा ही होते हैं। इन्हें कब किस चीज की जरूरत पड़े हमें समझ नहीं आता। अगर हमारी नजर से देखो तो किसी एलियन से कम नहीं होते। बड़े लोगों की बड़ी बातें, अजीब शौक अजीब सी आदतें। तू गुस्सा मत हो, और हो सकता है उसे किसी और के हाथ की बनी काफी पसंद ना आती हो। मेरा मतलब कुछ मामलों में लोग अक्सर फ्रीक होते हैं। मतलब सफाई पसंद। कोई और बना कर लाएगा तो ना जाने वह कैसे बनाएगा किस तरह बनाएगा।"

     आद्या बोली, "हां! जैसे उसे तो मेरे हाथ की कॉफी पीने की आदत है। उसे अच्छे से पता है कि मैं किस तरह कॉफी बनाती हूं। तेरा लॉजिक मेरे सर के ऊपर से जा रहा है। तेरे साथ बात करने का टाइम नहीं है मेरे पास, अभी उस खडूस के लिए कॉफी बना कर ले जाना है। साथ में दो फाइल पकड़ा दी है उसने, उस पर रिपोर्ट तैयार करना है वह भी अगले कुछ देर में। अब मैं रिपोर्ट बनाउ या फिर उसके लिए कॉफी? पता नहीं उसके लिए इंपॉर्टेंट क्या है?"

     आध्या गुस्से में पैर पटकते हुए वहां से गई। विशेष ने खास तौर पर कहा था कि उसे कड़वी कॉफी पसंद नहीं है इसलिए उसने जानबूझकर दो चम्मच कॉफी और 3 चम्मच चीनी डाल दिया। कॉफी को चलाते हुए आद्या के चेहरे पर जो मुस्कुराहट थी उसे विशेष अपने लैपटॉप पर देख रहा था। आद्या को मुस्कुराते देख उसके चेहरे पर भी हल्की मुस्कुराहट आ गई लेकिन फिर एकदम से उसे मिस्टर कपूर का ध्यान आया और खुद से बोला, "बेचारी यह लड़की! काश कि मैं इसकी कोई मदद कर पाता। लेकिन अगर मैंने इसकी मदद करने की कोशिश जरा सी भी की तो मैं मुसीबत में पड़ जाऊंगा। नहीं विशेष! तु इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकता। और वैसे भी जब आद्या को पता चलेगा, जब वो तेरी सच्चाई जानेगी तो वह तुझसे सिर्फ और सिर्फ नफरत करेगी और कुछ नहीं। इसलिए बेहतर है तु सरअपने काम पर फोकस कर। मिस्टर कपूर को जो भी चाहिए उसे ले जा कर दे और यहां से कहीं दूर चला जा। लेकिन जो कुछ भी इस लड़की के पास है उसे लेने के लिए सबसे पहले मुझे इसका भरोसा जीतना होगा। इसे अपने प्यार के जाल में फंसाना होगा तभी यह सब कुछ मुमकिन है वरना और कुछ तो नहीं लेकिन तेरी लाइफ जरूर खतरे में पड़ जाएगी।

   विशेष अभी यह सब कुछ सोच ही रहा था कि तभी उसके दरवाजे पर दस्तक हुई। विशेष को लगा शायद आद्या वापस आ गई है इसलिए उसने बिना ध्यान दिए कंप्यूटर स्क्रीन ऑफ कर दिया और दूसरा प्रोग्राम ऑन कर उसने कहा, "कम इन"

     धीरे से दरवाजा खुला और एक तेज परफ्यूम की गंध पूरे केबिन में फैल गई। विशेष को ऐसी तेज गंध कुछ खास पसंद नहीं आई। इतना स्ट्रांग परफ्यूम उसे कभी अच्छा नहीं लगता था। उसने नजर उठाकर देखा तो सामने सेजल खड़ी थी। वो अपने चेहरे पर बड़े ही मादक मुस्कान लिए बोली, "क्या मैं अंदर आ सकती हूं सर?"

     सेजल के परफ्यूम की गंध से विशेष का सर अब धीरे-धीरे घूमने लगा था। उसने एक गहरी सांस ली और कहा, "शायद आपको सुनाई नहीं देता। मैंने दरवाजे पर ही आपको अंदर आने के लिए कहा था। अगर आपको सुनाई नहीं देता तो ऐसे ही बिना इजाजत आप किसी के केबिन में घुस जाएंगी?"

    एकदम से उसकी नजर सेजल के कपड़ों पर गई। उसके शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिसके कारण उसकी क्लीवेज नजर आ रही थी। विशेष को यह समझते देर न लगी कि आखिर सेजल करना क्या चाहती हैं। उसका पूरा ध्यान आद्या पर था और किसी भी वजह से अपना ध्यान भटकाना नहीं चाहता था। उसने बड़ी बेरुखी से कहा, "कुछ काम था या फिर ऐसे ही परेशान करने आई हो? तुम्हारा वक्त कीमती हो या ना हो, मेरा वक्त बहुत कीमती है अगर कोई काम है तो कहो या फिर यहां से दफा हो जाओ।"

    सेजल अपने हाथ में एक फाइल पकड़े हुए थी जो उसने अपने पीछे छुपा रखा था। उसे फाइल को आगे किया और बोली, "सर! वह इस फाइल के बारे में कुछ डिसकस करना था आपसे।" कहते हुए धीरे धीरे लेकिन मटकते हुए वह विशेष के टेबल तक आई फिर जानबूझकर उसने गिरने का नाटक किया और विशेष के ठीक सामने उसकी टेबल पर हौले से गिर गई। उसने हाथों को कुछ इस तरह से टेबल पर टेक लगाया जिससे विशेष की नजर सीधे उसके स्किन पड़ जाए। 

     विशेष को उसकी यह हरकत बिल्कुल भी पसंद नहीं आई लेकिन इससे पहले कि वह सेजल को गुस्से में बाहर निकल जाने को कहता, उसी वक्त दरवाजा खुला और आद्या कॉफी के साथ अंदर दाखिल हुई। उसने नजर उठाकर सेजल को नहीं देखा और बोली, "सर आपकी कॉफी। जैसा आपने कहा था।" कहते हुए उसने जैसे नजर उठाया, सेजल और विशेष को एकदम से करीब पाया। जिस एंगल से आद्या उन्हें देख रही थी उससे किसी को भी गलतफहमी होना लाजमी था। वह एकदम से झेंपते हुए पीछे की तरफ पलट गई और बोली, "आई आई आई एम सॉरी सर? मुझे नहीं पता था आप यहां पर्सनली किसी के साथ मीटिंग कर रहे है। मैं थोड़ी देर के बाद आती हूं।" कहकर वह जैसे ही बाहर की तरफ जाने को हुई विशेष ने उसे पीछे से आवाज लगाई। 

     "मिस जोशी वहीं रुक जाइए। आप मेरी असिस्टेंट है और यहां आपका भी कैबिन है। और जिसका केबिन नहीं है वह यहां से बाहर जा सकता है। मिस सेजल! आपको जो भी डिस्कशन करना है आप सीधे सीधे मैंनेजर या फिर टीम लीडर के साथ बैठकर डिस्कस कर सकती हैं, मेरे केबिन में आने की जरूरत नहीं। क्योंकि आपका यह जो परफ्यूम है मुझे पसंद नहीं। अगर एक और बार आप मेरे केबिन में आई तो मैं आपका पूरा परफ्यूम ही नही यूनिफार्म तक चेंज करवा दूंगा। उसके बाद आप प्रॉपर साड़ी में यहां आएंगी। अगर आपको अपना ड्रेस नहीं चेंज करवाना तो इसी वक्त यहां से निकल जाइए और दोबारा मेरे केबिन में आने की कोशिश भी मत करना।"

    विशेष ने एक बार फिर सेजल की इंसल्ट कर दी थी। छोटे कपड़ों के अलावा उसने कभी इंडियन ट्राई नहीं किया था साड़ी पहनना तो दूर की बात थी। विशेष ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था जिससे वह तिलमिला गई। उसने गुस्से में आद्या की तरफ देखा और फाइल लेकर वहां से निकल गई। 




13


विशेष ने एक बार फिर सेजल का बड़ी बुरी तरह से इंसल्ट किया था। वह भी फिर से आद्या के सामने। वह विशेष के केबिन से बाहर निकल आई और पलट कर गुस्से से दरवाजे की तरफ देखा। एकदम से उसे एक झटका सा लगा। "आध्या इस केबिन में? विशेष सर ने कहा कि ये आद्या का भी केबिन है। इसका मतलब आद्या का प्रमोशन हो गया है? इतनी जल्दी? ऐसा कैसे हो सकता है। कुछ तो किया है इस लड़की ने वरना ऐसे ही कोई सीईओ के केबिन के अंदर नहीं घुस सकता। यह लड़की ऊपर से जितनी भोली भाली नजर आती है अंदर से उतनी ही तेजतर्रार है। सबके सामने मासूम बनने का ढोंग करती है और अकेले में इसमें ना जाने क्या कुछ किया होगा वरना इतनी जल्दी यहां तक पहुंचना उस जैसी लड़की के लिए नामुमकिन है। इसका पता तो लगाना ही पड़ेगा।"

    सेजल लंबे-लंबे कदमों से अपने डेस्क की तरफ आई और अपनी सीट पर बैठ गई। उसे गुस्से में देख टीम लीडर नितिन ने पूछा, "क्या हुआ सेजल? इतने गुस्से में क्यों हो कुछ हुआ है क्या?"

      सेजल ने तीखी नजर नितिन पर डाली और दांत पीसते हुए बोली, "वो लड़की आद्या! मेरे बाद इस ऑफिस में आई और आज एकदम से अचानक से नए बॉस के आते ही उसका प्रमोशन हो गया? क्या इस बारे में किसी ने भी मुझे बताना जरूरी नहीं समझा?"

    सेजल का गुस्सा देख नितिन बोला, "कम ऑन सेजल! ऐसा कुछ नहीं है। यह बॉस का डिसीजन था और किसे प्रमोट करना है, किसे नहीं, किसे डिमोट करना है यह फैसला हम नहीं ले सकते और ना ही हम उनके फैसले पर कोई उंगली उठा सकते हैं। अब उन्होंने आद्या को चुना तो इसमें हम क्या कर सकते हैं?"

    सेजल को नितिन की बात सुनकर और ज्यादा गुस्सा आ गया। फिर भी खुद को शांत करते हुए बोली, "ऐसा ही अचानक से किसी को प्रमोशन नहीं दिया जा सकता, जब तक की उसकी क्वालिफिकेशन उसका एक्सपीरियंस और उसकी परफॉर्मेंस उस लायक ना हो और अगर प्रमोशन करना ही था तो सीधे असिस्टेंट क्यों, टीम लीडर भी तो बन सकती थी? यह बात तुम्हें थोड़ी अजीब नही लगी?"

   सेजल जिस तरह बोल रही थी, उसकी आवाज सुनकर आसपास के उसके कलीग्स का ध्यान सेजल पर गया और वह लोग भी उसकी बातें सुनने लगे। सेजल आगे बोली, "प्रमोशन एक स्टेप ऊपर होता है, एकदम से इतना नहीं कि कोई भी बॉस के केबिन में घुस जाए। तुम्हें पता है, आद्या का टेबल विशेष सर के केबिन में उनके टेबल के ठीक सामने था। इसका क्या मतलब है? ज्यादा वक्त नहीं हुआ है उसे इस कंपनी में काम करते हुए। उसका परफॉर्मेंस कैसा है हम सब जानते हैं, इसके बावजूद उसे ही प्रमोशन क्यों मिला?"

    एकदम से सेजल की नजर अपने आसपास इकट्ठा लोगों पर गई। उसे एक अच्छा मौका मिल गया था आद्या को बदनाम करने का। उसने बाकी सारे इंप्लाइज को देख कर कहा, "यहां पर कई सारे ऐसे एंपलॉइज् है जो आद्या से ज्यादा काबिल है, उससे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और उससे ज्यादा टैलेंटेड है। इन सब में से तो किसी की सिफारिश नहीं गई तो फिर ऐसा क्या हो गया, ऐसा क्या कर दिया उस लड़की ने?"

     नितिन ने उसे समझाने की कोशिश की और बोला, "सेजल तुम बेवजह बात का बतंगड़ बना रही हो। इस बारे में मेरी खुद मैनेजर सर से बात हुई। उन्होंने बताया कि ये पूरा डिसीजन सिर्फ और सिर्फ विशेष सर का था। ना मेरा ना मैनेजर का इसमें कोई हाथ है और ना ही किसी ने आद्या की सिफारिश लगाई है। जरूर विशेष सर ने कुछ तो उसमें नोटिस किया होगा तभी अपने असिस्टेंट के लिए उसे अप्वॉइंट किया है। अगर हमें कोई सवाल करना है तो वह सीधे विशेष सर से करना होगा लेकिन इतना जान लो, हमारे सवाल करने से अगर वह नाराज हो गए तो हमारी नौकरी गई समझो। तुम खुद सोच लो तुम्हें क्या करना है।"

    वहां मौजूद सभी लोगों की अपनी अपनी अलग-अलग राय थी। कुछ लोग आद्या के दोस्त थे तो कुछ को आद्या से कोई मतलब नहीं था। लेकिन ऐसे एकदम से किसी को प्रमोशन देना यह वाकई में समझ से परे था। अब तो सभी को सेजल की बातों पर थोड़ा-थोड़ा भरोसा होने लगा था लेकिन फिर भी उनके मन में आद्या के लिए थोड़ा तो सॉफ्ट कॉर्नर था। वह लोग अच्छे से जानते थे कि आद्या ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं करती, ना ही आज तक कभी ऐसा हुआ कि उसने कभी किसी कालीग से अपने काम के अलावा कुछ और बात किया हो। फिर भी सेजल की बातों का उन पर असर हो रहा था। 

     इतने में अश्विनी वहां आई और बोली, "आद्या के कैरेक्टर पर उंगली उठाने से पहले तुम अपना कैरेक्टर क्यों नहीं देखती सेजल? तुम्हारा कैरेक्टर कितना गिरा हुआ है यह बात यहां मौजूद किसी को भी बताने की जरूरत नहीं है। माना तुम काफी टाइम से यहां काम कर रही हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम एक बहुत टैलेंटेड एंप्लॉय हो। एक बात तो हर कोई जानता है। तुम इतने टाइम तक इस ऑफिस में टिकी हुई हो तो सिर्फ और सिर्फ अपनी अदाओं और लटके-झटके की वजह से। वही अदाएं जिससे तुमने टीम लीडर को फंसाया और मैनेजर को भी फसाने की पूरी पूरी कोशिश की। लेकिन भला हो हमारे मैनेजर साहब का जो पूरी तरह से ईमानदार है, अपने काम के प्रति भी और अपनी बीवी के प्रति भी। इसलिए तुम्हारी दाल नहीं गली और अब तुम्हारी नजर हमारे नए बॉस पर है। कितनी घटिया हो तुम! आद्या तो उन्हें जानती तक नहीं लेकिन जरूर उन्होंने कुछ सोच समझकर आद्या को चुना होगा तभी वह इस वक्त बॉस की असिस्टेंट बनकर उनके केबिन में है। वो यह पोस्ट डिजर्व् करती है। और एक बात बताओ, तुम बॉस केबिन में क्या करने गई थी जो इतनी बुरी हालत में वहां से लौटी हो? लगता है एक बार फिर इंसल्ट कर दी उन्होंने तुम्हारी। पुअर सेजल! एक बार अपना इंसल्ट करवा कर मन नहीं भरा था तुम्हारा जो फिर से वहाँ चली गई। जरूर विशेष सर ने तुम्हें धक्के मार कर बाहर निकाला होगा तभी इतने गुस्से में हो वरना सिर्फ एक आद्या की वजह से इतना गुस्सा तो आ नहीं सकता। आखिर उस बेचारी की औकात ही क्या है तुम्हारे सामने, है ना सेजल?"

    सेजल गुस्से में चिल्लाई, "अश्विनी! जबान संभाल कर बात करो।"

      अश्विनी भी उसे चुप कराते हुए बोली, "यहाँ लंबी जुबान किसकी है यह सबको पता है। इसलिए मुझे जुबान संभालने के लिए मत ही कहो तो बेहतर होगा।"

    सेजल का दिल किया अभी इसी वक्त अश्विनी की गर्दन दबोच ले।

     इतने सारे इंप्लाइज को काम के समय एक जगह इकट्ठा हुआ देख मैनेजर को कुछ शक हुआ। वो भीड़ के पास पहुंचा और अश्विनी और सेजल को आपस में लड़ते हुए देखा। उसने अपना सर पकड़ लिया और बोला, "क्या हो रहा है यहां पर? इस वक्त ऑफिस टाइम है और आप सब को अपने काम पर होना चाहिए, ना कि यहां पर कोई तमाशा करना चाहिए। हद होती है कामचोरी की। निकलो यहां से सब के सब। अपना अपना काम करो।"

    मैनेजर की फटकार सुनकर सभी अपने अपने डेस्क पर वापस चले आए लेकिन अश्विनी वही खड़ी थी। मैनेजर ने उसे घूर कर देखा तो अश्विनी बोली, "सर सेजल को लगता है आद्या को प्रमोशन देकर आपने और विशेष सर ने बहुत बड़ी गलती की है और यह सब आद्या ने विशेष सर को बहका कर किया है। उसे अपने अदाओं से रिझाया है। जैसे कि हमारी सेजल हमेशा करती है। इन शार्ट, हमारी सेजल का कहना है कि हमारी आद्या एक कैरक्टरलेस लड़की है।क्स

    अश्विनी की बात सुन मैंनेजर ने गुस्से में सेजल की तरफ देखा और बोला, "जो कुछ भी हुआ है वो सिर्फ और सिर्फ बॉस का अपना डिसीजन है। इसमें किसी की कोई दखलअंदाजी नहीं है इसलिए तुम लोग अपना नाक उसमें ना घुसाओ तो बेहतर होगा। आद्या तुम्हारी तरह नहीं है सेजल। इसलिए अपना मुंह बंद रखो तो बेहतर होगा और अपने काम पर ध्यान दो। इतने सालों में तुमने सिवाय टाइम पास करने के और कुछ नहीं किया है। तुम्हारा काम कोई और करता है।" कहते हुए मैनेजर ने तिरछी नजर से नितिन को देखा तो नितिन चुपचाप अपना काम करने लगा और मैंनेजर सेजल को वार्निंग देकर वहाँ से चला गया। 

    अश्विनी भी मुस्कुराते हुए अपने डेस्क पर चली आई। सेजल मन ही मन जलभून गई। 




14


 पूरे दिन भर का काम निपटा कर आद्या ऑफिस से बाहर जाने को हुई तो पीछे से अश्विनी ने उसे पकड़ लिया और बोली, " बस 2 मिनट रुक जा, हो गया मेरा काम"

      आद्या जाकर अश्विनी के बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई जो आज सुबह तक उसकी हुआ करती थी। अश्विनी जल्दी-जल्दी अपना काम निपटाने में लगी हुई थी तब तक एक-एक कर सारे इंजॉय अपना कंप्यूटर सिस्टम ऑफ करके जाने लगे। जब तक अश्विनी का काम खत्म हुआ और उसने अपना सिस्टम आफ किया तब तक एक-दो को छोड़कर बाकी सभी अपने घर के लिए निकल चुके थे। आद्या ने एक नजर विशेष के केबिन की तरफ डाली जो कि खाली था। उसके निकलने से कुछ देर पहले ही विशेष उसकी नजरों के सामने ऑफिस से बाहर निकला था। जिसे देख आद्या ने चैन की सांस ली थी। 

    अश्विनी अपना बैग संभालते हुए खड़ी हुई तो उसने आद्या को विशेष के केबिन की तरफ देखते हुए पाया। उसने उसे कोहनी मारते हुए पूछा, "क्या बात है? थोड़ी ही देर हुई तुझे उस केबिन से निकले हुए और अभी से तो उस केबिन को मिस करने लगी। घबरा मत, कल भी तुझे उसी केबिन में जाना है। अब तो तुझे वही रहना है। कुछ भी बोल, वह केबिन है बड़ा हॉट।"

     आद्या ने उसे घूर कर देखा और बोली, "अंदर एसी चलता है हॉट होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।" कहकर वह बाहर की तरफ निकल गई। अश्विनी उसके पीछे पीछे भागते हुए बोली, "मेरे लिए तो रुक! इतनी भी क्या जल्दी है तुझे?"

    अश्विनी ने जल्दी से जाकर आद्या की बांह पकड़ ली और बोली, "सच सच बता, तुझे अपना नया बॉस बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा?"

    आद्या खुद परेशान थी। वह किसी को भी उसके चेहरे और पहनावे से जज नहीं करती थी। इंसान का अच्छा होना ही उसके लिए खूबसूरती के मायने थे। उसने कंफ्यूज होते हुए कहा, "पता नहीं यार! एक पल को लगता है जैसे वह एक अच्छा इंसान है लेकिन पता नहीं क्यों, मेरा सिक्स्थ सेंस कहता है कि मुझे उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।"

    अश्विनी अपना सर पकड़ते हुए बोली, "जब से तेरे साथ वह हादसा हुआ है तूने किसी पर भरोसा करना ही छोड़ दिया है। अपने अलावा तुझे किसी पर भरोसा नहीं है। हाँ एक तु मुझ पर भरोसा करती है क्योंकि मैं तेरी दोस्त हूं, पक्की वाली दोस्त। लेकिन आद्या! ऐसा कब तक चलेगा? अपनी लाइफ में तुझे आगे बढ़ना होगा। किसी ना किसी पर भरोसा करना होगा। हर किसी को अपनी लाइफ में एक पार्टनर की जरूरत होती है। एक ऐसा पार्टनर जिस पर हम भरोसा कर सके, जिस पर हम पूरी तरह लापरवाह हो सके। हर किसी की लाइफ में कोई ना कोई ऐसा जरूर होता है।  तु देखना तेरी लाइफ में भी वो बहुत जल्द आएगा। भगवान इतने भी बेरहम नहीं है कि मेरी आद्या के लिए एक अच्छा सा जीवनसाथी ना भेजें! तू देख लेना।"

    दोनों सहेलियां आपस में बातें करते हुए पार्किंग तक चली आई। आद्या ने कहा, "चल मैं तुझे तेरे घर छोड़ दूं।"

   अश्विनी बोली, "नहीं तु रहने दे। तुझे मेहता अंकल के घर जाना है। तू जा, मैं यहां से ऑटो ले लूंगी।"

    उसी वक्त एक गाड़ी पार्किंग से बाहर निकलने को हुई लेकिन उन दोनों के सामने जाकर रुकी और उस गाड़ी का शीशा नीचे करते हुए विशेष ने आवाज दी, "तुम दोनों चाहो तो मैं तुम दोनों को घर छोड़ सकता हूं।"

    अश्विनी विशेष का ऑफर सुनकर खुश हो गई लेकिन आद्या ने मुड़कर विशेष की तरफ देखा और बोली, "थैंक यू सो मच सर। लेकिन अगर आपको याद हो तो मेरे पास मेरी स्कूटी है, मैं उससे चली जाऊंगी और वैसे भी आज मैंने आपकी ड्राइविंग देखी है। मुझे अपनी जान बहुत प्यारी है इसलिए यह ऑफर आप मुझे मत दीजिए।"

    आद्या बिना विशेष का रिएक्शन देखें अपनी स्कूटी पर बैठी और वहां से निकल गई। अश्विनी मन ही मन सोंची, " तु कितनी बोरिंग हो गई है आद्या! एकदम अकडु टाइप।"

     आद्या को इस तरह उसे इग्नोर कर जाते हुए देश विशेष का मन झल्ला गया। उसने खुद से कहा, "ये लड़की जितनी मासूम है उतनी ही अकड़ भी है इसमें। इसके करीब पहुंचना बहुत ज्यादा मुश्किल होगा। लेकिन कुछ भी करके मुझे अपना काम खत्म करना है ताकि मैं यहां से वापस जा सकूं। वैसे यह जगह इतनी बुरी भी नहीं है लेकिन इस लड़की के साथ जो होने वाला है उसके बाद मुझे यहां रहना ठीक नहीं लगता। प्रॉब्लम यह है कि मैं इस लड़की के करीब कैसे जाऊं? इसके बारे में किससे हेल्प मांगू?"

    तभी उसकी नजर अपने सामने खड़ी अश्विनी पर गयी। उसने फिर सोचा, "किसी लड़की के करीब पहुंचने के लिए उसकी सहेली से अच्छा चारा कोई और नहीं हो सकता। अपने प्लान को अंजाम देने में मुझे इस लड़की की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ेगी।"

     अश्विनी आद्या को बस जाते हुए देख रही थी तभी पीछे से उसे विशेष की आवाज सुनाई दी। उसने मुड़कर देखा तो विशेष पूछा, "आपको अगर चलना है तो आप बैठ सकती है वरना मुझे निकलना है।"

     विशेष की बात सुनकर अश्विनी एकदम से हड़बड़ा गई और भागते हुए दूसरी तरफ से दरवाजा खोलकर अंदर गाड़ी में बैठ गई। अपना सीट बेल्ट लगाते हुए उसने कहा, "थैंक यू सो मच सर। मतलब मुझे यकीन नहीं होता कि आपने मुझे लिफ्ट ऑफर किया। मेरा मतलब आप ने हम दोनों को लिफ्ट ऑफर किया लेकिन.......... कहते हुए उसने उस तरफ देखा जिधर से आद्या निकली थी। विशेष मुस्कुरा दिया और गाड़ी स्टार्ट कर आगे निकल गया। 

      अश्विनी उसे रास्ता बता रही थी और वह उसी डायरेक्शन में गाड़ी घुमा रहा था। इतनी देर में अश्विनी लगातार बोले जा रही थी। विशेष उसकी बातों से पक चुका था। उसने मन ही मन सोचा, "किस मुसीबत को ले आया मैं अपने साथ। क्या कुछ नहीं करना पड़ रहा मुझे। ना जाने कौन सी मनहूस घड़ी में मैंने यहां आने का डिसाइड किया था। अच्छा भला जॉब कर रहा था। अगर कुछ दिन और इसके बकवास सुनी तो मैं पागल हो जाऊंगा। इससे अपने काम की बात निकलवानी ही होगी।" सोचते हुए उसने एकदम से अश्विनी से सवाल किया, "मिस् जोशी और आप काफी टाइम से फ्रेंड है ना? मतलब जितनी अच्छी बॉन्डिंग मैंने आप दोनों की देखी है उतनी अच्छी किसी और के साथ नहीं देखा मैंने।"

     अश्विनी मुस्कुरा कर बोली, "स्कूल से एक साथ है। बचपन से नहीं लेकिन मैं उसकी इकलौती दोस्त हूं।"

  विशेष बोला, "आपकी दोस्त कुछ ज्यादा ही खड़ूस टाइप नहीं है? मतलब मिस् जोशी हमेशा से ऐसी है या फिर कुछ हुआ था?"

    विशेष की बात सुनते ही अश्विनी के चेहरे पर जो मुस्कुराहट थी वह एकदम से गायब हो गई और उसकी जगह एक उदासी ने ले लिया। उसने कहा, "आद्या कभी ऐसी नहीं थी। हमेशा मुस्कुराने वाली सबको हंसाने वाली लड़की थी। उसे लाइफ में कभी सीरियस होना आया ही नहीं क्योंकि उसे कभी जरूरत ही नहीं थी। अपने मां पापा की लाडली इकलौती बेटी थी इसलिए कभी किसी जिम्मेदारी का बोझ उस पर नहीं पड़ा। हमेशा अपना बचपन को ही जीती रही। रोना कभी उसे आया ही नहीं लेकिन किस्मत कब पलट जाए कोई नहीं कह सकता। आद्या के साथ भी वही हुआ। एक हादसे में आद्या की जान तो बच गई लेकिन उसके मम्मी पापा चल बसे उसके बाद से ही आद्या ने एक चुप्पी ओढ़ ली। मुस्कुराहट तो जेसे उसकी जिंदगी से ही बहुत दूर चली गई, हंसना तो भूल ही जाओ। अपने मम्मी पापा के रहते वह कभी अपने बचपन से बाहर नहीं निकली और एकदम से उसके ऊपर अपनी जिम्मेदारी आ गई। जिन पर भरोसा था उन अपनों ने भी ऐसा रंग बदला की गिरगिट भी शर्मा जाए। जो दोस्त हमेशा उसके आगे पीछे घूमते थे अब तो उन्हें उसका नाम तक नहीं पता। उसने बड़ी मुश्किल से खुद को संभालना है। यह मैंने देखा है, किस हद तक उसने अपना मेंटल स्ट्रेस झेला है यह मैं अच्छे से जानती हूं। चाहे कुछ भी हो जाए मैं उसका साथ नहीं छोड़ सकती। अगर वह मुझ पर हाथ भी उठा देती है तब भी मुझे इसका बुरा नहीं लगेगा क्योंकि मैं जानती हूं मेरी दोस्त कैसी है। वह अगर गुस्से में कुछ कह दे तो प्लीज आप इसका बुरा मत मानियेगा। आद्या ने इतनी कम उम्र में इतना कुछ देखा है की उसकी जगह कोई और होता तो जिंदगी से हार मान चुका होता। लेकिन अभी उसे बहुत सारे काम करने हैं और मैं हूं उसके साथ। सर आप यही गाड़ी रोक दीजिए। यहां से अंदर गली में कार नहीं जा पाएगी, मैं पैदल चली जाऊंगी।"

    विशेष ने गाड़ी रोकी और उसे थैंक्स बोलकर अश्विनी अपने घर की तरफ चल दी। 






15 


आद्या जैसे ही मेहता अंकल के घर पहुंची, मेहता अंकल दरवाजे पर ही खड़े मिल गए। आद्या को देखते ही वह मुस्कुरा कर बोले, "बहुत दिनों के बाद देख रहा हूं। अंदर चलो तुम्हारी आंटी काफी देर से तुम्हारा इंतजार कर रही है।"

    आद्या बोली, "क्या अंकल! कुछ दिन पहले ही तो मैं आपके ऑफिस आई थी।"

      मेहता जी बोले, "ऑफिस में तुम मेरी क्लाइंट बन कर आती हो, घर पर बेटी बनकर आई हो। और मेरी बेटी बहुत दिनों के बाद मेरे घर पर आई है। अब जल्दी से अंदर चलो वरना तुम्हारी आंटी मुझे एक भी पकौड़े खाने नहीं देगी। कब से तुम्हारे आने का रास्ता देख रही है। मैंने कहा मुझे थोड़ी चाय और पकोड़े दे दो लेकिन एकदम से मना कर दिया और  बोली पहले तुम्हारे लिए है। अब चलो जल्दी।" कहते हुए मेहता जी ने साइड होकर आद्या के लिए रास्ता बनाया। 

   आद्या थोड़ा हीचकते हुए अंदर की तरफ दाखिल हुई। यह कोई पहली बार नहीं था जब वह इस घर में आ रही थी लेकिन उस एक हादसे ने आद्या को इतनी बुरी तरह से तोड़ दिया था कि किसी पर भी भरोसा करना उसके लिए बहुत मुश्किल था। इस घर में भी उसे बहुत प्यार मिला था जैसे बाकी रिश्तेदारों से लेकिन जिस तरह सब के सब मुंह मोड़ कर चले गए, आद्या को हमेशा लगता कि एक दिन यह रिश्ता भी टूट जाएगा। 

     धीमी कदमों से वह घर के अंदर दाखिल हुई तो मेहता जी ने आवाज लगाई, "कहां हो भाग्यवान! लो आ गई हमारी बिट्टू!"

    मेहता अंकल बचपन से आद्या को इसी नाम से बुलाते थे। उनकी आवाज सुनते ही है मेहता आंटी अपनी साड़ी के पल्लू में हाथ पोंछते हुए किचन से बाहर निकली। आद्या को अपने सामने देखकर उनकी आंखें भर आई। बचपन से ही उन्होंने आद्या को अपनी गोद में खिलाया था। उसके चेहरे पर हमेशा मासूमियत देखी थी उन्होंने लेकिन उनके सामने इस वक्त जो आद्या खड़ी थी उसके चेहरे पर जरा सी भी रौनक नहीं थी। वह मासूमियत तो जैसे बहुत पहले खत्म हो गई थी। अपनी आंखों के किनारे को पोंछते हुए उन्होंने आद्या को गले लगा लिया और बोली, "इतना भी क्या खुद को व्यस्त कर लेना कि हमारी याद ही ना आए। सबसे नाराज हो लेकिन इस सब में हमारी क्या गलती? हमारा भी तो मन करता है कि हमारी बिट्टू पहले की तरह इस घर में उछल कूद मचाए।"

     आद्या उनसे अलग होते हुए बोली, "वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता है आंटी। सब कुछ बदल जाता है, सब कुछ। घर परिवार के लोग, नाते रिश्तेदार, दोस्त, लोग, वक्त, हालात, किस्मत तक बदल जाती है। इंसान की फितरत तो गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलती है ऐसे में हम कर ही क्या सकते हैं।"

     मेहता आंटी आद्या के मन की कड़वाहट को बखूबी समझ रही थी।  वो इस बारे में चाहे कुछ भी कहती लेकिन उनका अपना ही मन मानने को तैयार नहीं होता तो फिर आद्या को कैसे समझाती। चाहे जो भी हुआ हो आद्या आज भी उनके लिए बेटी की तरह ही थी। उन्होंने आद्या को बैठाया और बोली मैं तुम्हारे लिए जल्दी से चाय पकोड़े और कुछ नाश्ता लेकर आती हूं और आज का खाना तुम हमारे घर से खाकर जाओगी। आज सब कुछ तुम्हारी पसंद का बनेगा। ना नहीं कहोगी तुम, बिल्कुल भी नहीं।" 

      मेहता आंटी के चेहरे पर जो खुशी थी उन्हें देख आद्या से कुछ कहा नहीं गया। उसने चुपचाप हां में सिर हिला दिया। मेहता आंटी किचन में जाकर जल्दी से आद्या के लिए बहुत सारी खाने की चीजें ले आई। तब तक मेहता अंकल भी आद्या के पास बैठ चुके थे। आद्या उनसे केस के बारे में पूछना चाह रही थी लेकिन तब तक उसके सामने खाने की बहुत सारी चीजें परोसी जा चुकी थी और साथ में मेहता आंटी की हिदायत भी कि खाने के टाइम कोई बातचीत नहीं। ऑफिस का जो भी काम हो आप लोग बाद में करते रहना।"

    उनकी बात सुनकर मेहता जी ने अपने हाथ खड़े कर दिए। आद्या उनका विरोध नहीं कर सकती थी। 


     अश्विनी को उसके घर के पास ड्रॉप करके विशेष अपने घर लौट आया। वैसे तो यह घर मिस्टर कपूर का था और वह इतने बड़े घर में अकेले रहना नहीं चाहता था लेकिन मिस्टर कपूर का बेटा जोकि विशेष का दोस्त ही था उसकी वजह से विशेष को वहां रुकना पड़ा था। उसने एक नजर चारों दौड़ाई, घर वाकई में काफी शानदार था और वह खुद भी इस प्लान का हिस्सा बनने के लिए बेचैन था लेकिन उसने नहीं सोचा था यहां आकर उसका मन इस कदर बेचैन हो जाएगा। मिस्टर कपूर ने उसे जो कुछ भी कहा था और जो कुछ भी उसने आद्या के बारे में जाना था समझा था, उससे यही लग रहा था कि मिस्टर कपूर आद्या के साथ ज्यादती कर रहे हैं। लेकिन वह इस बारे में कुछ कर नहीं सकता था क्योंकि उसका पूरा परिवार मिस्टर कपूर के निगरानी में था और उनका वफादार भी। 

     विशेष चाह कर भी इस प्लान को बीच में रोक नहीं सकता था। बस उसे आद्या के लिए बुरा लग रहा था। यह सब सोचते हुए वह पास ही पड़े सोफे पर बैठ गया। उसका सर इस वक्त भारी लग रहा था। काफी देर से वह इन्हीं सारी ख्यालों में उलझा हुआ था उसी वक्त उसका फोन बजा। स्क्रीन पर नंबर देख कर उसके होठों पर मुस्कान आ गई। फोन उठाते ही उसने कहा, "कहां है तू भाई? पता है कब से तेरे कॉल का इंतजार कर रहा था लेकिन तू है कि इतना बिजी है। एक बार भी मेरी याद नहीं आई ना।"

      दूसरी तरफ से एक बेहद खूबसूरत आवाज आई, "तुझे याद नहीं करूंगा तो किसी याद करूंगा मेरी जान! आखिर मेरी गर्लफ्रेंड है तू, तेरे बिना दिल थोड़ी लगता है मेरा।"

     विशेष को यह आवाज हमेशा से बहुत पसंद थी। किसी दवा की तरह काम करती थी और वाकई में वह आवाज किसी नॉर्मल इंडियन की आवाज से थोड़ी अलग थी। उसकी आवाज से कोई भी कह सकता था कि यह इंसान इंडिया में कभी नहीं रहा या फिर बहुत कम रहा है। यही वजह थी कि उसे हिंदी बोलने में थोड़ी दिक्कत होती थी। विशेष हंस पड़ा और बोला, "तेरे पीछे लड़कियों की लाइन लगी है। तेरी एक अनऑफिशियल गर्लफ्रेंड भी है इसके बावजूद तु मुझे अपनी गर्लफ्रेंड कहता है। मलिश्का तुझे जान से मार डालेगी।"

     दूसरी तरफ मौजूद वह शख्स हंसते हुए बोला, "मलिश्का से अगर मेरी शादी भी हो जाए ना तब भी तू ही मेरी गर्लफ्रेंड रहेगा। और उसे मुझे तेरे साथ शेयर करना ही पड़ेगा। तु भाई है मेरा, वैसे तेरी आवाज इतनी बुझी हुई क्यों लग रही है? आई मीन व्हाट रॉन्ग? थोड़ा लो साउंड कर रहा है। कुछ हुआ है क्या? आज तो तेरा पहला दिन था ना, कैसा जा रहा है सब कुछ?"

     विशेष बोला, "सब कुछ वैसा ही जा रहा है भाई जैसा सर चाहते हैं लेकिन सच कहूं तो उस लड़की को देखकर अजीब सी फीलिंग आ रही है जैसे हम बहुत गलत कर रहे हैं उसके साथ। पता नहीं क्यों लेकिन मुझे यह सब कुछ अच्छा नहीं लग रहा।"

     दूसरी तरफ से आवाज आई, "तु कुछ ज्यादा सोच रहा है भाई। डैड  का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। हम जो भी कर रहे हैं और वह सब डैड के लिए कर रहे हैं। उन्होंने हमारे लिए इतना कुछ किया है तो कम से कम इतना करना तो बनता है ना कि हम उनके लिए कुछ करें। राइट ऑर रॉन्ग, आई डोंट नो। मुझे सिर्फ इतना पता है कि यह प्रोजेक्ट डैड के लिए हमारी तरफ से गिफ्ट होगा और इस गिफ्ट के बदले हम जो चाहे उनसे मांग सकते हैं। तुम जो चाहो मांग सकते हो, वह भी बिना किसी हेसिटेशन के। समझ गया? अब ज्यादा टेंशन मत लो। हां अगर अब तुम्हारे दिल में उसके लिए कोई फीलिंग हो तो बताओ, मैं अपनी भाभी से मिलने जरूर आऊंगा।"

     विशेष एकदम से चौंक पड़ा और बोला, "भाभी? कौन भाभी? तु किसकी बात कर रहा है भाई? ऐसा वैसा कुछ नहीं है। वो लड़की अकेली है सिंपल है, कोई नहीं है उसके आसपास और ऊपर से हम भी उसके साथ यह सब कुछ कर रहे हैं बस इसलिए बुरा लग रहा है। वह सब छोड़ो मुझे थोड़ा ऑफिस का काम निपटाना है मैं तुझे बाद में कॉल करता हूं।"  कहते हुए विशेष ने फोन रख दिया। आज पहली बार उसने झूठ बोलकर अपने दोस्त का फोन काटा था। 





16



 विशेष आंखें बंद कर सोफे पर लेटा हुआ था। कुछ देर में ही घर में काम करने वाली एक मेड ने आकर उसके सामने पानी और कॉफी का मग रखा और बोली, "रात के खाने में क्या खाएंगे आप?"

      विशेष अलसाए मन से बोला, "कुछ भी बना दो आप। जो घर में है, जो आपका दिल करे, कुछ भी।" कहकर वह उठा, टेबल पर से अपना फोन लिया और कमरे में चला गया। आज एक ही दिन में इतना कुछ हुआ था कि उसका दिमाग इन्हीं सब बातों में उलझा हुआ था। इसी सब चक्कर में उसने अपने भाई जैसे दोस्त को झूठ बोलकर फोन काट दिया था। इस वजह से उसे और भी ज्यादा झुंझलाहट हो रही थी। उसने फोन को बिस्तर पर फेंका और खुद भी जाकर औंधे मुंह बिस्तर पर गिर गया। उसका फोन एक बार फिर बजा इस बार एक मैसेज का नोटिफिकेशन था वह भी उसके उसी दोस्त की तरफ से। 

    विशेष ने मैसेज खोला और पढ़ना शुरू किया, "भाई मैं समझ रहा हूं तुम्हें कैसा लग रहा है लेकिन हम उसके साथ कुछ गलत नहीं कर रहे। उस लड़की के फैमिली के साथ जो हुआ वह सिर्फ एक एक्सीडेंट था लेकिन इसके बावजूद वो सारा ब्लेम डैड पर डालना चाहती है। हम तो फिर भी उसके साथ काफी अच्छे से पेश आ रहे हैं। तू अपने मन पर कोई बोझ मत ले। मुझे डैड पर पूरा भरोसा है। वह जो भी करेंगे सही करेंगे। मैंने अपने डैड को कभी भी अपने किसी डिसिशन पर रिग्रेट करते नहीं देखा और ना ही कभी उन्हें किसी को सॉरी बोलते हुए देखा है। उन्होंने जितने प्यार से मुझे रखा उतना ही प्यार तुम्हें भी दिया है। इसलिए हम दोस्त कम भाई ज्यादा है और तू तो मेरी जान है। इसीलिए इतना कुछ सोचना बंद कर दे और एक बात खासकर ध्यान रखना। जिस काम के लिए तु गया है उस काम में हमेशा अपने दिमाग से सोचना और अपने दिल को कंट्रोल में रखना। मानता हूं वह लड़की बहुत अच्छी होगी लेकिन जब उसे सारा सच पता चलेगा तो वो कभी तेरी करीब नहीं आना चाहेगी। नफरत करेगी वह तुझसे इसीलिए  ये मेरी एडवांस है, गलती से भी उस लड़की से प्यार मत कर बैठना वरना जितनी तकलीफ उस लड़की को होगी, उससे कहीं ज्यादा पेन तुझे होगा। सो बी केयरफुल। दिल लगाने के लिए मैं तेरे सामने लड़कियों की लाइन लगा दूंगा। कुछ दिनों में मैं इंडिया आ रहा हूं। सबसे पहले तुझे ही मिलने आऊंगा। वैसे भी मुझे देखना है जिस लड़की के बारे में मेरा भाई इतना सोच रहा है वह आखिर दिखती कैसी है!" उसके बाद दो-तीन इमोजीज थे। 

    विशेष उस मैसेज को पढ़ कर मुस्कुरा दिया और खुद से बोला, "तुझे कैसे बताऊं उन्होंने क्या-क्या किया है। अपने पापा को तू अपना आदर्श मानता है ना! जिस दिन तेरा यह भ्रम टूटेगा उस दिन पता नहीं तू किस तरह रिएक्ट करेगा।  उसने अपना फोन बंद कर साइड में रख दिया। कुछ देर छत निहारने के बाद वह उठा और बाथरूम में फ्रेश होने चला गया। 


   आद्या मेहता अंकल और आंटी के साथ बैठकर कुछ देर बातें करती रही। उसके बाद मेहता आंटी सारे बर्तन समेट कर किचन में चली गई। आद्या भी उनके पीछे कुछ बर्तनों को हाथ में लिए किचन में गई। मेहता आंटी ने रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी थी। आद्या भी कुछ देर उनके साथ उनका हाथ बटाने लगी। मेहता आंटी की खुशी को देखकर वह यह भूल ही गई थी कि आखिर वह यहां किस काम से आई थी। कुछ देर बाद मेहता आंटी ने खुद से उसे रोका और बोली, "तुम जाकर अपने अंकल के साथ बैठो। कुछ बात करनी थी उन्हें तुमसे। जाओ तुम, तब तक मैं यहां पर सारे काम निपटा लेती हूं। आदत है मुझे।"

    आद्या को अभी कुछ देर और वहां पर उनका हाथ बटाने का मन था लेकिन केस के सिलसिले में बात करना भी जरूरी था इसलिए वह किचन से चली आई और हाथ पोंछते हुए मेहता अंकल को पूरे घर में ढूंढने लगी। तभी किचन से मेहता आंटी की आवाज सुनाई दी, "आद्या बेटा! तुम्हारे अंकल इस वक्त अपने स्टडी रूम में होंगे।"

    उनकी बात सुनकर आद्या स्टडी रूम की तरफ चली गई। स्टडी रूम का दरवाजा खुला हुआ था। आद्या ने अंदर झांक कर देखा तो वहां मेहता अंकल को आंखों पर चश्मा चढ़ाए किसी फाइल में डूबे हुए पाया। उसने दरवाजे पर नॉक करने के लिए जैसे ही हाथ उठाया, मेहता अंकल ने बिना उसकी तरफ देखें कहा, "तुम अंदर आ सकती हो बेटा। यह भी तुम्हारा ही घर है।" 

     आद्या का हाथ हवा में ही रह गया। वह धीरे से स्टडी रूम के अंदर गई और मेहता अंकल के  कहने पर सामने वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गई। मेहता अंकल कुछ देर तक वैसे ही फाइल में कुछ देखते रहे और आद्या शांति से बैठी हुई थी। मेहता अंकल ने फाइल बंद की और आद्या से बोले, "बेटा पुलिस ने तो इस केस को ओपन एंड शट केस बता कर बंद कर दिया। ज्यादा छानबीन नहीं की उन्होंने। फिर से अगर हमें इस केस की फाइल को खुलवानी है तो सबसे पहले हमें अपने केस को स्ट्रांग बनाना होगा। कुछ ऐसे सबूत लाने होंगे जिससे हम इस केस को फिर से खुलवाने में कामयाब हो सके। जहां तक मैंने जाना है, तुम्हारे पापा का ऐसे किसी से भी किसी तरह की कोई अनबन नहीं थी। सीधे-सीधे मिस्टर कपूर का इसमें इनवॉल होने का कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसे में हम सीधे तौर पर उन पर हाथ नहीं डाल सकते। जहां तक तुम्हारे शक की बात है, हो सकता है तुम्हारे पापा को अपने बॉस की कोई सच्चाई पता चल गई हो या फिर यह भी तो हो सकता है कि तुम्हारे पापा के पास कोई ऐसी चीज हो जिस पर मिस्टर कपूर की नजर हो, लेकिन तुम्हारे पापा उन्हें देना ना चाहते हो।"

    आद्या बोली, "ऐसा क्या हो सकता है उनका? मेरे पापा के लिए मम्मी, मैं, हमारा घर और उनकी प्यारी कार। बस यही मायने रखते थे वरना पैसों से कभी मोह नहीं रहा उन्हें, ना ही किसी और चीज से कोई लगाव रहा। सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते थे और मुझसे भी ज्यादा मम्मी को। ऐसे में कुछ और क्या हो सकता है?"

    मेहताजी बोले, "अच्छा उन दिनों में क्या तुमने अपने पापा के बिहेवियर में कोई चेंज देखा था? मतलब कोई परेशानी या फिर तुम्हारे मम्मी पापा के बीच सब कुछ ठीक था? मेरा मतलब अगर कोई टेंशन होता तो तुम्हारे मम्मी और पापा दोनों को पता होता था। क्या तुमने कभी उन दोनों को अजीब तरह से हरकतें करते देखा है। जैसे वो दोनो किसी टॉपिक पर बात कर रहे हो और अचानक तुम्हें देखकर चुप हो गए हो!" 

    आद्या ने इनकार करते हुए कहा, "ऐसा कुछ नहीं है अंकल। जहां तक मैं जानती हूं मैंने कभी उन दोनों को परेशान नहीं देखा। पापा ने कभी ऑफिस के काम का बोझ अपने ऊपर नही पड़ने दिया। चाहे कितने भी बिजी हो हमेशा मुस्कुराते रहना और मम्मी को हमेशा छोड़ देना उनका सबसे पसंदीदा काम था।"

     मेहता अंकल कुर्सी से पीठ लगाते हुए बोले, "एक बार तुम अपने घर की अच्छी तरीके से तलाशी लो। हो सकता है कुछ ना कुछ हमें ऐसा जरूर मिलेगा जो हमें चाहिए। और कुछ नहीं तो अपने मम्मी पापा का कमरा बहुत बारीकी से चेक करना। हो सकता है हमें कुछ तो सुराग मिले। मैं अपने तरीके से पूरी कोशिश कर रहा हूं।"

    अचानक से आद्या कुछ याद आया और उसने कहा, "अंकल! हमारे आस पास की जो जमीन है वह एकदम से कोई खरीद रहा है। तीन चार घर तो ऐसे हैं जिन्होंने यहां से शिफ्ट भी कर लिया है। कुछ घर हमारे दाएं तरफ से तो कुछ बाएं तरफ और अगर मैं गलत नहीं हूं तो इन सब का खरीदार एक ही इंसान है। आद्या की बात सुनकर मेहता अंकल के सर पर बल पड़ गया। उन्होंने कहा, "तुम इस बारे में जितना डिटेल पता कर सकती हो, मुझे भेजना। मैं एक बार इस लिंक को मिस्टर कपूर के साथ जोड़ कर देखता हूं, शायद कुछ मिले।"

    इतनी देर में मेहता आंटी की आवाज सुनाई दी जो उन दोनों को डिनर के लिए बुला रही थी।"







17 


मेहता आंटी ने खास तौर पर आद्या के लिए उसकी पसंद की लगभग सारी डिशेज बनाई थी। एक अरसे बाद आद्या के सामने उसकी पसंद का इतना सारा खाना था। मेहता अंकल ने प्यार से उसके सर पर हाथ रखा और बोले, "खाने के समय ना कुछ बोला जाता है ना कुछ सोचा जाता है। ऐसे अन्न का अपमान होता है। इसीलिए दिमाग में जो भी सारी बातें हैं उसको अपने दिमाग से कुछ वक्त के लिए निकाल दो। शुद्ध मन शांत चित्त से ही भोजन शरीर को लगता है वरना तो हम सिर्फ जीने के लिए खाते हैं।"

    आद्या आंखें बंद कर ली और एक लंबी सांस लेकर आंखें खोली तो अपने दोनों तरफ मेहता अंकल और आंटी को अपने पास पाया। आंटी ने बड़े प्यार से आद्या के थाली में खाना परोसा। आद्या भी उतने ही प्यार से सबके साथ खाने लगी। अपनी आंखों के सामने उसे वह पल नजर आने लगे जब वह ऐसे ही अपने मम्मी पापा के साथ बैठकर खाती थी। कुछ साल पहले तक एक खुशहाल परिवार था उसका और अब उस घर में गहरे सन्नाटे का डेरा है, यह सोचकर ही आद्या की आंखें नम हो गई। 

    मेहता अंकल ने एक बार फिर उसके सर पर हाथ रखा और बोले, "मैंने कहा था ना बेटा! कोई भी बात हो उसे अपने दिमाग से निकाल दो और सिर्फ खाने पर ध्यान दो। तुम्हें बहुत से काम करने हैं। बहुत बड़ी जिम्मेदारी है तुम्हारे ऊपर। अकेले तुम्हें खुद को संभाल कर रखना है और बचा कर भी। तुम्हारे पापा मेरे दोस्त नहीं थी बल्कि भाई से भी बढ़कर थे। उसके बाद तुम हमारी जिम्मेदारी हो लेकिन हम अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पा रहे हैं। पता नहीं तुम्हारे पापा को मैं क्या मुंह दिखाऊंगा?"

     आद्या बोली, "अंकल! आप ऐसे ही मेरे लिए बहुत कुछ कर रहे हैं और उनके लिए भी। वह आपसे बिल्कुल भी नाराज नहीं होंगे क्योंकि मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है। इस एक घर के अलावा कोई और ऐसी जगह नहीं है जिसे मैं अपना समझ कर अपना मन बहलाने जा सकूं। लेकिन क्या करूं, काम और केस के चक्कर में इस तरह उलझ गई हूं कि मेरा यहां आना भी नहीं बन पाता। इस के लिए मुझे माफ कर दीजिएगा। लेकिन मैं सच में यहां आना चाहती हूं। वक्त मिला तो जरूर आऊंगी, पूरी कोशिश करूंगी।"   

     मेहता आंटी उन दोनों को बीच में टोकते हुए बोली, "मेहता साहब! आपने कहा कि खाते समय ना कुछ सोचते हैं ना कुछ बोलते हैं। लेकिन आप दोनों ही है जो कबसे बातें किए जा रहे हैं। अब क्या यह सारा खाना मैं खाऊंगी? इतने वक्त बाद बच्ची घर आई है और इस तरह आप उसे इमोशनल नहीं कर सकते। आद्या बेटा! यह घर भी तुम्हारा है हम भी तुम्हारे हैं। हम तो हमेशा से चाहते थे तुम हमारे घर आ जाओ, वह भी हमेशा हमेशा के लिए। लेकिन इस बारे में हम भाई साहब से कुछ कह ही नहीं पाए। सोचा था कहेंगे लेकिन.........!"

     आद्या समझ गई फिर मेहता आंटी क्या कहना चाह रही है। उनका साफ साफ इशारा था कि वह अपने बेटे के लिए आद्या का रिश्ता चाहती थी। पहले की बात कुछ और थी लेकिन अब अगर यह रिश्ता जुड़ा तो लोग तरह-तरह की बातें बनाएंगे और यह बात आद्या अच्छे से जानती थी इसलिए उसने मेहता आंटी को बीच में ही रोका और बोली, "आंटी! अब आप भी बातें कर रही हैं? इसलिए अब कोई बात नहीं करेगा हम सब अपना खाना खत्म करेंगे।"

   आद्या की बात सुनकर दोनों मुस्कुरा दिए और खाना खाने लगे। खाना खत्म कर आद्या ने मेहता आंटी के साथ मिलकर बर्तन समेटि और आंटी के लाख मना करने के बावजूद आद्या नहीं मानी और सारे बर्तन ले जाकर उसने बेसिन में डाल दिए। उसके बाद आद्या ने अपना बैग उठाया और मेहता आंटी के पैर छूकर वहां से जाने को हुई तो मेहता अंकल बोले, "चलो मैं तुम्हें बाहर तक छोड़ देता हूं।"

    मेहता आंटी समझ गई कि उन दोनों को कुछ बात करनी है इसीलिए वह अपने किचन में लग गई और मेहता अंकल आद्या के साथ चल दिए। दरवाजे पर पहुंचकर मेहता अंकल बोले, "आद्या बेटा! जहां तक मुझे याद आ रहा है तकरीबन 4 साल पहले भी किसी रियल स्टेट एजेंसी ने उस पूरे एरिया को खरीदने का ऑफर दिया था। एक बिल्डर वहाँ कोई शॉपिंग मॉल खड़ा करना चाहते थे। हालांकि वह पूरा एरिया अच्छी तरह से डिवेलप नहीं हुआ है लेकिन फिर भी वह शहर के अंदर एक अच्छे खासे जगह पर है। पुश्तैनी जमीन होने के कारण वहाँ के लोगों ने अपना जमीन बेचने से इंकार कर दिया था। बस कुछ ही लोग ऐसे थे जिन्होंने उस ऑफर को एक्सेप्ट किया था और वो लोग अपनी जमीन की अच्छी खासी कीमत लेकर वहां से चले गए। तुम्हारे पापा और तकरीबन 50 मीटर के रेडियस में मौजूद लोगों ने अपना जमीन देने से इनकार कर दिया था, वह भी अच्छी खासी रकम के बावजूद। इस सब में सबसे बड़ा हाथ तुम्हारे पापा का था। उनके कहने पर ही वहां के लोगों ने अपना फैसला बदला था और अपनी जमीन नहीं छोड़ी थी। देखा जाए तो यह भी एक वजह हो सकती थी लेकिन बाद में पता चला था कि जोशी के एक्सीडेंट से काफी पहले ही वह रियल स्टेट एजेंसी और वो बिल्डर, दोनो ही दिवालिया हो गए और जो भी जमीन उनके पास थी वह सारे नीलाम हो गए। ऐसे में उन लोगों के हाथ होने का कोई सवाल नहीं लेकिन जैसा कि अभी तुमने बताया एक बार फिर कुछ लोगों ने, वह भी तुम्हारे अगल-बगल के ही लोगों ने अपना जमीन बेचा है वह भी एक ही बिल्डर को, ऐसे में मेरा इस बारे में जानना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। तुम जितनी जल्दी हो सके उस बिल्डर का पता लगाओ। देखता हूं कहीं से कुछ तो लिंक मिलेगा।"

    मेहता अंकल की बात सुनकर आद्या सोच में पड़ गयी। वह इस बात को लगभग भूल ही गई थी। उस बीच उसने अपने पापा को कई दफा देर रात सोसाइटी की मीटिंग में जाते देखा था और इस बारे में उसकी मम्मी से भी बात हुई थी। आद्या को भी थोड़ा शक हुआ। "हो सकता है शायद यह सारी बातें दूसरे से जुड़ी हुई हो।" यही सोचकर उसने कहा, "आप चिंता मत कीजिए अंकल। कल शनिवार है, मैं पूरी कोशिश करती हूं की आपको जल्द से जल्द सारी इनफार्मेशन दे सकूं।" कहते हुए आद्या ने अपनी स्कूटी में चाबी डाली और उसे स्टार्ट किया। 

    मेहता अंकल बोले, "बेटा अगर आप बुरा ना माने तो मैं आपको घर छोड़ दूं? इस वक्त इतनी रात को आपका सफर करना मुझे सही नहीं लगता।"

     आद्या बोली, "आप चिंता मत कीजिए। मुझे आदत हो गई है और वैसे भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है। अगले 15 से 20 मिनट में मैं घर पहुंच जाऊंगी और आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। घर पहुंचते ही मैं आपको मैसेज कर दूंगी, ठीक है?"

    आद्या को मेहता अंकल का ऐसे परवाह करना अच्छा लग रहा था लेकिन वो उन्हें परेशान नहीं करना चाहती थी। इसीलिए उसने सीधे सीधे अपनी बात रखी और वहां से चली गई। लेकिन मेहता अंकल को उसकी कुछ ज्यादा ही चिंता हो रही थी। आखिर उनके दोस्त की कुछ जिम्मेदारियां थी उनके कंधे पर इसलिए उन्होंने अंदर जाकर दरवाजे के पीछे से चाबी निकाली और अपनी गाड़ी में बैठ कर आद्या के पीछे चल दिए। 





18



आद्या के घर पहुंचने तक मेहता अंकल अपनी गाड़ी में उसके पीछे पीछे चलते रहे। वह अच्छे से जानते थे कि आद्या को अपना आत्मसम्मान कितना प्यारा है। किसी से भी मदद लेना उसे बिल्कुल भी मंजूर नहीं था। यहां तक की इस केस को लड़ने के लिए भी आद्या उन्हें उनकी फीस दे रही थी। मेहता अंकल भी आद्या का दिल रखने के लिए वो पैसे एक्सेप्ट तो कर लेते थे लेकिन वह सारे पैसे उन्होंने आद्या के नाम पर जमा कर रखा था। आखिर उसकी शादी को लेकर उनके भी कुछ अरमान थे।

     उनका बेटा शालीन बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसके बाद उसने वही जॉब कर ली और सेटल हो गया। कभी-कभी मां पापा से मिलने घर आ जाया करता था लेकिन बहुत कम। पिछले कई सालों से आद्या और शालीन एक दूसरे से मिले भी नहीं थे। ऐसे में जब उन्होंने शालीन के सामने आद्या के रिश्ते के लिए पूछा तो शालीन ने एकदम से इनकार कर दिया। दोनों तरफ से इनकार पाकर मेहता साहब थोड़े दुखी थे क्योंकि जोशी जी से उनकी जो दोस्ती थी उसे रिश्तेदारी में बदलने का ख्वाब उन दोनों ने हीं देखा था और अब जिनकी शादी होनी थी उन दोनों ने ही इंकार कर दिया था। ऐसे में दोबारा बात शुरू करने की कोई वजह ही नहीं थी। 

    अब जबकि वह आद्या को अपनी बहू नहीं बना सकते थे तो कम से कम उनकी बेटी तो वो थी ही, तो परेशान होना जाहिर सी बात थी। आद्या ने घर पहुंचते ही अपनी स्कूटी साइड में लगाई और दरवाजा खोल कर घर के अंदर दाखिल हो गई। मेहता साहब जब निश्चिंत हो गए तो उन्होंने वापस अपने घर की तरफ गाड़ी घुमा ली। 

   आद्या जब अपने घर पहुंची तब उसके दिमाग में मेहता अंकल के काहे शब्द बार-बार घूम रहे थे। उसे अब थोड़ा थोड़ा शक होने लगा था। उसने सबसे पहले अपने पापा का स्टडी रूम खंगालने का सोचा लेकिन आज दिन भर के काम से इतनी ज्यादा थक गई थी कि अब उसे कपड़े बदलने तक में मुश्किल लग रहा था। फिर भी अपने कदमों को घसीटते हुए वो बाथरूम में गई और कुछ देर शावर के नीचे खड़ी हो गई। ठंडे पानी की बूंदों ने जब उसे छुआ तो काफी ज्यादा राहत महसूस हुई। 

    आद्या कुछ देर वहां खड़े रहना चाहती थी लेकिन अब उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी इसलिए उसने सावर बंद किया और टॉवल खुद को सुखाते हुए नाईट सूट में बिस्तर पर जा गिरी। काफी देर से उसने अपना फोन नहीं देखा था लेकिन उठ कर बैग से अपना फोन निकालने की भी हिम्मत उसमें नहीं बची थी। उसकी आंखों के सामने उसका बैग पड़ा हुआ था और उसे निहारते हुए आद्या की कब आँख लग गई उसे पता ही नहीं चला। 

    अगले दिन शनिवार था इसीलिए आद्या को कोई जल्दी नहीं थी उसने की। वो दोपहर तक सोती रही, या फिर थकान की वजह से उसकी नींद नहीं खुली पता नहीं। लेकिन जब तक वह उठी लगभग दोपहर हो चुकी थी। उसने अलसाई नजरों से घड़ी की तरफ देखा जिसमें 12:00 बजने वाले थे। वह आंखें मलते हुए बिस्तर से उठी और बाथरूम में जाने को हुए तभी उसका फोन बजा। 

     आद्या धीमें कदमों से लड़खड़ाते हुए बैग की तरफ बढ़ी और अपना फोन निकाल कर देखा तो अश्विनी का कॉल था। उसने फोन उठाकर कान में लगा लिया और उबासी लेते हुए बोली, "गुड मॉर्निंग!"

     दूसरी तरफ से परेशान अश्विनी की आवाज आई, "गुड मॉर्निंग की बच्ची! तूने घड़ी में टाइम देखा है? गुड मॉर्निंग!! 12:00 बजे गुड मॉर्निंग होता है पगली? अब तक सो रही थी तु? तूने फोन क्यों नहीं उठाया मेरे? तेरे कानों में फोन की घंटी की आवाज नहीं गई क्या? तुझे पता भी है यहां मेरी क्या हालत हो रखी थी? अगर इस बार भी तुम मेरा फोन नहीं उठाती तो मैं सीधे सीधे पुलिस में रिपोर्ट करने जा रही थी।"

    आद्या बिस्तर पर बैठी और उसने अपने दोनों पैर आपस में मोड लिए फिर बोली, "पुलिस को क्यों परेशान करना जब तू खुद आकर मुझे यहाँ देख सकती थी। इतना भी दिमाग नहीं है तुझ में?"

   अश्विनी ने दांतो तले उंगली दबा ली और बोली, क्सयह तो मेरे दिमाग में ही नहीं। एक्चुएलि मैं थोड़ी घबरा गई थी कि कहीं तुझे कुछ हो ना गया हो। मेरा मतलब तू कल मेहता कल के घर गई थी, वहां से तू अकेले ही लौटी होगी और उसके बाद पता नहीं क्या हुआ, तू जब से ऑफिस से निकली है उसके बाद से तेरा ना कोई कॉल ना मैसेज, मैं बहुत बुरी तरह से डर गई थी यार! पता है कब से फोन कर रही हूं मैं तुझे?"

     आद्या ने एक तंज भरी मुस्कान के साथ कहा, "तु घबरा मत। कुछ नहीं होगा मुझे। उस हादसे में मैं जिंदा बच गयी तो अब मेरा कोई क्या बिगाड़ सकता है। जानती हूं मैं, इतनी आसानी से नहीं मरूंगी।"

      अश्विनी गुस्से में बोली, "बस कर आद्या! क्या बकवास किए जा रही है तु? सिर्फ एक मौत ही नहीं है इस दुनिया में और भी बहुत से हादसे है जो कब किसके साथ हो जाए हम नहीं जानते। ऐसे हादसों के बाद जिंदगी मौत से भी बदतर हो जाती है। और खबरदार तूने ऐसा उल्टा सीधा सोचा भी तो! मैं तुझ से कभी बात नहीं करूंगी, बिल्कुल भी नहीं करूंगी।"

     आद्या एकदम से बात बदलते हुए बोली, "अच्छा यह बता तूने कॉल क्यों किया? आज तो शनिवार है ना? मुझे लगा महारानी जी अभी भी सो रही होगी।"

     अश्विनी अपना हाथ सर पर मारते हुए बोली, क्सतेरे बकवास के चक्कर में ना! मैं तो असली बात भूल ही गई। चल आज मॉल चलते हैं। सेल लगी है वहां पर, चल टूट पड़ते हैं। मुझे अपने लिए भी कुछ लेना है और मम्मी के लिए भी। तु चलेगी ने मेरे साथ?"

     आद्या ने सुना तो थोड़ा परेशान हो गयी। उसने कहा, "अश्विनी आज नहीं फिर कभी। आज मुझे कुछ जरूरी......... "

    अश्विनी उसे बीच में ही रोकते हुए बोली, "तु मेरी दोस्त ही है ना? अबे सेल लगी है सेल! और कौन सी ऐसी लड़की होगी जो सेल को छोड़ना चाहेगी? देख मुझे कुछ नहीं सुनना। तु मेरे साथ चल रही है मतलब चल रही है। मैं तैयार हु और आ रही हु। चल जल्दी से तैयार हो जा, मैं बस घर से निकल रही हूं तुझे तेरे घर से पिक कर लूंगी। जल्दी से तैयार हो जाओ और ना करने की सोचना भी मत।"

     अपनी बात कह कर बिना आद्या का जवाब सुने अश्विनी ने फोन काट दिया आद्या ने अपनी फोन की तरफ देखा और बोली, "तेरा भी अजब हाल है। कभी दूसरी तरफ का कुछ नहीं सुनती।" 

    आद्या ने अपना फोन चार्जिंग पर लगाया और अलमारी से तोलिया लेकर बाथरूम में चली गई। आज कैसे भी करके उसे जल्द से जल्द जरूरी पेपर्स ढूंढने थे और साथ ही पड़ोस में जाकर कुछ जानकारी इकट्ठा करनी थी लेकिन अश्विनी के प्लान की वजह से उसे अपना प्लान आज टालना पड़ेगा, यह सोचकर ही आद्या परेशान हो गई। लेकिन उसे पता था चाहें वो अश्विनी को वह कोई भी बहाना दे, वह नहीं मानने वाली। उसके पास तैयार होकर जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। 





19



आद्या को अपने घर में कुछ सबूत ढूंढने थे लेकिन अश्विनी की वजह से उसे अपना यह काम टालना पड़ा। हालांकि पहले भी उसने पूरा घर ढूंढा था लेकिन उसके हाथ ऐसा कुछ नहीं लगा था जिस पर उसे शक हो। लेकिन अब आद्या जानती थी कि उसे ढूंढना क्या है इसीलिए उसे थोड़ी उम्मीद थी कि शायद जो चीज वो ढूंढ रही है उसे मिल जाए। 

    कुछ देर के बाद ही अश्विनी आद्या के घर पहुंची। आद्या ने उसे थोड़ी देर रुकने को कहा और जल्दी से अपना बैग कंधे पर डालकर भागते हुए बाहर निकली। वह दोनों ही आद्या की स्कूटी से शॉपिंग के लिए निकल गई। पूरे रास्ते अश्विनी आद्या को अपनी शॉपिंग लिस्ट के बारे में बताती रही कि उसे क्या लेना है किसके लिए लेना है। आद्या भी चुपचाप उसकी बातें सुनते हुए स्कूटी रास्ते पर भगाए जा रही थी। उसकी लाइफ में बस एक अश्विनी थी जो दिन भर अपनी बातों में उसे उलझाकर रख सकती थी। वह दोनों अश्विनी के बताएं मॉल के सामने पहुंची और आद्या सीधे जाकर पार्किंग लॉट में अपनी स्कूटी पार्क कर दी।

     सिक्योरिटी गार्ड से टोकन लेकर आद्या और अश्विनी वही बेसमेंट में बने लिफ्ट से ऊपर चली गई लेकिन अश्विनी का पूरा प्लान सिर्फ शॉपिंग का नहीं था। 1:00 बजे से शो शुरू होने वाला था इसीलिए ऊपर पहुंचते ही उसने आद्या का हाथ पकड़ा और लेकर सीढ़ियों की तरफ भागी। सबसे ऊपर वाला फ्लोर जहां पर ऑडी था वहां तक लिफ्ट नहीं जाती थी उसने जल्दी से दरवाजे पर अपनी टिकट दिखाएं और अंदर की तरफ भागी। आद्या उसका हाथ कसकर पकड़ते हुए रोका और बोली, "हम दोनों शॉपिंग के लिए आए थे तो फिर हम यहां क्या कर रहे हैं?"

    अश्विनी बोली, "तेरे सारे सवालों के जवाब दूंगी लेकिन अभी चल जल्दी, शो शुरू हो जाएगा और मैं बिगिनिंग मिस नहीं करना चाहती। ये ऑडी 3 कहां है?" कहते हुए अश्विनी ने इधर-उधर नजरे दौड़ाई तो उसे सामने तीन नंबर दिखा और वह आद्या का हाथ पकड़े सीधे तीन नंबर ऑडी में घुस गई। अपनी सीट ढूंढने के बाद अश्विनी ने दोनों सीट को एडजस्ट किया और आद्या को लेकर बैठ गई। अभी तक शो शुरू नहीं हुआ था। 

     आद्या ने अश्विनी को घूर कर देखा तो अश्विनी ने मुस्कुराते हुए सामने से आ रहे हैं अटेंडेंट के हाथ में से पॉपकॉर्न का डब्बा लेकर आद्या को पकड़ा दिया और अटेंडेंट को पैसे दे दिए। कुछ देर में फिल्म स्टार्ट हो गई और अश्विनी पूरे दिल से उस फिल्म को इंजॉय करने में लगी रही। आद्या को समझते देर नहीं लगी कि अश्विनी ने सब कुछ पहले से प्लान कर रखा था और शॉपिंग तो सिर्फ एक बहाना था। 

    जैसे तैसे मूवी खत्म हुई लेकिन अश्विनी का दिल नहीं भरा था फिर भी मन मार कर उसे अपनी सीट छोड़नी पड़ी। आद्या उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए थिएटर के बाहर लेकर गई और सीधे शॉपिंग मॉल की तरफ बढ़ गई। वो अब अश्विनी को ऐसा कोई मौका नहीं देना चाहती थी कि उसका वक्त बर्बाद हो। आख़िर उसकी वजह से आद्या का पहले ही इतना सारा टाइम बर्बाद हुआ था। 

    सेल वाले डिपार्टमेंट में आते ही अश्विनी ने बिना सोचे समझे खरीदारी शुरु कर दी। आद्या को वैसे तो कुछ लेना नहीं था फिर भी उसने अपने लिए कुछ कपड़े लिए और दोनों पेमेंट कर वहां से बाहर निकल गई। इससे पहले कि आद्या घर के लिए निकल पाती, अश्विनी ने उसे रोका और बोली, "बहुत भूख लग रही है यार! चला पहले कुछ खाते हैं।" कहते हुए उसने फूड कोर्ट की तरफ देखा जो कि नीचे वाले फ्लोर पर था। आद्या को भी याद आया कि आज उसने घर से निकलने से पहले कुछ नही खाया था। 


विशेष को कुछ सामान लेना था और वह घर में खाली बैठा बोर हो रहा था। ऑफिस के काम में उसका थोड़ा भी मन नहीं लग रहा था इसीलिए वह शॉपिंग के बहाने बाहर निकल आया। मॉल के बाहर पहुंचते ही उसके फोन की घंटी बजी। विशेष में फोन उठाकर देखा तो उसके दोस्त का ही फोन था। खुश होकर उसने फोन उठाया और बोला, "हां भाई बोल! फुर्सत मिल गई तुझे? हो गयी तेरी नींद पूरी?"

     दूसरी तरफ से आवाज आई, "अभी कुछ देर पहले ही उठा हूं। कल तुझसे ठीक से बात नहीं हो पाई इसलिए सोचा सबसे पहले तुझे ही कॉल कर लूँ। तू बता सब ठीक है? और तेरा मूड कैसा है?"

    विशेष मुस्कुरा कर बोला, "सब ठीक है, मैं भी और मेरा मूड भी।"

    दूसरी तरफ से आवाज आई, "और मेरी डियर डार्लिंग कैसी है?"

    विशेष गाड़ी से निकला और उस बेंटले पर लगी हल्की सी धूल साफ करते हुए बोला, "तेरी डार्लिंग भी बहुत अच्छी है। तु बिल्कुल भी परेशान मत हो, तेरी दिलरुबा को एक खरोच भी नहीं आने दूंगा मैं।"

    दूसरी तरफ से फिर आवाज आई, "कल जो एक्सीडेंट हुआ था उसमें गाड़ी को कोई नुकसान तो नहीं हुआ?"

     विशेष ने चाबी सिक्योरिटी गार्ड को देखकर गाड़ी पार्किंग के लिए भेज दिया और खुद लिफ्ट की तरफ बढ़ते हुए बोला, "तु बिल्कुल नहीं परेशान मत हो। मुझे अच्छे से पता था कब कहां कैसे उस लड़की का एक्सीडेंट करना है इसलिए मैंने गाड़ी पर ऑलरेडी प्रोटेक्शन कोट करवा रखा था। इसीलिए तेरी दिलरुबा पर जरा सी भी आज नहीं आई।" फिर एकदम से विशेष की हंसी छूट गई। उसने कहा, "तू अपनी गाड़ी से इतना प्यार करता है! उससे शादी क्यों नहीं कर लेता तु? बेचारी मलिश्का! उसे समझ ही नहीं आएगा कि तू किस से ज्यादा प्यार करता है, अपनी गाड़ी से या उससे? वो बेचारी जिंदगी भर कंफ्यूज रहेगी।"

    दूसरी तरफ से हंसते हुए आवाज आई, "ऑफ़कोर्स मैं अपनी कार से ज्यादा प्यार करता हूं और वो कार मैंने तुझे दी है तो सोच मैं तुझसे कितना प्यार करता हूं। उसे तो मैंने मलिश्का को हाथ तक नहीं लगाने दिया।"

    इतने में लिफ्ट का दरवाजा खुला और विशेष बाहर निकला। लेकिन जैसे ही वह कोरिडोर् की तरफ जाने को हुआ, सामने से आती हुई एक लड़की से टकरा गया। टक्कर इतनी जोर की हुई की विशेष के हाथ से उसका फोन छोड़कर नीचे जा गिरा और उस लड़की के हाथ से जितने भी शॉपिंग बैग्स थे वह भी नीचे जा गिरी साथ ही वो दोनों भी। 

    इससे पहले की विशेष अपना फोन उठाता या उस लड़की को कुछ कहता, उस लड़की के बगल में खड़ी दूसरी लड़की चिल्लाई, "अंधे हो क्या? दिखाई नहीं देता तुम्हें? आंखें दान पेटी में डाल आए हो क्या?"

     आवाज सुनते ही विशेष के कान खड़े हो गए और अपना फोन उठाना भूल कर उसने उन दोनों लड़कियों की तरफ देखा तो चौक गया। उसके सामने आद्या और अश्विनी खड़े थे। आद्या अभी भी जमीन पर गिरी हुई थी और अपना बैग समेटने में लगी थी। अश्विनी भी बैठ कर सामान उठाने लगी तो विशेष ने भी उन दोनों का साथ दिया और बोला, "सॉरी मैंने देखा नहीं।"

    आद्या और अश्विनी ने नजरें उठाकर देखा तो सामने विशेष था। अश्विनी ने दांतों तले उंगली दबा ली। आखिर अभी-अभी उसने जिसे गाली दी थी वह उसका अपना बॉस था। अश्विनी बुरी तरह से झेंप कई और विशेष को सॉरी बोलते हुए कहा, "आई एम सॉरी सर। मुझे नहीं पता था कि आप हैं। मुझे लगा किसी ने जानबूझकर आद्या को टक्कर मारी है। आप तो जानते ही है आजकल के लड़कों की आदत है, कोई लड़की देखी नहीं कि बस उसे परेशान करने के लिए कुछ भी करते हैं। इसलिए मैं..........!"

     विशेष बोला, "आपको सॉरी फील करने की कोई जरूरत नहीं है। इनफैक्ट मैं तो खुश हूं कि आप अपनी सहेली के लिए इतनी ज्यादा कंसर्नड है।" कहते हुए उसने कुछ बैग अश्विनी के हाथ में पकड़ा दिया। 

    आद्या की नजर विशेष के फोन पर गई जो गिरने के बावजूद टूटा नहीं था और स्क्रीन ऑफ होने के कारण उसे पता नहीं चला की कॉल चालू था। आद्या ने फोन उठाया और विशेष की तरह बढ़ाते हुए कहा, "सर आपका फोन। देख लीजिए टूटा ना हो।"

   विशेष ने फोन लिया और जल्दी से चेक किया लेकिन फोन अभी भी सही सलामत थी और कॉल अभी भी चल रहा था। उसने चैन की सांस ली लेकिन जब तक वो फोन को कान में लगाकर कुछ कहता, दूसरी तरफ से कॉल कट गई।





    20



 विशेष ने अपना फोन पैंट के पॉकेट में डाला और बोला, "सॉरी! मैंने सच में नहीं देखा था। मिस जोशी! आपको चोट तो नहीं लगी?"

   आद्या अपनी कमर कहलाते हुए बोली, "नहीं सर मैं ठीक हूं।" लेकिन सच तो यह था कि आद्या की कमर में अच्छी खासी चोट लगी थी। उसका दिल कर रहा था वह विशेष की आंखें निकाल दे जिसे उसका दर्द नजर नहीं आ रहा था। उसने अश्विनी का हाथ पकड़ा और बोली, "सर आई थिंक हमें चलना चाहिए। आपको भी तो काम होगा।" कहते हुए उसने बिना विशेष का जवाब सुने अश्विनी को अपने साथ खींचा तो विशेष ने उसे रोकते हुए पूछा, "अ...... आप लोगों की शॉपिंग हो गई?"

    आद्या कोई जवाब नहीं देना चाहती थी लेकिन अश्विनी ने जब से विशेष को देखा था तब से ही वह उस पर फ्लैट थी। ऐसे में विशेष ने जब उसे पूछा तो वह कैसे ना जवाब देती। उसने कहा, "हमारी शॉपिंग हो गई सर। हम यहां पर फूड कोर्ट में जाने वाले थे। वो क्या है ना, बहुत जोरों की भूख लग रही थी और आद्या ने भी सुबह से कुछ नहीं खाया। वैसे भी अब तो डिनर का भी टाइम हो रहा है।"

    विशेष ने सुना तो खुश हो गया। आखिर आद्या के साथ थोड़ा टाइम स्पेंड करने का एक अच्छा मौका था ताकि उसे आद्या के करीब जाने में थोड़ी तो आसानी हो। उसने कहा, "वैसे भूख तो मुझे भी लग रही है। अगर आप लोगों को बुरा ना लगे तो क्या मैं आप दोनों को ज्वाइन कर सकता हूं?"

    आद्या सीधे-सीधे इनकार करना चाहती थी लेकिन उससे पहले अश्विनी शरमाते हुए बोली, "बिल्कुल सर! आप हमारे साथ आ सकते हैं हमें बहुत खुशी होगी अगर हमने आपको ट्रीट दी तो?"

     आद्या ने घूर कर अश्विनी को देखा जैसे वह अपनी आंखों से उसका मर्डर कर देगी। विशेष ने आद्या के चेहरे का यह भाव नोटिस कर लिया और वो मुस्कुरा कर बोला, "ज्वाइन तो मैं आप दोनों को करूंगा ही लेकिन यह ट्रीट मेरी तरफ से होगी, फिर चाहे आप लोगों को अच्छा लगे या ना लगे आज का डिनर हम साथ में करेंगे।"

    आद्या उसे इनकार करना चाहती थी। विशेष के साथ वैसे ही उसका पूरा दिन ऑफिस में निकलने वाला था। अब रात को भी वह चैन से खा नहीं सकती थी। यह सोच कर आद्या को विशेष पर बहुत बुरी तरह से गुस्सा आ रहा था और उससे भी ज्यादा गुस्सा उसे अश्विनी पर आ रहा था लेकिन वह भी कुछ कह भी नहीं सकती थी क्योंकि अश्विनी पर विशेष के प्यार का भूत सवार था। 

     आद्या ने अजीब नजरों से अश्विनी की तरफ देखा और मन ही मन बोली, "तुझे एक ही लाइफ में कितनी बार प्यार होगा पगली? पता नहीं वो कौन सा बेचारा होगा जिससे तेरी शादी होगी। आद्या अभी सोच में गुम थी तभी अश्विनी ने उसके कंधे से पकड़कर बोली, " कहाँ खो गयी? यह देख विशेष सर आगे चले गए, चल जल्दी।" कहते हुए उसने आद्या का हाथ पकड़ा और खींचते हुए अपने साथ ले गई। 

     आद्या का पूरा मूड ऑफ हो चुका था। वैसे ही उसके कमर में दर्द हो रहा था, ऊपर से विशेष के पीछे इतनी तेज चलना उसके दर्द को और बढ़ा रहा था। फूड कोर्ट की बजाए वो तीनों एक रेस्टुरेंट में पहुँचे। वहाँ उन तीनों को एक टेबल खाली मिल गया। अश्विनी जल्दी से जाकर एक कुर्सी पर बैठ गयी। आद्या जैसे ही टेबल के करीब आई, विशेष ने उसके लिए कुर्सी खींची। आद्या को यह बात बहुत अजीब लगी। मैनर्स अलग बात है और एक बॉस होकर अपने असिस्टेंट के लिए ऐसा करना थोड़ा अजीब था। उसने सवालिया नजरों से विशेष की तरफ देखा तो विशेष बोला, "ना ये हमारा ऑफिस है ना ही यह वर्किंग टाइम। और वैसे भी मेरी वजह से आपको चोट लगी है। पता है मुझे आपको दर्द हो रहा है। यह सब करके मैं बिना कहे थोड़ा सॉरी तो कह ही सकता हूं। आपको ज्यादा कुछ सोचने की जरूरत नहीं है।"

     आद्या चुपचाप कुर्सी पर बैठ गयी। विशेष भी आराम से बैठ गया और उसने वेटर को आवाज लगाई। वेटर उन लोगों के पास आया और 2 मेन्यू कार्ड विशेष को पकड़ा दिया। विशेष ने दोनों कार्ड आद्या और अश्विनी की तरफ बढ़ा दिया और बोला, "आप दोनों को जो कुछ भी खाना है, बेझिझक ऑर्डर कर सकते हैं।"

     आद्या पूछना चाहती थी कि ये सब किस खुशी में? उसे गिराने की खुशी में? अश्विनी ने आद्या के चेहरे के भाव देखें तो उसने कोहनी मारकर आद्या को शांत रहने का इशारा किया। आद्या को अब बहुत बुरी तरह से भूख लग रही थी। उसने कुछ डिसेज अपने लिए ऑर्डर किए और अश्विनी ने भी। वेदर इन दोनों का आर्डर लिख रहा था। उसके बाद वेटर ने विशेष से उसका आर्डर मांगा तो विशेष ने आद्या का ही ओर्डर डबल कर देने को कहा। 

    आद्या को अजीब लगा। आखिर विशेष ने अपना ऑर्डर देने की बजाए वही सब क्यों मँगवाया जो उसने मंगवाया। वेटर वहाँ से चला गया। आद्या हिचकते हुए बोली, "वैसे सर! आपको नहीं लगता कि आप के हिसाब से यह जगह कुछ ज्यादा छोटी है? मेरा मतलब आप जैसे लोगों को मैंने हमेशा फाइव स्टार मैं खाते देखा है। इतनी छोटी सी जगह पर तो वो आना भी नहीं चाहते। जिस पोजीशन पर आप हैं कम से कम उस पोजीशन का तो ध्यान रखिए।"

     विशेष बोला, "बाकियों की तरह हम भी इंसान हैं कोई एलियन नहीं। चाहे वह ऑफिस में काम करने वाला कोई सफाईकर्मी हो या फिर कंपनी का मालिक, हर इंसान की एक जरूरत होती है। उसे बस पेट भरने से मतलब होता है और साथ में अच्छा खाना मिल जाए तो फिर कहने ही क्या! माना फाइव स्टार होटल ज्यादा हाइजीनिक होता है लेकिन यहां भी तो सफाई काफी अच्छी है। बड़े होटलों में जाकर ज्यादा पैसे खर्च करने से बेहतर है कि हम ऐसे छोटे-छोटे जगहों पर खर्च करें। रोज नहीं तो कभी कभी तो ऐसा कर ही सकते हैं। वैसे सच में फाइव स्टार होटल से भी ज्यादा अच्छा खाना सड़क किनारे ढाबे पर मिलता है, कभी ट्राई किया है आप लोगों ने?"

     अश्विनी हैरानी से विशेष को देखे जा रही थी। उसने एकदम से कहा, "मतलब आपने ढाबे पर भी खाना खाया है? मेरा मतलब, हम आपको फाइव स्टार होटल के बारे में बोल रहे है और आप.......... कितने सिंपल है सर आप! मुझे तो पता ही नहीं था। इनफैक्ट बहुत कम लोग होते हैं जो इतनी बड़ी पोजीशन पर होते हुए भी इतना सिंपल लाइफ जीते हैं। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और आम लोगों की तरह एक नॉर्मल लाइफ जीते है।"

       विशेष हंसते हुए बोला, "हम भी इंसान है और अपनी लाइफ सिंपल तरीके से जीना चाहते हैं। इस चकाचौंध भरी दुनिया से बहुत दूर। क्योंकि बाहर से देखने पर यह दुनिया बहुत खूबसूरत लगती है और हम इसका हिस्सा बनना चाहते हैं लेकिन जब तुम इस दुनिया में दाखिल होगी तो कुछ वक्त के बाद ही एक घुटन सी महसूस होने लगती है और हम वापस से उस मिडल क्लास लाइफ को जीने के लिए बेचैन हो जाते हैं। हाई सोसाइटी की लाइफ बहुत ज्यादा स्ट्रेस् से भरी होती है। हर कोई इस प्रेशर को हैंडल नहीं कर सकता और एक दिखावे की जिंदगी मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं।" आद्या को ये सब सिर्फ उसका दिखावा लगा। 

      कुछ ही देर बाद उन दोनों का आर्डर आ गया। वेटर ने उन तीनों को खाना सर्व किया और वहां से चला गया। विशेष में ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। आद्या को इंप्रेस करने के चक्कर में उसने अपने लिए डिश् ऑर्डर की थी उसमें मशरुम था जो विशेष को बिल्कुल भी पसंद नहीं था। लेकिन अब जबकि उसने ये मंगवाई थी तो उन दोनों के सामने उसे छोड़ नहीं सकता था। ना चाहते हुए भी उसे खाना खाना पड़ा। 

   जहाँ आद्या और अश्विनी ने चम्मच उठा लिया वहीं विशेष को हाथ से खाते देख आद्या को उसपर यकीन ही नहीं हुआ। 



21



विशेष जानता था की आद्या फिर उसका लिफ्ट ऑफर ठुकरा देगी इसलिए उसने कुछ भी कहने की बजाय आद्या और अश्विनी के पीछे पीछे चल पड़ा। आद्या ने सबसे पहले अश्विनी को उसके घर छोड़ा और फिर अपने घर चली गई। उसने घर का दरवाजा बंद किया और अपने कमरे की तरफ जाने को हुई उसी वक्त उसके दरवाजे की घंटी बजी। आद्या हैरान हो गई कि रात के 9:00 बजे उसके घर कौन आया होगा? ऐसे तो दिन में भी कोई नहीं आना चाहता फिर इस वक्त कौन हो सकता है? 

     आद्या धीरे से दरवाजे के करीब आई और उसने मॉनिटर पर देखा तो दरवाजे पर विशेष को देख कर चौक गई। उसने खुद से कहा, "इस इंसान को मेरे घर का पता कैसे पता? कही ये मेरा पीछा तो नहीं कर रहा था? इसकी तो मैं......“

     आद्या ने गुस्से में अपने हाथ की मुट्ठी बना ली और बोली, "इसके इरादे मुझे कभी अच्छे नहीं लगते लेकिन इस वक्त यहाँ करने क्या आया है? कुछ देर पहले तो बहुत शरीफ बन रहा था।" सोचते हुए उसने दरवाजे के हैंडल पर हाथ रखा और एक गहरी सांस लेकर धीरे से दरवाजा खोल दिया। 

      दरवाजे पर सामने विशेष खड़ा मुस्कुरा रहा था। आद्या ने अजीब सी शक्ल बनाकर कहा, "सर आप यहां! इस वक्त? वो भी मेरे घर पर? कैसे और आपको मेरे घर का एड्रेस कैसे मिला?"

     विशेष वैसे ही मुस्कुराते हुए बोला, "वो क्या है ना मिस् जोशी! आप दोनों लड़कियों को इस तरह अकेले जाने देना मुझे सेफ नहीं लगा इसलिए मैं आपकी स्कूटी के पीछे-पीछे चला आया।"

    आद्या को की बात बहुत अजीब लगी। उसने कहा, "सर लेकिन अब तो मैं अपने घर में हूं ना। और सेफली घर पहुंच भी गई हूं, आप देख ही रहे हैं तो फिर इस वक्त आप यहां क्यों?"

     विशेष बोला, "आई नो आप सेफली अपने घर पहुंच गई है और यह मैंने देखा भी लेकिन अ..... मेरे वजह से जो आपके साथ हुआ उसके लिए मुझे तो आप सॉरी फील हो रहा था। तो......... इसलिए मैं आपके लिए यह ले आया।" कहते हुए उसने अपने हाथ में रखा एक ब्राउन पैकेट आद्या की तरफ बढ़ा दिया। आद्या ने वो पैकेट ले तो लिया लेकिन हैरानी से फिर बोली, "इसमें क्या है? और क्या किया आपने मेरे साथ जिसके लिए आप सॉरी फील कर रहे है?"

    विशेष ने कुछ कहा नहीं बस मुस्कुराते हुए वैसे ही उल्टे पांव लौट गया और अपनी गाड़ी के पास पहुंच कर दरवाजा खोलने से पहले उसने आद्या की तरफ देखते हुए एक हाथ से अपने कान पकड़ लिए। आद्या हैरानी से उसे देख रही थी और विशेष बड़े आराम से अपनी गाड़ी में बैठ कर वहां से चला गया। आद्या अभी भी हैरानी से उसे देखे जा रही थी जहां से विशेष कुछ देर पहले निकला था। 

    अचानक से उसे ध्यान आया और उसने उस ब्राउन पैकेट को खोल कर देखा तो उसमें एक क्रीम और एक पेनकिलर था। उसे समझते देर नहीं लगी कि विशेष ने किस बात के लिए सॉरी कहां है। विशेषअच्छे से समझ रहा था की आद्या को चोट लगी है इसीलिए उसके लिए क्रीम और दवाई लेकर आया था। आद्या ना चाहते हुए भी खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं पाई और दरवाजा बंद कर अपने कमरे में चली गई। 

     बाथरूम में जाकर वो कुछ देर और फ्रेश हुई और कपड़े बदल कर बाहर निकली। कमर का दर्द अभी भी बरकरार था। उसने विशेष का दिया हुआ क्रीम अपनी कमर पर लगाया और एक पेन किलर लेकर थोड़ी देर बिस्तर पर लेट गई। जब दर्द थोड़ा आराम हुआ तो उसने बिना देर किए अपना काम शुरू करने का तय किया और सबसे पहले अपने पापा के स्टडीरूम में गई। उसके घर में एक छोटा सा स्टडी रूम था जो जोशी जी के बेडरूम के बगल में ही था। काफी दिनों के बाद आद्या ने वह कमरा खोला था। सब कुछ बिल्कुल वैसा ही था जैसा हमेशा हुआ करता था। जैसा उसके पापा रखते थे। बस उन सब पर धूल की हल्की सी परत जम गई थी। 

     आद्या के पापा को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था और उनकी मां को भी। दोनों जब भी खाली होते हैं कुछ ना कुछ पढ़ते ही रहते। आद्या की मम्मी को खास तौर पर रात में सोते समय किताब पढ़ना ज्यादा पसंद था। आद्या ने एक कपड़ा लिया और एक-एक कर सारे किताबों पर से धूल झाड़ना शुरू किया। साथ ही वह हर किताब को खंगाले जा रही थी लेकिन अभी तक उसके हाथ ऐसा कुछ नहीं लगा था जो उसके किसी काम का हो। उनके जाने के बाद ऑफिस के जो पेपर और फाइल थे वह सब आद्या ने अपनी निगरानी में ऑफिस भिजवाए थे। जहां तक उसे याद था सभी ऑफिशियल डाक्यूमेंट्स थे। 

    उसने अलमारी से लेकर टेबल तक साफ करते हुए एक एक चीज को काफी बारीकी से देखा लेकिन उसके हाथ कुछ भी नहीं लगा सिवाय कुछ पुरानी तस्वीरों के जो उसके मम्मी पापा की शादी के वक्त की थी। आद्या ने बड़े प्यार से उस तस्वीर को साफ किया और उसे हॉल के दीवार पर लगा दिया। आद्या काफी देर से लगी हुई थी लेकिन ना तो उसे स्टडी रूम में कुछ मिला ना ही अपने पापा के कमरे में। वह थक हार कर अपने कमरे में चली गई। कमर का दर्द जो आराम हो गया था वह उसकी मेहनत की वजह से एक बार फिर शुरू हो गया। उसकी नजर बेडसाइड टेबल पर रखी उस ट्यूब पर गई जो विशेष उसे देकर गया था। उसने एक बार फिर दवाई अपने कमर पर लगाई और बिस्तर पर लेट गई। 

     एकदम से उसे ध्यान आया कि उसने तो विशेष को इस सब के लिए थैंक यू बोला ही नहीं और ना ही घर के अंदर आने को कहा। बस बाहर दरवाजे से ही लौटा दिया। 'कोई बात नहीं। ऑफिस जाते ही सबसे पहले वह उसे थैंक यू बोलेगी' यह सोचकर उसने सोने की कोशिश की लेकिन उसे विशेष का वो मुस्कुराता हुआ चेहरा नजर आया। 

     विशेष की यह हरकत आद्या को अच्छी लगी। उसे उसकी इस छोटी सी बात का ध्यान था वरना वह अपने दर्द पर इतना ध्यान नहीं देती। उसके मन में एकदम से ख्याल आया "क्या विशेष वाकई में एक अच्छा इंसान है? क्या मैं उस पर भरोसा कर सकती हूं या फिर नहीं? जैसा अश्विनी कहती है, क्या सच में मैं हर बात पर हर किसी पर शक करती हूं? किसी पर भरोसा नहीं करती? लेकिन मैं भरोसा करूं भी तो कैसे? जहां मेरे आगे पीछे कोई नहीं वहां मुझे खुद को संभाल कर चलना है। मैं इतनी जल्दी किसी पर भरोसा नहीं कर सकती लेकिन आज उसकी हरकतों को देखकर ऐसा लगा जैसे वह काफी सिंपल इंसान है। पर्सनालिटी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं लेकिन हां, अच्छी है। एक सिंपल इंसान, जो इतने बड़े पोस्ट पर हो कर भी कोई घमंड नहीं। चेहरे पर मुस्कुराहट और दूसरों के लिए परवाह या फिर वह सिर्फ मुझे ऐसे दिखाता है? लेकिन इतना बड़ा आदमी मेरे बारे में क्यों सोचेगा? तू भी आद्या! कुछ ज्यादा सोच रही है। इस सब झमेले में नहीं पड़ते। तेरा काम तुझे इसकी इजाजत नहीं देता है। अपनी लाइफ में किसी चमत्कार की उम्मीद मत करना कि कोई आएगा और तुझे तेरा मकसद पूरा करने में तेरा साथ देगा। इस बात की तो बिल्कुल भी उम्मीद मत करना। ये तेरी लड़ाई है, तुझे खुद लड़नी है अकेले अपने दम पर। बस एक बार मुझे कोई सबूत हो जाए। एक ऐसा कोई सिरा मिल जाए जिससे मैं इस सारी गुत्थी सुलझा सकुँ। अगर घर में कोई सबूत नहीं है तो मुझे किसी और से इस बारे में मिलना होगा। रात बहुत हो गई आद्या! कुछ मत सोच और अभी सो जा। जो भी होगा सुबह देखेंगे।"

    आद्या ने कमरे की लाइट ऑफ कर दी।





22



घर पहुंचते ही विशेष को ध्यान आया और उसने जल्दी से अपना फोन निकाल कर अपने दोस्त का नंबर डायल किया। एक रिंग जाते ही दूसरी तरफ से कॉल रिसीव हो गया लेकिन किसी ने कुछ कहा नहीं। विशेष को यह बात थोड़ी अजीब लगी। उसने कहा, "हेलो भाई! क्या हुआ सब ठीक है?"

   दूसरी तरफ से आवाज आई, "आ........ या....... एवरी थिंग इज फाइन। एक्चुअली........!"

     विशेष को थोड़ा अजीब लगा। उसने कहा, "तु परेशान क्यों लग रहा है, सब ठीक तो है? तुझे इतना बेचैन मैंने कभी नहीं देखा। क्या हो गया तुझे? 

    दूसरी तरफ से आवाज आई, "नथिंग यार...........! वह........... वह लड़की कौन थी जिसके साथ तू मॉल में था? जिसकी आवाज मैंने सुनी थी।"

   विशेष बोला, "वह बकबक मशीन!! अश्विनी नाम है उसका। इतना बोलती है, इतना बोलती है कि पूछो मत। दिमाग चबाने की मशीन है वह। सिर्फ और सिर्फ आद्या की वजह से उसे झेल रहा हूं उसे वरना मुझे ऐसे बातूनी लोग बिल्कुल पसंद नहीं आते।"

     दूसरी तरफ से फिर आवाज आई, "मैं उसकी बात नहीं कर रहा। वो जो एक और लड़की थी, जिसने तेरा फोन तुझे दिया वह कौन थी?"

    विशेष को यह बात थोड़ी और ज्यादा अजीब लगी। उसने पूछा, "तु उस लड़की में इंटरेस्ट क्यों ले रहा है? तूने तो देखा भी नहीं है उसे।"

 "बता ना यार"

 "अच्छा ठीक है, बताता हु। वह आद्या थी, वही लड़की, हमारा टारगेट। लेकिन तू उसके बारे में क्यों पूछ रहा है? सब ठीक तो है¿ अचानक से किसी की आवाज में इतनी दिलचस्पी कैसे हो गई तुझे?" विशेष ने उसकी टांग खिंचाई करते हुए कहा। 

    दूसरी तरफ से थोड़ी परेशान सी आवाज आई, "ऐसा कुछ नहीं है यार। लेकिन पता नहीं क्यों, लगा जैसे मैंने उस आवाज को पहले कहीं सुना है। शायद मैं कुछ ज्यादा सोच रहा हूं। रात को ठीक से सोया नहीं था इसलिए दिमाग खराब हुआ पड़ा है मेरा।"

     विशेष ने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा और बोला, "तूने बताया कि तू इंडिया आ रहा है। इस बार कितने दिनों के लिए?"

   उधर से आवाज आई, "पता नहीं! काफी टाइम हो गया मॉम से मिले। इस बार सोच रहा हूं इतना लंबा टाइम गुजारुंगा। वैसे भी डैड चाहते हैं कि जल्द से जल्द मेरी और मलिका की सगाई हो जाए।"

     विशेष बोला, "तू सच में मलिश्का से शादी करने के लिए तैयार है? सोच ले, तेरी मॉम मलिश्का को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती। सिर्फ अपने डैड के कहने पर तू अपनी लाइफ का इतना बड़ा डिसीजन नहीं ले सकता। माना मलिश्का तुझे प्यार करती है लेकिन तेरी मॉम की पसंद की कुछ मायने रखती है। पहले उन दोनों के बीच सुलह तो करवा ले।"

     तुझे क्या लगता है दुनिया में कौन सी ऐसी सास है जो अपनी बहू को पसंद करती है? वैसे भी मैं और मलिश्का बचपन से एक दूसरे को जानते हैं। हमारी अच्छी दोस्ती है। हम एक दूसरे के साथ काफी कंपैटिबल हैं। शादी तो बस एक फॉर्मेलिटी है, ऐसा क्या है जो हमने साथ में नहीं किया। तो फिर से इस रिश्ते को नाम देने में क्या हर्ज है! मॉम भी उसे अपना लेगी और मलिश्का भी मॉम के दिल में अपनी जगह बना लेगी।"

   विशेष बोला, "खैर ये तेरी लाइफ है, तेरा डिसीजन होना चाहिए। मैं तो बस तेरी खुशी में खुश हूं। वैसे ये जो लड़की है आद्या! उसके करीब जाना थोड़ा मुश्किल तो है लेकिन इंप्रेस करना इतना भी मुश्किल नहीं लग रहा। बस थोड़ा अच्छा बनने का नाटक करते रहना पड़ेगा। एक बात जो मैंने आज जानी वह ये कि उसे हाईफाई लोग पसंद नहीं। सिंपल सी लड़की है, सिंपल लोग अच्छे लगते हैं। जिसकी एक नॉर्मल लाइफ हो। छोटी-छोटी आदतें हो। तु बिल्कुल भी परेशान मत हो। तेरी सगाई से पहले मैं अपना टारगेट जरूर पूरा कर लूंगा। तू अपने डैड को गिफ्ट देना चाहता है ना? यह प्रोजेक्ट खत्म करके मैं तुझे तेरी शादी का गिफ्ट देना चाहता हूं।"

     न जाने क्यों लेकिन दूसरी तरफ मौजूद शख्स को थोड़ी बेचैनी सी हुई। उसने कुछ काम का बहाना बनाकर फोन काट दिया। विशेष ने इस बात पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया और खुद में बड़बड़ाया, "आद्या बिल्कुल वैसी ही है कैसे मेरे मां बाबा चाहते हैं। लेकिन क्या वाकई में आद्या मुझे अपनाएगी? सच कहूं तो मुझे उसके लिए बुरा लग रहा है। सबसे पहले मैं उसे यकीन दिलाना चाहता हूं कि मैं उससे कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता। प्यार का तो पता नहीं लेकिन आद्या वह पहली लड़की है जिसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरा स्टेटस क्या है।" रात ज्यादा हो चुकी थी इसलिए विशेष भी सोने चला गया। 


     अगली सुबह अलार्म बसने के बावजूद आद्या की आंख नहीं खुली। देर रात सोने की वजह से आद्या आज भी देर तक सोती रही। हफ्ते में यह 2 दिन ही तो मिलते थे जिससे वह एक अच्छी नींद ले सके लेकिन वह हादसा उसे चैन से कहां सोने देते थे। अच्छी नींद उसे शायद ही कभी मिलती थी जैसे कल रात मिली। शायद थकान की वजह से वो रात में सोई तो अगले दिन फिर से दोपहर के करीब उसकी आंख खुली। उसने अधखुली आंखों से देखा तो घड़ी में पहले ही 11:00 बज चुके थे। 

   आद्या उठी और फ्रेश होने चली गई। ब्रश कर हाथ मुंह धो कर आद्या किचन में आई और अपने लिए कॉफी बनाने लगी। पेपर वाला पहले ही पेपर डालकर जा चुका था और वो एक हाथ में पेपर दूसरे हाथ में कॉफी का मग लिए बालकनी में बैठ गई जहां कभी उसके पापा बैठा करते थे, बिल्कुल उसी अंदाज में। अखबार के साथ चाय कॉफी का मजा ही कुछ और होता है'। पहले जब भी उसके पापा उसे यह बात कहते थे तो हो यह बात हंसी में उड़ा देती थी लेकिन अब यही सारी बातें उसे याद भी आती थी और वह अपने पापा की आदत को खुद में डालने की कोशिश भी करती। 

     एकदम से उसकी नजर अपने घर के सामने वाले मकान पर पड़ी जहां मिस्टर वर्मा बालकनी में अखबार पढ़ रहे थे। रविवार होने की वजह से वो भी घर पर ही थे। अचानक से आद्या को कुछ याद आया और वो फटाफट अपना कॉफी खत्म कर कमरे में गई। आद्या अभी भी नाइट ड्रेस में ही थी। उसने अपने कपड़े बदले और घर बंद कर सामने वाले वर्मा जी के घर चली गई। 

    दो तीन बार बेल बजाने के बाद वर्मा आंटी ने दरवाजा खोला तो आद्या को देख कर मुस्कुरा दी और बोली, "अरे आद्या बेटा तुम यहां? वह भी इतने वक्त के बाद, अचानक कैसे? जरूर कोई काम होगा वरना तुम कहाँ आने वाली। चलो अंदर आओ।" कहते हुए उन्होंने दरवाजा छोड़ दिया और साइड हो गई। 

    आध्या धीरे से अंदर आई और एक नजर पूरे घर में दौड़ाई। मिसेज बर्मा बोली, "बैठो बेटा। आज अचानक से कैसे? आमने सामने होते हुए भी तुम तो हमारे घर का रास्ता ही भूल गई।" 

     आद्या भी झूठी मुस्कान के साथ बोली, "आप भी तो नहीं आती आंटी।" यह सुनकर मिसेज वर्मा का चेहरा थोड़ा फीका पड़ गया। आखिर कुछ झूठ तो नहीं कहा था आद्या ने। उनका चेहरा देखकर आद्या बोली, "आंटी मैं थोड़ा चीनी लेने आई थी। वह क्या है ना, कल मार्केट गई लेकिन मुझे ध्यान ही नहीं रहा किचन में क्या है क्या नहीं तो मै चीनी लेना भूल गई। अभी कुछ देर पहले आँख खुली है मेरी तो सोचा सबसे पहले कॉफी पियूंगी उसके बाद ही कुछ काम हो पाएगा।"

     मिसेज वर्मा मुस्कुराते हुए बोली, "तुम्हें चीनी मिलेगी लेकिन तुम्हें कॉफी पीनी है तो मैं बना देती हूं। तुम आराम से बैठो।" कहते हुए मिसेज वर्मा किचन में चली गई। उसी वक्त मिस्टर वर्मा हॉल में आए। उन्होंने अखबार फोल्ड किया और टेबल पर रख कर आद्या के सामने बैठ गए। उन्होंने धीरे से कहा, "लगता है अभी कुछ देर पहले फीकी कॉफि पी थी, है ना?"

     आद्या थोड़ा झेंप गई उसे लगा नहीं था कि वर्मा अंकल उसकी चोरी पकड़ लेंगे। वर्मा जी बोले, "बेटा जो भी काम है आप बेझिझक बोल सकती हैं। अगर हमारे हाथ में हुआ तो आपकी मदद जरूर करेंगे। मुझे पता है आपको किसी का एहसान लेना पसंद नहीं लेकिन आप आई हैं तो जरूर कोई जरूरी काम होगा।" 

    आद्या ने किचन की तरफ देखा। उस वक्त हॉल में उन दोनों के अलावा कोई नहीं था। उसने धीरे से कहा, "अंकल आपसे कुछ इंफॉर्मेशन चाहिए थी। बात 4 साल पुरानी है।"





23 


आद्या ने मेहता अंकल को कॉल किया और अपने आने की जानकारी दी। मिस्टर वर्मा से उसे जो भी जानकारी मिली थी शायद वह कुछ काम आ सकती थी और जैसा कि मेहता अंकल ने कहा था, हर छोटी से छोटी कड़ी को जोड़ना होगा। किसी भी चीज को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।" मेहता साहब खुद अपने तरफ् से इस केस में छानबीन कर रहे थे। उनके कुछ लोग पिछले काफी टाइम से इस में लगे हुए थे लेकिन कहीं से भी किसी तरह का सुराग हाथ नहीं लग रहा था।

    आद्या जल्दी से नहाई और तैयार होकर किचन में चली आई। उसने अपने लिए हल्का सा दलिया बनाया और फटाफट उसे खत्म कर मेहता जी के घर के लिए निकल गई। आज रविवार था और आज उनका ऑफिस बंद था वरना वह हमेशा उन्हें उनके ऑफिस ही मिलने जाती थी। यह भी एक तरह से सही ही था। उस केस में जो भी जानकारी मिल रही थी किसी तीसरे के कानों तक नहीं पहुंचती। 

     कुछ देर के बाद ही आद्या मेहता अंकल के घर के दरवाजे पर थी। उसने जल्दी-जल्दी दरवाजे की बेल बजाई तो मेहता आंटी ने दरवाजा खोला। अपने सामने अपनी बिट्टू को देखकर मेहता आंटी बहुत खुश थी। उन्होंने कहा, "कब से राह देख रही थी तुम्हारी। चलो जल्दी से, पहले खाना खा लो उसके बाद कोई काम करना। तुम्हारे इंतजार में हम दोनों बुड्ढे भूखे प्यासे बैठे हुए हैं।"

    मेहता अंकल पीछे से उन्हें टोकते हुए बोले, "क्या भाग्यवान? आप अपने लिए बोलिए ना! मेरा नाम क्यों बुड्ढो में शामिल करती है आप? अरे अभी तो हम जवान हैं।"

    मेहता आंटी चिढ़कर बोली, "कुछ ही दिनों में बेटा घर में बहू लाकर रख देगा, फिर कहते रहिएगा, 'अभी तो हम जवान है' देखी है आपकी जवानी। अब चुपचाप हाथ मुँह धोइए और खाना खाने बैठिए।" फिर वह आद्या की तरफ देख कर बोली, "आद्या बेटा! पहले पेट पूजा उसके बाद कोई काम दूजा, ठीक है? चलो तुम भी हाथ पैर धो लो और सब के साथ खाना खाओ।"

    उन दोनों की नोकझोंक देखकर आद्या को अपने मम्मी पापा की याद आ गई। वो दोनों भी बिल्कुल इसी तरह एक दूसरे को परेशान किया करते थे। आद्या मेहता आंटी की बात से इंकार नहीं कर पाई। उसने हाथ पैर धोया और सबके साथ खाना खाने बैठ गयी। जितने कम समय में उसने अपने आने की खबर दी थी, उतने समय में मेहता आंटी ने कई तरह का खाना तैयार कर दिया था। एक औरत के लिए प्यार जताने का यही एक सबसे बड़ा तरीका होता है और आसान भी कि वो सामने वाले को उसकी पसंद का कुछ खाना बनाकर खिलाए। 

     आद्या ने सबके साथ बैठकर खाना खाया और उसके बाद मेहता आंटी ने आद्या को किसी बात के लिए टोकना सही नहीं समझा। वो जानती थी कि आद्या किस काम से आई थी।

     आद्या भी मेहता अंकल के साथ उनके स्टडी रूम में चली गई। वहां पहुंचते ही आद्या ने अपने बैग में से कुछ पेपर निकाल कर उनके सामने रह दिए और बोली, "अपने घर से तो मुझे कुछ नहीं मिला लेकिन वर्मा अंकल ने मुझे जो भी जानकारी दी और जो पेपर दिए वह सारे यह है। शायद हमें इससे कुछ लिंक मिल सके।"

    मेहता अंकल ने उन सारे पेपर्स को उठाकर बहुत ध्यान से देखा और उन पर लिखे नामों को अपने कंप्यूटर में सर्च किया। कुछ देर की माथापच्ची के बाद उन्होंने कहा, "जो बिल्डर 4 साल पहले वहाँ की जमीन को सामान खरीदना चाहता था और जो बिल्डर अब यह जमीन खरीद रहा है, उन दोनों के बीच में से किसी तरह की कोई तार जुड़ते नजर तो नहीं आ रहे लेकिन होने को कुछ भी हो सकता है। काफी कुछ ऐसा होता है जो हमें नजर नहीं आता लेकिन होता जरूर है। जो इंफॉर्मेशन हमें चाहिए वो इंटरनेट पर नहीं है और मिलेगी भी नहीं। इसके लिए मुझे अपने कुछ लोगों को काम पर लगाना होगा। जो इंस्पेक्टर इस केस को देख रहा था अब उसका ट्रांसफर हो चुका है लेकिन उसके बदले इंस्पेक्टर यहां का नया इंचार्ज बन कर आया है वह मेरा दूर का रिश्तेदार है। अगर मैं उससे बात करूं तो वह अंदरूनी खबर निकाल कर दे सकता है जिससे हमें आगे कोई लीड मिल सके। सच में यह केस जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा पेंचीदा नजर आ रहा है। उम्मीद करता हूं इन दोनों के बीच कहीं से कोई तार जुड़े हो और इन दोनों के तार उस कपूर से जुड़े हो। वैसे आद्या बेटा? आगे चलकर हो सकता है जैसे-जैसे कड़ीयाँ जुड़े तो तुम्हारे लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। हो सकता है कि वह कपूर अपनी गिरेबान बचाने के लिए तुम्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें। लेकिन इतना तो मुझे पता है, अगर यह सारा काम उस कपूर का है तो फिर वह पूरी कोशिश करेगा कि तुम्हें कुछ ना हो। हां, वह तुम्हें डरा धमका जरूर सकता है।"

    आद्या को मेहता अंकल की बातें समझ नहीं आई। उसने पूछा, "मैं कुछ समझी नहीं अंकल! वो लोग मुझे डरा धमका सकते हैं लेकिन वो मेरी जान लेने की कोशिश नहीं कर सकते। अगर ऐसा है तो उस इंसान ने मेरे मम्मी पापा को क्यों मारा? अगर उसे मेरी जमीन चाहिए तो?"

     मेहता जी बोले, "हो सकता है उन लोगों ने तुम्हारे मम्मी पापा को भी डराने धमकाने की कोशिश की हो, कई तरह के लालच दिए हो लेकिन तुम्हारे पापा को अपनी जमीन से बहुत ज्यादा प्यार था। वो घर तुम्हारा पुश्तैनी घर है। मुझे पूरा यकीन है कि कपूर ये अच्छे से जानता है वो घर तुम्हारे नाम पर है। जोशी ने बहुत पहले ही वो घर अपनी पत्नी और बेटी के नाम कर रखा था। हो सकता है जब वो एक्सीडेंट हुआ तब जानबूझकर गाड़ी को इस तरह टक्कर मारी गई जिसमें तुम्हें कुछ ना हो। क्योंकि उन दोनों के बाद उस घर की इकलौती मालकिन अब तुम हो। ऐसे में उन लोगों ने सोचा होगा कि तुम्हें डराना धमकाना या बहलाना आसान होगा। लेकिन उन्होंने तुम्हें एक बार भी कांटेक्ट करने की कोशिश नहीं की होगी, है ना?"

    आद्या ने हां में सर हिला दिया लेकिन कन्फ्यूजन अभी भी उसके चेहरे पर था। काफी सारी बातें ऐसी थी जिसके बारे में अभी भी उसे पता नहीं था। मेहता अंकल बोले, "बात ऐसी है बेटा जी, आपके 21 साल पूरे होने पर वो घर वैसे ही तुम्हारे नाम हो जाना था जो हो गयी। लेकिन उस प्रॉपर्टी को बेचने या किसी को ट्रांसफर करने का हक तुम्हें तब ही मिल सकेगा जब तुम 25 साल की हो जाओगी। उसमें भी उन पेपर पर तुम्हारे पति के साइन होना जरूरी है। तुम अकेले उस जमीन को बेच नहीं सकती। इस तरीके से जोशी ने पहले ही तुम्हारे लिए बहुत कुछ सोच रखा था ताकि अगर तुम किसी के दबाव में आ भी जाओ तब भी खुद से अकेले उस घर का कुछ ना कर पाओ। ऐसे में बिना तुम्हारे पति के रजामंदी के तुम्हारे अकेले का सिग्नेचर किसी काम का नहीं है। तुम्हारी समझ में आ रही है यह बात?"

    आद्या सोच में पड़ गई और बोली, "अगर मैं किसी ऐसे इंसान से शादी करती हूं जो मेरे मकसद ने मेरा साथ देगा या फिर अगर मैं कभी शादी ही नहीं करती हूँ तो कोई भी मुझसे मेरी जमीन नहीं छीन सकता। मेरा घर मुझसे नहीं छीन सकता, है ना अंकल?"

    मेहता अंकल ने मुस्कुराकर हां में सर हिला दिया। 





24



   आद्या हमेशा की तरह आज भी ऑफिस के लिए निकली लेकिन रास्ते में उसकी नजर एक बुके शॉप पर गई तो वह वहां रुक गई। कुछ देर सोचने के बाद वह अपने स्कूटी से उतरी और अंदर चली गई। पहले अपने फ्रेंड्स के लिए उसने काफी सारे फ्लावर्स खरीदे थे लेकिन इस तरह अपने बॉस को थैंक यू बोलने के लिए बुके देना उसे थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन किसी भी और चीज से बेहतर तो यही था। वरना अलग अलग गिफ्ट के अलग अलग मायने भी होते हैं जिसके बारे में आद्या बिलकुल नहीं जानती थी इसलिए बेहतर था कि वह विशेष के लिए एक अच्छा वाला बुके ही लेकर जाय। 

    अंदर पूरे शॉप में तरह-तरह के फूल लगे हुए थे लेकिन उन्हें देखकर आद्या और ज्यादा कंफ्यूज हो गई। उसे इस तरह परेशान दे शॉप की ओनर कहा, "आपको अपने बॉस को थैंक यू ही बोलना है ना? आप परेशान मत होइए मैं स्पेशली आपके लिए एक छोटा सा बुके तैयार कर देती हूं। कहते हुए उस लेडी ने साइड में रखें कुछ फूल उठाए जिनमें लाल पीले गुलाबी सफेद हर रंग के फूल थे। उन में कुछ पत्तियों को डाला और काफी खूबसूरती से एक रिबन में बांध दिया। 

    आद्या ने जब छोटे से बुके को देखा तो उसे वह बहुत खूबसूरत लगा। वो ऑनर बोली, "आप इसे या तो सीधे अपने बॉस को दे सकती है या फिर उनके टेबल पर वास में भी लगा सकती है, जैसे आपको अच्छा लगे।"

    आध्या को यही चाहिए था। उसने उसे थैंक्यू कहा और पेमेंट कर वहां से निकल गई। ऑफिस पहुंचते ही उसने अपनी स्कूटी पार्क की और जल्दी से अंदर की तरफ भागी। सिक्योरिटी गार्ड ने उसे गुड मॉर्निंग कहा तो आद्या ने भी उन्हें मॉर्निंग विश कर अपने केबिन की तरफ भागी। रास्ते में उसने अपने लिए एक कॉफी भी आर्डर कर दिया।

     जैसे वह केबिन में पहुंची तो पूरा केबिन खाली था। उसने ध्यान ही नहीं दिया कि अभी तक ज्यादा स्टाफ नहीं आए हुए थे, बस एक-दो ही वहां मौजूद थे। उसने घड़ी की तरफ नजर घुमाई तो पाया अभी सुबह के 9:15 बज रहे थे और ऑफिस 10:00 बजे शुरू होता था। इसीलिए सिक्योरिटी गार्ड उसे इतनी अजीब तरह से देख रहा था। आद्या ने अपने सर पर हाथ मारा और खुद से बड़बड़ाई, "इतनी सुबह तो कोई आया भी नहीं है फिर मैं अपना कॉफी का आर्डर किसे दे कर आई हूं? पागल लड़की! तू होश में भी है तू क्या कर रही है? इतनी सुबह आने की क्या जरूरत थी? कम से कम घर से निकलने से पहले एक बार टाइम तो देख लेती। अपनी एक्साइटमेंट में तुझे कुछ नजर नहीं आता है।"

    आध्या ने अपने हाथ में रखा वह छोटा सा बुके विशेष के टेवल के सामने वास में लगा दिया और बाहर अपना कॉफी लेने के लिए निकल गई। कल की अपनी इस हरकत पर उसे खुद शर्म आ रही थी। और कुछ नहीं तो कम से कम विशेष को उसने अपने घर में आने दिया होता। क्या हो रहा था अगर एक कप चाय ही पूछ लेती तो...... लेकिन अब जो हो गया सो हो गया। इसे तु बदल तो नहीं सकती लेकिन आइंदा ऐसी कोई गलती मत करना। कुछ और नहीं कम से कम वो तेरे बॉस है, थोड़ी रिस्पेक्ट तो तू दे ही सकती है। भले ही तु उस पर भरोसा करें या ना करें। कोई और होता तो नाराज हो कर गया होता। सोचते हुए आद्या कॉफी मशीन की तरफ गई और अपने लिए कॉफी निकाल लाइ। 

     ऑफिस अभी भी बहुत शांत था इसलिए उसने इसका पूरा फायदा उठाया और सोफे पर आराम से पसर कर उसने अपनी कॉफी खत्म की। घड़ी में देखा तो अभी 9:30 बज रहे थे। विशेष के केबिन में बैठकर उसने कुछ जरूरी फाइल्स को समेटा और कुछ को टेबल पर रख दिया। उसके बाद आज का पूरा शेड्यूल देखा साथ में थोड़ी सी सफाई भी कर दी फिर भी उसका वक्त नहीं कट रहा था तो उसने अपने डेस्क पर जाना सही समझा। बैठकर इंतजार करने में वक्त बर्बाद करने से बेहतर है कि वह कुछ काम ही कर ले। यह सोचकर उसने अपना कंप्यूटर ऑन किया और कल का बचा हुआ काम निपटाने लगी। 

     कुछ जरूरी फाइल्स आज मीटिंग के लिए चाहिए थी आद्या को उस पर भी काम करना था। कुछ ही देर में आद्या पूरी तरह से अपने काम में मग्न हो गई। उसका पूरा ध्यान अपने काम पर था और अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर। उसे वक्त और अपने आस पास का ध्यान ही नहीं रहा। 

    विशेष जब केबिन में आया तो उसकी नजर सबसे पहले अपने टेबल पर रखी उन ताज़े फूलों पर गई जिन्हें देखकर वह थोड़ा चौक गया। कीबोर्ड की खटखट से उसका ध्यान आद्या की डेस्क पर गया तो उसने पाया आद्या पूरी तल्लीन होकर अपने काम में लगी हुई थी। वह धीरे से आद्या के टेबल के सामने खड़ा हुआ और हल्के से खांसा लेकिन आद्या आपने काम में इतना खोई हुई थी कि उसे अहसास ही नहीं हुआ कब विशेष उसके सामने आकर खड़ा हो गया। 

   विशेष धीरे से मुस्कुरा दिया और एक बार फिर अपने चेहरे पर गंभीर भाव लाकर उसने टेबल पर हल्के से नॉक किया। एकदम से आद्या का ध्यान भंग हुआ और उसने नजर उठाकर देखा तो सामने विशेष खड़ा था। अचानक से उसे अपने सामने देख कर आद्या पूरी तरह से डर गई और उसकी आवाज के गले में ही अटक कर रह गई। उसे एहसास नहीं हुआ कि वह कितने वक्त से उसके सामने खड़ा था। 

     आद्या ने खुद को शांत किया और कुर्सी पर से खड़ी होते हुए बोली, "गुड.... गुड.... गुड मॉर्निंग सर! सॉरी सर! थैंक यू सर!"

    आध्या इतनी बुरी तरह से घबराई हुई थी कि उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोल रही है। उसको इस तरह परेशान देखकर विशेष की हंसी छूट गई और वह हैरानी से बोला, "ये आप क्या कह रही है मिस जोशी? थैंक यू, सॉरी या गुड मॉर्निंग?"

    आद्या को अपनी बेवकूफी पर थोड़ी शर्म आई और उसने अपना एक्सप्लेनेशन देते हुए कहा, "गुड मॉर्निंग सर क्योंकि अभी मॉर्निंग है और थैंक यू सर आपने कल मेरे लिए मेडिसिन लेकर आए और सॉरी मैंने आपको एक बार भी थैंक यू नहीं बोला था इसलिए।"

    विशेष ने मुस्कुराकर उन फूलों की तरफ देखा और आद्या से बोला, "तो यह आप लेकर आई हैं मुझे थैंक यू कहने के लिए?"

    आद्या ने हां में सिर हिला दिया और घबराए हुए नजरों से उसे देखने लगी। विशेष ने उन फूलों को गुलदान समेत उठाया और बोला, "वैसे तो मुझे फूलों में कोई इंट्रेस्ट नहीं है लेकिन कहते हैं ना कि सुबह-सुबह ताजे फूलों को देखो तो दिनभर ताजगी बनी रहती है। मेरी एक बार कहती है ऐसा। वैसे मैं इस सब बातों पे यकीन नहीं करता हूं लेकिन वाकई में शायद मेरी मां सही कहती है।"

    आद्या भी उन फूलों की तरफ देखते हुए बोली, "मां कभी गलत नहीं होती है सर। उनकी सीख हमेशा सही होती है।"

    आद्या की बात सुनकर विशेष उसकी तरफ पलट कर बोला, "अगर ऐसी बात है मिस् जोशी तो अब से मुझे मेरे टेबल पर रोज फ्रेश फूल चाहिए। बिल्कुल इसी तरह। आप लेकर आएंगे मेरे लिए?"

    आद्या को समझ नहीं आया कि वह कहें तो क्या कहें। उसने सोचा नहीं था कि उसकी यह हरकत विशेष को अच्छी लगेगी। आद्या को खामोश देखकर विशेष ने कुछ और समझा और उसने कहा, "आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। जिस फ्लावर शॉप से आप इसे लेकर आई है उनके साथ हम एक छोटी सी डील कर लेते हैं। आपको बस उनके यहां से बुके लेकर आना है। शायद ये आपके घर के रास्ते मे पड़ता है, है ना?"

   आद्या ने बस हाँ में सर हिला दिया। 

    


25




आद्या को विशेष का ऐसा दोस्ताना रूप अच्छा लगा। उसे डर था कहीं विशेष उसके किसी बात का बुरा ना माना हो लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अगले दिन से उसने हर रोज फूलों का एक छोटा सा गुलदस्ता लाना शुरू कर दिया जैसा कि विशेष ने कहा था। विशेष भी सुबह जैसे ही अपने केबिन में कदम रखता उसका स्वागत ताजे खूबसूरत फूल करते जिससे विशेष का मन भी काम में लगा रहता। बस चंद दिनों में उसे इस सब की आदत हो गई थी और आद्या को भी। 

     वही तेजल सुबह-सुबह आद्या के हाथ में फूलों का गुलदस्ता देख बुरी तरह से चिढ़ जाती। विशेष से आद्या की नज़दीकियां उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। वह बस आद्या को किसी ने किस तरीके से नीचा दिखाने की कोशिश करती लेकिन आद्या का पूरा टाइम विशेष के साथ ही गुजरता, ऐसे में सेजल चाह कर भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाती। वह अगर कुछ कर सकती थी तो सिर्फ इतना कि आद्या और विशेष के बीच के रिश्तो को लेकर अफवाह उड़ाना। लेकिन यह काम भी वो खुलकर नहीं कर सकती थी क्योंकि बात यहां आद्या के साथ किसी एंप्लॉय का नहीं बल्कि खुद बॉस का नाम जुड़ा हुआ था। 

    अश्विनी जो कि विशेष पर पहले दिन से लट्टू थी उसे आद्या और विशेष की नज़दीकियां थोड़ी खटक रही थी। उसे आद्या से कोई जलन नहीं थी फिर भी उसने मौका देखकर आद्या को साइड में किया और बोली, "तेरे और विशेष सर के बीच क्या चल रहा है? पूरे ऑफिस में कानाफूसी हो रही है और मैं अच्छे से जानती हूं इस सब के पीछे सिर्फ और सिर्फ उस सडी गली सेजल का हाथ है। बॉस की वजह से वह सामने से कुछ नहीं कह रही लेकिन उसके अलावा किसी और की करतूत हो भी नहीं सकती।"

   आद्या ने सुना तो हैरानी से बोली, "यह सब तु क्या बकवास कर रही है? विशेष सर मेरे बॉस है और मैं उनकी असिस्टेंट। हमारे बीच सिर्फ एक प्रोफेशनल रिश्ता है। मुझे अपनी लाइफ में ना तो ऐसा कुछ चाहिए और ना ही मेरे पास टाइम है। विशेष सर ने मुझे अपने असिस्टेंट के लिए क्यों चुना यह बात मुझे अभी भी समझ नहीं आती लेकिन अभी तक उन्होंने मेरे साथ कोई बदतमीजी नहीं की। शायद उन्हें लेकर में गलत थी लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि मेरे दिल में उनके लिए कोई फीलिंग्स नहीं है और ना कभी होगी। प्यार के लिए मेरे पास बिलकुल भी वक्त नहीं है और यह बात तु अच्छे से जानती है अश्विनी।"


अश्विनी को आद्या की बातों पर पूरी तरह से यकीन तो नहीं हुआ लेकिन जब उसने आद्या के चेहरे पर ऐसे कोई था नहीं देखें तब भी उसे बुरा लगा। उसने मन ही मन कहा, "हे भगवान जी! अगर मेरी दोस्त की किस्मत में खुशियां लाने वाला यह वो इंसान है तो मैं दिल से चाहूंगी कि मेरी दोस्त को वह मिले। वह या कोई और, लेकिन जो भी हो आद्या कब तक जो अंधेरे में गुम रहेगी? उसकी जिंदगी में कोई ऐसा भेज दो भगवान जो उसके होठों पर मुस्कुराहट ले आए। अगर वो विशेष सर है तो कोई बात नही, आप मेरे लिए दुसरा भेज देना।"

     लेकिन आद्या को इस सब से कोई मतलब ही नहीं था। विशेष का रवैया उसके प्रति दोस्ताना था इस बात से आद्या उससे बात करने में थोड़ी सहज थी और काम करने में भी। बहुत जल्दी उसने विशेष का सारा काम संभाल लिया था फिर चाहे वह ऑफिस में मीटिंग हो या फिर कहीं बाहर मीटिंग अरेंज करवाना, आद्या सारे काम बहुत बखूबी से और बहुत तेजी से करती। विशेष के साथ रहते हुए उसे एक फायदा जरूर था के सेजल उसके खिलाफ कुछ नहीं कर पाती थी। वरना आए दिन उसे सेजल के साथ रस्साकशी करनी पड़ती थी। ना चाहते हुए भी उसे उस बदतमीज लड़की को झेलना पड़ता। 

    विशेष के आने के बाद से आद्या की लाइफ की कुछ मुश्किलें बढ़ी थी तो कुछ आसान भी हुई। इस तरफ विशेष का झुकाव आद्या की तरफ बढ़ने लगा था लेकिन ऐसे में वह अपना मकसद नहीं भूल सकता था, वो चाहता तब भी नहीं। किसी भी तरह उसे अपना काम पूरा करना था। इसके लिए उसने आद्या के दिल में अपनी जगह बनानी शुरू भी कर दी थी और यह बात उसे आद्या के व्यवहार से साफ पता चलता था लेकिन अभी भी उसे कुछ ऐसा करना था जिससे आद्या के दिल में अपने लिए प्यार भले ही ना जगा पाए लेकिन उस पर पूरी तरह भरोसा जरूर कर सकें। 


     रोज की तरह आद्या सुबह-सुबह हाथ में फूल लिए ऑफिस पहुंची लेकिन जैसे ही उसने केबिन का दरवाजा खोला अंदर विशेष को बैठा देख वह हैरान रह गई। विशेष कभी उससे पहले ऑफिस नहीं आता था। वह वक़्त का पाबंद था और रोज एक ही टाइम पर ऑफिस आना उसके नियम में शुमार था। आज उसे इतनी जल्दी आया देख आद्या हड़बड़ा कर बोली, "गुड मॉर्निंग सर! आप....... आप इतनी जल्दी, इतनी सुबह ऑफिस में क्या कर रहे है? मेरा मतलब इतनी सुबह आप तो नहीं आते। आज आप थोड़ा जल्दी नहीं आ गए?"

     विशेष ने उसे कुछ पल घूर कर देखा और बोला, "शायद यह मेरा ऑफिस है मिस जोशी और शायद यहां आने जाने के लिए मुझे किसी की परमिशन से जरूरत नहीं है।

     आद्या झेंप गई और उसने बात संभालते हुए कहा, "मेरे कहने का मतलब वह नहीं था सर। वो क्या है ना, आप हमेशा टाइम पर आते हैं और मैं हमेशा आपके आने से पहले आ जाती हूं। अगर कोई अर्जेंट काम था तो आप मुझे पहले बता देते तो मैं और जल्दी आ जाती।"

      विशेष को समझ नहीं आया कि वह आद्या से क्या कहें। उसे इस तरह अपनी तरफ देखता पाकर आद्या सर झुका कर बोली, "सॉरी सर! मुझे पता होना चाहिए था।"

     विशेष ने आद्या को बैठने का इशारा किया। आद्या चुपचाप विशेष के टेबल के सामने गई और उसने फूलों को वही गुलदान में लगा दिया। विशेष उसे बहुत ध्यान से देख रहा था। फूलों को जगह पर लगाकर आद्या ने अपनी बैग से नोटपैड और पेन निकाला और वह उसके सामने बैठ गई। 

     विशेष बोला, "गुड़गांव हाईवे पर जो जमीन है वह हमारे लिए बहुत जरूरी है, और यह बात आप अच्छे से जानती हैं। आज होने वाली नीलामी में दिल्ली के टॉप बिजनेसमैन शामिल होंगे यह बात भी आप अच्छे से जानती हैं।"

    आद्या ने हां में सिर हिलाया तो विशेष आगे बोला, "सारे नहीं लेकिन उनमें से दो कंपनीज ऐसी है जिनके खिलाफ हमें बोली लगानी है। एक है खन्ना अंपायर और दूसरा है कपूर इंडस्ट्रीज।"

   कपूर इंडस्ट्रीज का नाम सुनते ही आद्या के कान खड़े हो गए। अपना तीर निशाने पर लगता देख विशेष बोला, "वो दोनों ही उस जमीन को हथियाने के फिराक में है लेकिन हमें कुछ भी करके उन्हें रोकना है। यह जमीन हमें चाहिए फिर चाहे इसके लिए हमें कितनी ही बड़ी बोली क्यों न लगाने पड़े। हमें कपूर इंडस्ट्रीज हमें हारना नहीं है। मानिक कपूर को उसकी असली जगह दिखानी है मुझे।"

      आद्या ने सर उठाकर विशेष की तरफ देखा जिसके चेहरे पर गुस्सा नजर आ रहा था। 






26



विशेष ने अपनी बात आद्या को समझा दी साथ ही वो आद्या से जिस तरह का रिएक्शन चाहता था आद्या ने बिलकुल उसी तरह रिएक्ट भी किया। लेकिन आद्या जानती थी कि इस बारे मे वो किसी से ना तो बात कर सकती थी और ना ही किसी को भनक लगने दे सकती थी। विशेष तो अभी भी उसके लिए एक अजनबी ही था। आखिर उसे वो जानती ही कितना थी! 

   विशेष उसे अपनी आगे की स्ट्रेटजी समझा रहा था और बीच बीच में माणिक कपूर के खिलाफ अपनी मंसा भी जाहिर कर रहा था ताकि आद्या को अपने भरोसे में ले सके। आद्या ने एक गहरी साँस ली और बिना कुछ कहे वहाँ से उठकर जाने लगी। उसे इस तरह जाते देख विशेष परेशान हो गया। उसे लगा शायद आद्या पर उसका ट्रिक काम नहीं किया और वो आद्या का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। फिर भी उसने उम्मीद नही छोड़ी और आद्या को पीछे से रोकते हुए बोला, "मिस् जोशी!“

    आद्या चलते चलते रुकी और पलटकर देखा। विशेष अपनी कुर्सी से उठा और उसके पास आकर बोला, "मिस जोशी! इस बारे में आपको कुछ पूछना नहीं है?“

    आद्या पूछना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन उसे पूरी तरह से विशेष पर भरोसा नहीं था। ना जाने मिस्टर कपूर का कब कौन सा आदमी उसके सामने उसका दोस्त बनकर खड़ा हो जाए और उसके भरोसे का फायदा उठाकर उसके पीठ पीछे धोखा दे जाए। एक एंप्लॉय होने के नाते आद्या विशेष की इज्जत करती थी लेकिन यह भी सच था कि वह अपने अलावा किसी पर भी भरोसा नहीं करती थी। बस एक मेहता फैमिली थी जिन्होंने आद्या के हर बुरे वक्त में उनका साथ दिया फिर भी आद्या आंखें बंद कर उन पर भी भरोसा नहीं करती थी ऐसे में वह उस इंसान पर कैसे भरोसा कर ले जिसे वह पिछले कुछ दिनों से जानती है। 

    आद्या ने सर झुकाया और ना में सर हिला दिया। विशेष को इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी फिर भी उसने सोचा, 'आज नहीं तो कल आद्या उसके जाल में फंस कर रहेगी'

     दोपहर के समय आद्या ने सारी फाइल इकट्ठा की और जरूरी पेपर को लेकर विशेष के पास आई। उस वक्त विशेष लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था। आद्या ने उसके सामने खड़े होकर कहा, "सर मुझे लगता है अब हमें निकलना चाहिए। नीलामी शुरू होने से पहले हमें वहां पहुंचना होगा वरना अगर हम लेट हो गए तो आपके रेपुटेशन पर गलत असर पड़ेगा।"

     विशेष ने भौंहे चढ़ाकर थोड़ा सख्ती में कहा, "आपको नहीं लगता आप कुछ ज्यादा मेरे साथ ओपन हो रही है! मत भूलिए मैं आपका बॉस हूं और आप मेरी असिस्टेंट।"

   आद्या को भी एहसास हुआ कि उसने क्या कहा। उसने अपना सर झुका लिया तो विशेष बोला, "इतना सोचने की जरूरत नहीं है। आप मेरे बारे में इतना सोचती है यह बहुत है मेरे लिए और आपने सही कहा, हमें देश हो रही है। मुझे ही ध्यान नहीं रहा, थैंक यू।"

   आद्या ने धीरे से कहा, "यह तो मेरा काम है सर!"

    विशेष उठा और अपना फोन लेकर केबिन से बाहर निकल गया। आद्या भी जरूरी फाइल लेकर उसके पीछे पीछे केदिन से निकली। उन दोनों को एक साथ जाते देख सेजल का दिल किया वह अभी आद्या का मर्डर कर दे। ना तो वो आद्या के खिलाफ कुछ कर पा रही थी और ना ही विशेष को अपने करीब खिंच पा रही थी। विशेष ने तो अपने केबिन में उसकी इंट्री एकदम से बंद कर रखा था और दोपहर का लंच भी विशेष अक्सर आद्या के साथ अपनी केबिन में ही करता जिस वजह से वह विशेष के आसपास भी नहीं फटक सकती थी। 

      उन दोनों को जाते देख सैजल गुस्से में बोली, "देखो तो सब लोग, कैसे दोनों साथ में निकले हैं। मैं कह रही हूं, कुछ तो गड़बड़ जरूर है वरना जो विशेष सर सीधे मुंह किसी से बात नहीं करते आद्या के लिए इतना सॉफ्ट कैसे हो सकते हैं? अक्सर ये लोग ऑफिस के टाइम में बाहर निकल जाते हैं। ऐसी कौन सी मीटिंग होती है जो ऑफिस में नहीं हो सकती?"

     नितिन उसे डांटते हुए बोला बस करो सेजल! तुम्हारी इनसिक्योरिटी कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही है। अपनी जुबान पर कंट्रोल करो वरना कहीं यह सारी बातें बॉस तक पहुंच गई तो तुम्हारी नौकरी चली जाएगी। बड़े लोग की बड़ी बातें। जरूरी नहीं कि सारे मीटिंग ऑफिस में हो कुछ मीटिंग के लिए लोग डिनर तक अरेंज करवाते हैं और पूरा का पूरा होटल बुक कर दिया जाता है, तुम एक केबिन की बात कर रही हो! जहां तक मैं आद्या को जानता हूं आद्या उनमें से नहीं है जैसा तुम उसे बनाने की कोशिश कर रही हो। इस वक्त भी वो दोनों बहुत जरूरी काम से निकले हैं इसलिए बेवजह अफवाह उड़ाने की कोशिश मत करना।*

    सेजल ने गुस्से में पलट कर नितिन की तरफ देखा और बोली, "बहुत ज्यादा अच्छे से तुम आद्या को समझने लगे हो! कुछ ज्यादा ही नजदीकया नहीं बढ़ रही तुम दोनों की? मानना पड़ेगा इस लड़की को। एक तरफ बॉस दूसरी तरफ टीम लीडर। लेकिन मेरी समझ नहीं आ रहा जब बॉस के साथ चक्कर चल रहा है तो फिर वह तुम्हें क्यों भाव दे रही है?"

   नितिन का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया। वो सेजल् से कुछ कहना चाह रहा था लेकिन वो जानता था सैजल कुछ कहना बेकार है। लेकिन तभी मैंनजर की नजर उस पर पड़ी और उसने गुस्से में कहा, "बस करो सेजल! कुछ ज्यादा हो रहा है तुम्हारा। लगता है इस कंपनी में तुम्हारे दिन पूरे हो चुके हैं तभी ऐसी हरकत कर रही हो। चुपचाप अपने काम पर ध्यान दो और जो टारगेट तुम्हें दिया गया है उम्मीद करता हूं तुम उसे अपने दम पर अचीव करके दिखाओगी वरना तुम्हारा एलिमिनेशन लेटर मैं खुद विशेष सर को भेजूंगा।" सेजल अंदर ही अंदर उबल गई। 


    करीब 1 घंटे के सफर के बाद आद्या और विशेष उस जगह पहुंचे जहां नीलामी होनी थी। नीलामी की व्यवस्था एक बड़े से हॉल में की गई थी जहां सब के नाम से टेबल बुक थे। वहाँ के मैनेजर ने जैसे ही उन दोनों को देखा वह आगे आया और हाथ जोड़कर उन दोनों का वेलकम किया। विशेष बस धीरे से मुस्कुरा दिया लेकिन आद्या ने भी शिष्टाचार के तहत उसके सामने हाथ जोड़ लिए। 

     मैनेजर उन दोनों को उनकी रिजर्व की हुई टेबल तक लेकर गया वहां उन दोनों को बैठा कर उसने खुद वेटर को आवाज लगाई और विशेष से पूछा, "सर आप क्या लेना पसंद करेंगे, ठंडा या गर्म?"

    विशेष ने आद्या की तरफ इशारा किया तो मैनेजर आद्या की तरह पलट कर उसके जवाब का इंतजार करने लगा। आद्या बोली, "मेरे लिए चाय और सर के लिए कॉफी।"

     मैनेजर ने वेटर को आर्डर दिया और खुद भी दूसरे गेस्ट को अटेंड करने के लिए चला गया। वह पूरा हॉल फूलों से भरा हुआ था जिसकी खुशबू आद्या की नाक तक पहुंच रही थी जिससे उसे हल्की सी छींक आ गई। विशेष को लगा शायद एसी की वजह से आद्या हुई ठंड लग रही है क्योंकि उसने हल्के कपड़े पहन रखे थे। 

    विशेष ने अपना कोर्ट उतारा और आद्या की तरफ बढ़ाया तो आद्या बोली, "सर इसकी जरूरत नहीं है। वो क्या है ना, यह फूलों की स्मेल अचानक से.......... बस इसी वजह से मुझे थोड़ी सी छींक आ गई। मुझे ठंड नहीं लग रही, बिल्कुल भी नहीं।"

    विशेष ने सुना तो बुरा जरूर लगा और उस कोट को वापस पहनने के बजाय उसने वही साइड में पड़ी कुर्सी पर रख दिया। नीलामी शुरू होने में अभी थोड़ा वक्त था और कुछ गेस्ट अभी और आने बाकी थे। आद्या ने कहा, "सर मैं थोड़ा वॉशरूम होकर आती हूं......... अगर आपको कोई एतराज ना हो तो!"

     विशेष उसका मजाक उड़ाते हुए बोला, "इसमें मैं बना वाला कौन होता हूं? आप जाइये और फ्रेश हो लीजिए क्योंकि अभी से एक घंटे तक उठने का मौका नहीं मिलेगा।"

     विशेष की बात सुनकर आद्या जल्दी से उठी और वॉशरूम की तरफ भागी जो कि हॉल के बाहर कॉरिडोर के दूसरी तरफ था। कॉरिडोर के बीचो-बीच लिफ्ट थी। आध्या जैसे ही लिफ्ट के करीब पहुंची वैसे ही लिफ्ट का दरवाजा खुला। उसमें से तकरीबन 50 साल का एक शख्स बाहर निकला और बोला, "अरे आद्या बेटा! आप यहां?"

   आद्या के कदम वहीं पर जम गए। 


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